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बीजेपी प्रत्याशी संजीव शर्मा का कम मतदान का डर, बढ़ सकती है चुनौतियां?

बीजेपी प्रत्याशी संजीव शर्मा का कम मतदान का डर, बढ़ सकती है चुनौतियां?  अजय शर्मा राजनीतिक विश्लेषक  गाजियाबाद में सदर सीट पर उपचुनाव को लेकर प्रत्याशियों की मतदाताओं से मुलाकात शुरू हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी संजीव शर्मा हर वार्ड में प्रभावशाली लोगों से मिल रहे हैं लेकिन एक खबर ऐसी है जिसने पूरे शहर को चौंका दिया है और वह है कि संजीव शर्मा ने मतदान प्रतिशत में वृद्धि की अपील की है जिसका विश्लेषण करने पर यह समझ में आता है कि उन्हें कम मतदान का डर है और यदि ऐसा है तो उनके जीतने की राह काफी कठिन है। कम मतदान होने से उनके हर और जीत का अंतर बहुत ज्यादा काम हो सकता है जो दूसरे प्रत्याशी को फायदा पहुंचाने का काम कर सकता है और यदि मतदान को लेकर मतदाताओं में निरस्त रहेगी तो कोई भी बड़ा उलट फेर हो सकता है।  वैसे भी कहां जाता है जनता के दिल में क्या है यह समझ पाना बहुत मुश्किल है लेकिन इतना जरूर है जो भी पार्टी अपने कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरकर मतदाताओं को बाहर निकाल लेगी वह जीत की तरफ बढ़ जाएगी ऐसे में सपा प्रत्याशी सिंह राज और बसपा के प्रत्याशी पीएम कर के कार्यकर्...

https://youtu.be/PBl9fP4C5kkनए वायरस का प्रकोप कैसे बचेंगे आपचैनल को सब्सक्राइब करें

व्यक्तित्व के वास्तविक अर्थ को समझे

अंग्रेजी में शब्द है, पर्सनेलिटी। वह बहुत कीमती शब्द है। यूनान में जो नाटक होते थे, उन नाटकों में पात्रों को अपनेचेहरे पर एक मुखौटा लगाना पड़ता था। उस मुखौटे का नाम परसोना होता था। और उसी शब्द परसोना से पर्सनैलिटी बना है। पर्सनैलिटी का अर्थ है, ओढ़ा हुआ व्यक्तित्व, ओढ़ा हुआ मुखौटा। जो आप नहीं हैं, वैसा चेहरा।तो जो व्यक्ति अपने भीतर की प्रकृति के विपरीत होता है, अनिवार्य रूप से उसे उसप्रकृति के विपरीत एक मुखौटा निर्मित करना होता है। एक व्यक्तित्व की खोल अपने चारों तरफ बना लेता है। यह खोल अंतरात्मा से मिलन न होने देगी। निसर्ग आपके खिलाफ नहीं है, लेकिन आपका व्यक्तित्व आपके खिलाफ है। और हर आदमी व्यक्तित्व बनाए हुए है, और उसको मजबूत किए चला जाता है। मेरे पास लोग आते हैं, वे कहते हैं कि आत्मा को जानना है, लेकिन व्यक्तित्व को छोड़ने की जरा भी तैयारी नहीं होती। वे अपने व्यक्तित्व को पकड़ कर ही आत्मा को पाना चाहते हैं! यह असंभव है। इस व्यक्तित्व को ठीक से समझ लेना जरूरी है, तो ही आप आत्मा की खोज में आगे बढ़ सकेंगे, अन्यथा आप हमेशा भटकते रहेंगे। क्योंकि जिसको आपने पकड़ा है, वही तो बाधा है। ...

