अपने देश में बलात्कार के बढ़ने की घटनाओं के कारणों को यदि समझने की कोशिश की जाए तो इसकी मूल में कुछ कारण स्पष्ट दिखाई देते हैं जिसने महिलाओं के प्रति होने वाले इस यौन अपराध को विकराल रूप दिया है और इसे सामाजिक कोढ़ के रूप में स्थापित करता चला जा रहा है. इस यौन हिंसा ने समाज को एक बीमार समाज के रूप में दुनिया के सामने उजागर किया है और यह बताया है कि हम एक बीमार देश और बीमार समाज में रहते हैं जहां की सभ्यता सड़ चुकी है और उसमें से बहुत बुरी तरह से बदबू आ रही है.
कारणों को समझने के क्रम में हमें यह समझना होगा की बलात्कार महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा कहां होते हैं एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि बलात्कार जैसी अपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले महिलाओं के परिचित ही होते हैं चाहे पड़ोस पड़ोस के लोग हो या फिर परिवार के सदस्य हो.
जब से अपना देश आजाद हुआ है महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर आवाज बुलंद हुई है उन्हें समानता के अधिकार दिए जाने की आवाजें मुखर हुई है.
पिछले 15 से 20 साल में महिलाओं के लिए सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षिक, धार्मिक सशक्तिकरण एवं समानता के अधिकारों को लेकर संवैधानिक कानूनी अधिकार लागू करने की कोशिश की गई या फिर उनमें बदलाव किए गए और उनको लागू किया गया. जिसने महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा देते हुए एक इंसान के रूप में स्थापित किया कि उसकी भी अपनी एक पहचान है और जिंदगी है वह किसी की गुलाम नहीं है और ना ही उपभोग की कोई वस्तु है.
अब आते हैं यौन अपराध की तरफ
नंबर 1 बदला लेने की नीयत से
नंबर दो महिलाओं के अधिकारों को खत्म करने की
नियत से नंबर 3 महिलाओं को सामाजिक रुप से विकृत करने की नियत से.
नंबर चार महिलाओं को गुलाम बनाने की नियत से.
नंबर 4 आधी आबादी द्वारा प्रेम संबंध और दोस्ती के संबंधों के नाम पर पुरुषों को इस्तेमाल करने की नियत ने भी पुरुष समाज में कड़वाहट घोलने और नफरत पैदा करने का काम किया है.
नंबर 5 महिलाओं द्वारा स्वच्छंद जीवन जीने की चाहत और उसके लिए संघर्ष ने आधी आबादी को पितृसत्तात्मक समाज के कटघरे में खड़ा कर दिया है.
नंबर 6 आधी आबादी के स्वच्छंद जीवन ने पुरुषों को यह समझने पर मजबूर किया है कि वह आसानी से किसी भी चीज के प्रलोभन के लिए शिकार की जा सकती हैं.
नंबर 7 बढ़ते शहरीकरण और काम धंधे की तलाश में गांव देहात से शहर की तरफ आने वाले बेरोजगार लोगों ने भी लव के साथ होने वाले यौन अपराधों को बढ़ाया है अपने परिवार से दूर रहने के कारण स्त्री सुख की चाहत में और फिल्मों में दिखाई जाने वाली जैसी स्त्रियों की चाहत में इन पुरुषों ने स्त्रियों को अपना शिकार बनाना शुरू किया है. इन पुरुषों को इस बात का भी डर नहीं होता है कि पकड़े जाने पर उनकी बदनामी होगी. क्योंकि यह लोग अपने घर गांव से बहुत दूर होते हैं.
नंबर 8 स्त्रियों की इमेज को खराब करने में सबसे बड़ी भूमिका बॉलीवुड और टेलीविजन इसके अलावा यूट्यूब पर चलने वाली वेब सीरीज में खराब की है उसमें अश्लील साहित्य और फिल्मों की भरमार है जिसमें स्त्रियों को सिर्फ सेक्स की उपभोग की वस्तु के रूप में दिखाया जाता है या फिर उन्हें सेक्स के लिए बहुत ही ज्यादा भूखी औरत के रूप में दिखाया जाता है. यह अश्लील फिल्में सोशल मीडिया पर और यूट्यूब पर आसानी से उपलब्ध है. फेसबुक पर अर्धनग्न स्त्रियां लाइव स्ट्रीमिंग में बैठी हुई है यह अपने आप में चिंता का विषय है. जिसके कारण ऐसी घटनाओं के बढ़ने में इजाफा हुआ है. क्योंकि इंटरनेट सस्ता हुआ है
पिछले कुछ सालों में मोबाइल फोन सस्ते हुए हैं और ग्रामीण क्षेत्रों मैं यह फिल्म में सबसे ज्यादा देखी जा रही है.
ऐसे सामाजिक अपराधियों को बढ़ावा देने का काम हमारे देश के कानून में बैठे हुए भ्रष्ट अधिकारियों ने दिया है उन्होंने पितृसत्तात्मक सोच को बढ़ावा दिया है उसको पाला और पोषा है. अपने देश में कानून व्यवस्था बहुत ही लचर है और भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी हुई है. पुलिस बेहतर नहीं है पुलिसिंग बहुत ही घटिया स्तर की है. पुलिस विभाग में कार्यरत कर्मचारी जो सिपाही और कॉन्स्टेबल जैसे पदों पर काम करते हैं उनका मानसिक स्तर बहुत ही दोयम दर्जे का है क्योंकि उनका शैक्षिक स्तर न्यूनतम स्तर पर है. बड़े अधिकारियों का भी मानसिक स्तर कोई खास अच्छा नहीं है.
न्यायपालिका में व्याप्त धीमा पन और सुस्त रफ्तार से चलते हुए कानून फैसले विकृत अपराधियों के हौसले को बुलंद करते हैं.
न्यायपालिका और पुलिसिंग में सुधार करने की सख्त आवश्यकता है और कानून को क्रियान्वित करने की प्राथमिकता है. जिससे कि लोगों में कानून का डर व्याप्त हो सके और समाज में कानून का राज हो ना की भ्रष्टाचार का राज हो.
महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए हमें सबसे पहले अपने एजुकेशन सिस्टम को बदलना होगा वहां पर मनुष्य निर्माण के लिए, चारित्रिक निर्माण के लिए शिक्षा बचपन से ही देनी होगी. जिससे कि जो हमारी संस्कृति भ्रष्ट हो चुकी है, बीमार हो चुकी है उसका इलाज हो सके क्योंकि अपने देश हिंदुस्तान ने दो संस्कृतियों को अपने ऊपर झेला है नंबर 1 मुगल आक्रमणकारी और मुगल बादशाह बादशाहो द्वारा मुस्लिम संस्कृति, दूसरा अंग्रेज और उनकी हुकूमत द्वारा यूरोपियन संस्कृति, जिसकी वजह से हिंदुस्तान की मूल संस्कृति बीमार हो गई इसलिए हिंदुस्तान की मूल संस्कृति के इलाज की आवश्यकता है. जब संस्कृति ठीक हो जाएगी तो महिलाओं को ठीक वैसी ही आजादी और सम्मान मिलेगा जो हमारे धार्मिक ग्रंथों में और शिलालेखों पर अंकित है.
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