कोरोना घातक है मानव समाज के लिए

कोरोना कर सकता है मानव सभ्यता का अंत  यूपी में विधान सभा चुनाव है और कोरोना के नये वेरियंट ओमीक्रोन के बढ़ने की खबरें आने लगी हैं। दिल्ली सरकार ने भी नये साल और क्रिसमस के कार्यक्रमों पर पाबंदी लगा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन अपनी ंिचंताएं जाहिर कर रहा है। यह तीसरी लहर बहुत ही घातक साबित होगी।    लेकिन राजनीतिक पार्टियां और यूपी सरकार इसको लेकर गंभीर दिखाई नहीं दे रही है। सोशल डिस्टेंसिग तो बहुत दूर की बात है लोग मास्क लगाना तक जरूरी नहीं समझ रहें हैं। लोगों का कहना है कि देखा जाएगा। जिसकी मौत लिखी होगी उसे कोई रोक नहीं सकता। इसलिए मौत से क्या डरना। क्या हम कोरोना के तांडव को देखने के लिए तैयार रहें। मैंने पिछली लहर भी कहा था कि मानव सभ्यता पर संकट है। मानव सभ्यता को अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़नी होगी। अन्यथा मानव सभ्यता अपने अस्तित्व की समाप्ति की ओर है। यह ठीक डायनासोर के अस्तित्व के अंत जैसा है। और भी ऐसी बहुत सी प्रजातियां थी जो विलुप्त हो गई जो आज इतिहास की कहानी हैं।  हमें मानव सभ्यता के अस्तित्व को बचाने के लिए जागना होगा नहीं तो कोरोना इस प्रजाति को निगल ज...

उत्तर प्रदेश की राजनीति में हिंदुत्व का कार्ड वर्सेस समाजवादी विकास कार्ड

अजय शर्मा वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक उत्तर प्रदेश की सियासत में मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि और शाही मस्जिद को लेकर केशव प्रसाद मौर्य के ट्वीट के ऊपर संभल के सांसद और सपा नेता रहमान के बयान ने सियासी तड़का लगा दिया है.  सहारनपुर में भाजपा के वरिष्ठ नेता और गृहमंत्री अमित शाह मैं अपनी रैली में जो कहा है वह अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि सहारनपुर में शाकुंभरी देवी के नाम पर विश्वविद्यालय बनेगा।  इससे उत्तर प्रदेश की सियासत में ध्रुवीकरण की संभावनाएं बहुत ज्यादा बढ़ गई है केशव प्रसाद मौर्य अपने बयान पर कायम है बीजेपी के प्रवक्ता हिंदुत्व और विकास की राजनीति की बात कर रहे हैं जिससे यह साफ हो गया है कि अब उत्तर प्रदेश की सियासत में कृष्ण जन्मभूमि ही चुनावी मुद्दा रहेगा.  आपको मैं यहां पर बता दूं जब पीवी नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री थे उस वक्त की सरकार ने वरशिप एक्ट 1991 मैं पास किया था। साल 1991 में रामजन्मभूमि आंदोलन चरम पर था. उस दौरान अयोध्या के साथ ही तमाम मंदिर-मस्जिद विवाद उठने लगे थे. ऐसे में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की स...

अखिलेश यादव ने बदल दी है उत्तर प्रदेश की सियासत

अखिलेश यादव ने बदल दिया है सियासी माहौल अजय शर्मा वरिष्ठ टीवी पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक उत्तर प्रदेश में सियासत अब घोड़े की चाल यानी कि  कदम चलने लगी है. पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं सत्ताधारी पक्ष अपने आप को उसी पुराने तौर-तरीकों के साथ जनता के सामने रख रहा है जिसमें राष्ट्रवाद, जिन्ना, अब्बा जान, कोरोना से निपटने की कामयाबी, माफियाओं और अपराधियों पर बुलडोजर चलाना.  वहीं विपक्ष रोटी, कपडा और मकान, महंगाई, बेरोजगारी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और बलात्कार जैसे मामलों पर सियासी मैदान में है. जिसमें बिजली का बिल से लेकर पेट्रोल डीजल, सीएनजी, आलू टमाटर, तेल और मोबाइल कंपनियों के रिचार्ज के बढ़ते दाम सियासी तीर है.  यह वह मुद्दे हैं जिनके सामना हर व्यक्ति कर रहा है.  ऐसे में समाजवादी पार्टी अपनी सियासत को मजबूत कर रही है जिसमें उसने कुछ पार्टियों के साथ गठबंधन किया है और कुछ के साथ आने वाले समय में होगा और दूसरी तरफ कांग्रेस बाहर से लड़ रही है. वही बहुजन समाज पार्टी शांत है जो कभी-कभी समुद्र की लहरों की तरह से अपना रूप दिखा देती है उसके बाद फिर शांत हो जा...

समाजवादी पार्टी और सरदार वल्लभ भाई पटेल

समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की समूची इकाइयों को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती मनाने का निर्देश दिया सभी कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम आयोजित किए गाजियाबाद की समाजवादी पार्टी की इकाई ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को लेकर एक कार्यक्रम रखा कार्यक्रम में कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी एवं अभी हाल ही में पार्टी में शामिल हुए पूर्व विधायक अमरपाल शर्मा भी पहुंचे.  पंडित अमरपाल शर्मा ने चुनावों को ध्यान में रखते हुए सिर्फ और सिर्फ समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों की चर्चा करने का आह्वान किया उन्होंने कहा कि आप सभी लोग कांग्रेस वाली गलती ना करें कांग्रेस हमेशा बीजेपी पर टारगेट करती है लेकिन अपने कार्य और उपलब्धियों पर टारगेट नहीं करती है जिसकी वजह से उसे नुकसान उठाना पड़ा था इसलिए मैं तो सिर्फ यही कहता हूं कि आप लोगों के बीच में जाएं और पार्टी के द्वारा कराए गए विकास कार्यों की चर्चा करें उन्हें बताएं कि समाजवादी पार्टी ने अपने कार्यकाल में क्या किया और उनसे पूछो मौजूदा पार्टी की सरकार ने क्या किया है.  पंडित अमरपाल शर्मा ने सरदार वल्लभभाई पटेल को एक दृढ़ निश्चय वाला महा पुरु...

अरविंद कुमार शर्मा की अग्नि परीक्षा ब्राह्मणों को एकजुट करना

ब्राह्मणों को एकजुट करना अरविंद कुमार शर्मा की अग्नि परीक्षा उत्तर प्रदेश में चुनाव चुनावी शंख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ ही बज चुका है.  ऐसे में चुनावी समीकरण और गठजोड़ का खेल शुरू भी शुरू हो चुका है इस बार की राजनीति मैं ब्राह्मण और ओबीसी वोट बैंक केंद्र में है.  उत्तर प्रदेश के प्रमुख दल भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी इन दोनों वोट बैंक को अपनी तरफ लुभाने में लग चुके हैं.  मायावती ने ब्राह्मणों को लुभाने के लिए अपनी चाल चल दी है उन्होंने 23 जुलाई से पार्टी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में प्रबुद्ध वर्ग संगोष्ठी ब्राह्मण सम्मेलन शुरू करवा दिया है पहला सम्मेलन अयोध्या में श्री राम लला के दर्शन के साथ शुरू हुआ.  इसके बाद से विरोधी पार्टियों की नींद उड़ गई है कल तक बसपा को नंबर 4 की पार्टी समझा जा रहा था और वह किसी भी गिनती में नहीं थी आज वही पार्टी प्रतिद्वंदी के रूप में सामने खड़ी है.  भारतीय जनता पार्टी ने ब्राह्मणों को साधने के लिए अपने सबसे कंट्रोवर्सी विवादास्पद व्यक्...

चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांति चाहिए

साथियों  कोरोना महामारी ने अपने चिकित्सा तंत्र और उसको लेकर सिस्टम की गंभीरता को पूरी दुनिया के सामने खोल कर रख दिया है हम सभी जानते हैं कि हम चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सीमित संसाधनों के साथ जीवन जीने की कोशिश करते चले आ रहे हैं इसके ऊपर आजादी के बाद से लेकर अब तक उतना काम नहीं हुआ, जितना होना चाहिए था हां काम कुछ अलग ही विषयों पर हुआ है जैसे कि जात बिरादरी पर हुआ है,  तेरा धर्म-उसका धर्म हुआ है और अन्य फिजूल के सामाजिक संगठनों के गठन पर हुआ है,  जिनका उद्देश्य सिर्फ अपना राजनीतिक हित साधना रहा है.   जिसकी वजह से समाज के लिए जो होना चाहिए था वह पूरी तरह से नहीं हो पाया.  आज हम अपने समाज को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं.  मेरा मानना है अब यह एक ऐसा वक्त है जब हमें चिकित्सा के क्षेत्र में भी क्रांति की आवश्यकता है हमने जय जवान जय किसान भी देखा, हमने दूध की क्रांति भी देखी,  हमने अलग क्षेत्रों में कुछ क्रांतियां देखी है लेकिन अब हमें चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति की आवश्यकता है क्योंकि आने वाला समय वायरस जनित बीमारियों का है इसलिए क्रांति का अ...

गाजियाबाद में करणी सेना का आगाज और वंदना सिंह

. अजय शर्मा की कलम से  तांडव फिल्म वेब सीरीज पर करणी सेना ने पूरे देश में अपना विरोध प्रदर्शन किया। राष्टीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू ने फिल्म को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया कि संगठन हिन्दू धर्म और संस्कृति का अपमान सहन नहीं करेगा।  लेकिन सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात है कि करणी सेना ने उत्तर प्रदेश में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। काफी जिलों से खबरें आई हैं लेकिन गाजियाबाद में हुआ विरोध प्रदर्शन विमर्श का विषय है। गाजियाबाद में इसकी कमान जिला अध्यक्ष महिला शक्ति वंदना सिंह के हाथ में थी। जिला अध्यक्ष विवेक तोमर शहर से बाहर थे। ऐसे में वंदना सिंह ने संगठनात्मक कार्यकुशलता का जो परिचय दिया है वह काबिले तारिफ है।  मैं आपको यहां पर एक बार फिर से याद दिलाना चाहता हूं जब दिसंबर के महीने में करणी सेना की कार्यसमिति की बैठक यहां पर हुई थी। तब यह बात मैंने कही थी कि गाजियाबाद में करणी सेना की धमक आने वाले समय में सुनाई देगी। अब उसका आगाज हो चुका है। जिस तरह करणी सेना ने तांडव फिल्म को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है वह बताने के लिए काफी है कि सामाजिक परिवर्तन की एक नई बयार शुरू हो चु...

गाजियाबाद से करणी सेना की धमक कहां तक ​​सुनी गई

अजय शर्मा की कलम से  गाजियाबाद में करणी सेना की धमक से कुछ सवाल पैदा हो रहे हैं कि राष्टीय कार्यसमिति की बैठक के लिए गाजियाबाद में मैंने क्यों चुना। इसके राजनीतिक मायने क्या हैं। यहाँ करणी सेना कौन सी सी जमीन बना रही है। करणी सेना की इस धमक को कहां तक ​​महसूस किया जाएगा।   करणी सेना ने गाजियाबाद में अपनी कार्यसमिति की बैठक आयोजित की। जिसमें पूरे देश से उसके 22 प्रदेश अध्यक्ष और राष्टीय पदाधिकारी शामिल हुए। करणी सेना के संस्थापक और राष्टीय अध्यक्ष सूरजपाल अक्षित ने अपनी पूरी ताकत दिखाई। करणी सेना ने अपने सदस्यों की संख्या 25 लाख बताई। जो दिन रात हिन्दुत्व, सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा की लड़ाई लड़ रही है। सूरजपाल अब्दुल कहते हैं कि हम सिर्फ राजपूतों का संगठन नहीं हैं, बल्कि हिन्दुत्व की मशाल जलाए रखने वाले एक उर्जावन संगठन हैं। सूरजपाल अस्था के संबोधन में भीम आर्मी, मायावती, अखिलेश यादव, औवेसी, ओमप्रकाश राजभर और ममता बनर्जी टारगेट पर बने रहे। अलीगढ़ मुस्लिम यूनी संचार में प्रधानमंत्री का संबोधन और उसकी खत्म हो चुकी लीज भी करणी सेना के अध्यक्ष के संबोधन की भागीदारी रही ह...

कोरोना का कहर इन देशों पर सबसे ज्यादा

भारत ही नहीं बल्कि दुनिया में कोरोना अपना असर दिखा रहा है। जानें क्या है देशों का कोरोना से हाल ... पूरी दुनिया में कोरोना अपना विकराल रूप ले चुका है। इस वायरस से मरने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिका में तो 1 दिन के अंदर 1480 लोगों की मौत हो गई है जो अभी तक एक दिन के अंदर होने वाली सबसे ज्यादा मौते हैं। कोरोना से मौत का ये आंकड़ा गुरुवार शाम से लेकर शुक्रवार शाम (भारतीय समयानुसार) तक है। इससे पहले वहां अभी तक एक दिन में मरने वालों की संख्या 1169 थी। कोरोना से अब तक अमेरिका में 1,121,991 मामले सामने आए हैं तो वहीं 59,403 लोगों की मौत हो गई है।अमेरिका की सरकार लगातार इस कहर से लोगों को बचाने के लिए कदम उठा रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के नागरिकों को सलाह दी है कि वह बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करें। ।।। न्यूजीलैंड इसी तरह बात करें न्यूजीलैंड की तो वहां भी वायरस का कहर देखने को मिल रहा है। न्यूजीलैंड में इस वायरस से  संक्रमितों की संख्या 950 है वहीं 1 की मौत हुई है। बता दें, न्यूजीलैंड ने कोरोना के चलते इस महीने के आखिर में श्रीलंका दौर...

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए आभा की रिपोर्ट

 दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार 21 जनवरी को जो  वीडियो भेजे गए हैं उसकी समीक्षात्मक रिपोर्ट 1.  बादली रैली के लिए कुछ वीडियो भेजे गए हैं जिसमें किसी भी व्यक्ति की बाइट नहीं है.  सिर्फ  विजुअल हैं और उनका भी स्तर अच्छा नहीं है.  2.  इस रैली में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं मंडल स्तर से लेकर विधानसभा स्तर के कांग्रेसी पदाधिकारियों की वाइट ली जा सकती थी लेकिन नहीं ली गई.  3. इस रैली का नेतृत्व कौन-कौन लोग कर रहे थे उनकी बाइट ली जा सकती थी.  4.  जहां-जहां से रैली गुजरी वहां के दर्शक या फिर स्थानीय नागरिकों की बाइट क्यों नहीं ली गई.  5. रैली के दौरान दिल्ली पुलिस की क्या व्यवस्था थी.  6.  इस रैली की  स्क्रिप्ट क्यों नहीं भेजी गई और ना ही इनफॉर्मेटिव डिटेल भेजी गई है.  7.  रिपोर्टिंग टीम की तरफ से कोई भी ओपनिंग, क्लोजिंग और स्टोरी को लिंक करते हुए पीटीसी नहीं इस्तेमाल की गई हैं.  8.   इस रैली के ऊपर आप पार्टी और बीजेपी पार्टी का भी रिएक्शन ले लेना चाहिए था.  लेकिन ऐसा नहीं हुआ.  9. यदि आ...

विधानसभा चुनाव दिल्ली

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020  कवर करने के लिए कुछ बिंदुवार 1. तीनों मुख्य उम्मीदवारों का जीवन परिचय जिसमें सामाजिक राजनीतिक जीवन यात्रा शामिल हो(  भारतीय जनता पार्टी, आम आदमी पार्टी, कॉन्ग्रेस एवं निर्दलीय)  2. विधानसभा क्षेत्र से कुल उम्मीदवारों की संख्या 3. विधानसभा क्षेत्र के मुख्य चुनावी मुद्दे 4.  कुल मतदाताओं की संख्या (महिला एवं पुरुष का आंकड़ा अलग-अलग)  5.  कितने प्रतिशत मतदान या फिर वोटों पर उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित मानी जा सकती है इसका उल्लेख करें 6. विधानसभा क्षेत्र का जातीय समीकरण क्या है 7.  विधानसभा किस मुख्य वजह से चर्चा का केंद्र रहती है 8. विधानसभा क्षेत्र में कुल स्कूलों की संख्या सरकारी एवं गैर सरकारी 9. विधानसभा क्षेत्र में मोहल्ला क्लीनिक की संख्या 10. विधानसभा क्षेत्र में सरकारी अस्पतालों की संख्या 11.विधानसभा क्षेत्र में कौन सा थाना लगता है और कितनी पुलिस पिकेट है 12.  विधानसभा क्षेत्र के मुख्य बाजार 13.  विधानसभा क्षेत्र के सार्वजनिक सुविधाओं का ब्यौरा 14. विधानसभा क्षेत्र के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की क्या सुविधा है....

नए साल की शुभकामनाएं

 नए साल के अवसर पर आपको शुभकामना देते हुए शब्दों का चुनाव बहुत ही चुनौती वाला है.  क्योंकि कोशिश जब यह होती है आपको जीवन भर की खुशियां, प्यार, स्नेह, सफलता और  यह दुनिया आपके कदमों में झुके.  जब जीवन की आकांक्षा हो कि आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट रहे, आपके होठों पर हमेशा मुस्कुराहट खिलती रहे, आंखों में खुशियों की चमक हो.  जब आप  उसके कोमल दिल पर, उसके नव युवती जैसे अल्हड़पन पर, कभी घरेलू लड़की जैसी सादगी पर, रानी जैसे वैभवशाली व्यक्तित्व पर, उसकी दिलकश आवाज पर, उसकी ऐसी खूबसूरत आंखों पर जो अपने आप से रिश्ता कायम कर लेती है. जिस पर आप पहली मुलाकात में ही फिदा हो गए हो,  जिसका दुख, संघर्ष, तकलीफें, दर्द  आपको अंदर तक झकझोर देता हो, यह सब कुछ आपको अपना लगता हो और आप उसकी खुशी के लिए प्रार्थनाएं करते हो. उसकी चेहरे की मुस्कुराहट देखकर आपके चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती हो.   ऐसी शख्सियत को नववर्ष की शुभकामना देते हुए शब्दों का चुनाव चुनौतीपूर्ण हो जाता है.   ऐसे में बहुत ही सादगी से कहने का मन करता है यह नया साल आपके लिए सभी खुशियां...

दांपत्य जीवन की गोल्डन जुबली की बधाइयां

सुखी दांपत्य जीवन की गोल्डन जुबली  बुद्धिमान,  प्रतिभाशाली, धैर्यवान, विवेकशील,  कर्म योगी, बुद्धिजीवी,  साहित्य एवं कला प्रेमी,  दूरदर्शी,  अपने विषय के प्रकांड पंडित, समाज रत्न एवं युवाओं के मार्गदर्शक  आदरणीय श्री  विनोद अरोड़ा जी एवं जीवन के हर संघर्ष में उनकी जीवनसाथी,  अर्धांगिनी श्रीमती कांता देवी अरोड़ा  जी को उनके सुखी एवं खुशहाल दांपत्य जीवन की 50 वीं वर्षगांठ के शुभ अवसर पर हृदय की गहराइयों से बधाइयां. आपका जीवन समस्त खत्री समाज के लिए प्रेरणादायक है.  आप जैसे प्रेरणा स्रोत युगल दंपत्ति को बधाइयां देते हुए हम अपने आप को बहुत ही गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं.  खत्री समाज के साथ-साथ अन्य समाज के लिए भी आपने समाज सेवा में कीर्तिमान स्थापित किए हैं और लोगों को प्रेरणा दी है.  जिसकी वजह से आप समस्त सभ्य समाज के प्रिय व्यक्तित्व है. आपका कांतिवान विराट व्यक्तित्व समस्त समाज को अभिभूत करता है.  आज भी प्रतिदिन कुछ नया नई बात नया अनुभव सीखने की एक तीव्र भावना आपके हृदय में विद्यमान है आपकी जीवनशैली बेहतर जीवन के रास्त...

बलात्कार बढ़ने के मुख्य कारण

अपने देश में बलात्कार के बढ़ने की घटनाओं के कारणों को यदि समझने की कोशिश की जाए तो इसकी मूल में कुछ कारण स्पष्ट दिखाई देते हैं जिसने महिलाओं के प्रति होने वाले इस यौन अपराध को विकराल रूप दिया है और इसे सामाजिक कोढ़ के रूप में स्थापित करता चला जा रहा है.  इस यौन हिंसा ने समाज को एक बीमार समाज के रूप में दुनिया के सामने उजागर किया है और यह बताया है कि हम एक बीमार देश और बीमार समाज में रहते हैं जहां की सभ्यता सड़ चुकी है और उसमें से बहुत बुरी तरह से  बदबू आ रही है.   कारणों को समझने के क्रम में हमें यह समझना होगा की बलात्कार  महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा कहां होते हैं एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि बलात्कार जैसी अपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले महिलाओं के परिचित ही होते हैं चाहे पड़ोस पड़ोस के लोग हो या फिर परिवार के सदस्य हो.   जब से अपना देश आजाद हुआ है महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर आवाज बुलंद हुई है उन्हें समानता के अधिकार दिए जाने की आवाजें मुखर हुई है.   पिछले 15 से 20 साल में महिलाओं के लिए सामाजिक,  आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षिक, धार्मिक ...

बलात्कार के बढ़ने के कारण क्या है

 पिछले कुछ सालों में बलात्कार और यौन शोषण के मामलों में बहुत तेजी आई है जिसने समाज को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है और एक नई बहस को जन्म दिया है इसके कारण क्या है  हैदराबाद मैं पशु चिकित्सक दिशा के साथ हुआ बलात्कार और उसके बाद उसकी पेट्रोल डालकर जला कर हत्या. इस घटना ने पूरे देश को उबाल दिया आक्रोश से भर दिया और जनाक्रोश चारों तरफ फूटने लगा.   मीडिया के माध्यम से एक नई बहस शुरू हुई और लोगों ने अपनी अपनी राय स्पष्ट करना शुरू कर दिया लोग बलात्कार जैसी सामाजिक बीमारी से तुरंत छुटकारा चाहते हैं और सख्त कानून की डिमांड कर रहे हैं.  सरकार भी सख्त कानून की बात कर रही है लेकिन कानून सख्त होने के बावजूद भी बलात्कार जैसी घटनाएं नहीं रुक रही है. पिछले 10 साल के यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें बढ़ोतरी ही ही हुई है.  दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप के बाद से अब तक हैदराबाद दिशा गैंगरेप तक समाज में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने के लिए नहीं मिला है बल्कि यौन शोषण और बलात्कार की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है एनसीआरबी के आंकड़े यही बताते हैं कि बलात्कार के मामले  ...

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा सांसद किशन कपूर ने कहा समाज भ्रष्ट हो चुका है बीमार हो चुका है

हिमाचल प्रदेश से कांगड़ा सांसद श्री किशन कपूर  ने गुरुवार 5 दिसंबर 2019 मैं एक मुलाकात के दौरान अखिल भारतीय  खत्री युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उनके टीम से बातचीत में कहा कि अरविंद अरोड़ा खत्री समाज को एकजुट करें, खत्री समाज को एक मंच पर लेकर आएं और समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने की कोशिश करें.  समाज में स्वार्थ परता चरम पर पहुंच रही है घर के बुजुर्गों और महिलाओं का सम्मान नहीं हो पा रहा है.   समाज में फिर से संस्कारों को पोषित करने की आवश्यकता है और इसके लिए हमें युद्ध स्तर पर अभियान चलाने पड़ेंगे.  उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं अरविंद अरोड़ा इस कार्य में सफल होंगे और समाज को एक नई दिशा देने में कामयाबी हासिल करेंगे.   इस बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार अजय शर्मा जी ने कहा कि अरविंद अरोड़ा आपके विचारों और चिंतन को पुष्ट करते हुए ही कार्य कर रहे हैं और पूरे समाज को एकजुट करने में लगे हुए हैं मैंने पिछले एक दशक से देख रहा हूं किस तरह से यह अथक और कर्मठ व्यक्ति के रूप में कार्य कर रहे हैं.  सांसद किशन कपूर जी ने कहा म...

राम मंदिर का राजनीतिक इतिहास और विवाद

गौरतलब है कि अयोध्या विवाद में पहली बार हिंसा 1853 में हुई और कुछ सालों में ही मामला गहरा गया। 1885 में विवाद पहली बार जिला न्यायालय पहुंचा। निर्मोही अखाड़े के महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में मस्जिद परिसर में मंदिर बनवाने की अपील की पर कोर्ट ने मांग खारिज कर दी। इसके बाद सालों तक यह मामला चलता रहा है। 1934 फिर दंगे हुए और मस्जिद की दीवार और गुंबदों को नुकसान पहुंचा।