पिछले कुछ सालों में बलात्कार और यौन शोषण के मामलों में बहुत तेजी आई है जिसने समाज को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है और एक नई बहस को जन्म दिया है इसके कारण क्या है
हैदराबाद मैं पशु चिकित्सक दिशा के साथ हुआ बलात्कार और उसके बाद उसकी पेट्रोल डालकर जला कर हत्या. इस घटना ने पूरे देश को उबाल दिया आक्रोश से भर दिया और जनाक्रोश चारों तरफ फूटने लगा.
मीडिया के माध्यम से एक नई बहस शुरू हुई और लोगों ने अपनी अपनी राय स्पष्ट करना शुरू कर दिया लोग बलात्कार जैसी सामाजिक बीमारी से तुरंत छुटकारा चाहते हैं और सख्त कानून की डिमांड कर रहे हैं.
सरकार भी सख्त कानून की बात कर रही है लेकिन कानून सख्त होने के बावजूद भी बलात्कार जैसी घटनाएं नहीं रुक रही है. पिछले 10 साल के यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें बढ़ोतरी ही ही हुई है.
दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप के बाद से अब तक हैदराबाद दिशा गैंगरेप तक समाज में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने के लिए नहीं मिला है बल्कि यौन शोषण और बलात्कार की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है एनसीआरबी के आंकड़े यही बताते हैं कि बलात्कार के मामले कम नहीं हुए हैं.
देखिए बलात्कार के मामलों को समझने के लिए या फिर यौन अपराध को समझने के लिए हमें इसकी जड़ में जाना होगा और वहां जाकर समझना होगा.
आइए हम बात करते हैं सबसे पहले अपनी संस्कृति को समझने की भारत एक ऐसा देश रहा है जहां पर बहुत सारी संस्कृति या मिलकर एक संस्कृति बनाती हैं क्योंकि हिंदुस्तान में सनातन धर्म की संस्कृति के अलावा मुगल कालीन संस्कृति और अंग्रेजों की संस्कृति हमारे आम जीवन की संस्कृति है. जब तक वैदिक या फिर सनातन धर्म की संस्कृति थी महिलाओं को काफी हद तक आजादी थी वह पूजा पाठ से लेकर शासन प्रशासन में सहयोग करती थी. यदि आप उनका पहनावा यानी कि वस्त्र एवं आभूषण पर गौर करें तो वह भी पारंपरिक होते हुए भी आधुनिक था यानी कि उसमें स्त्रियां स्वतंत्र नजर आती थी और उस वक्त के पुरुषों की मानसिकता के बारे में आसानी से समझा जा सकता है कि उस वक्त स्त्रियों को गुलाम बनाकर रखने की प्रथा नहीं थी स्त्री को सिर्फ और सिर्फ उपभोग की वस्तु समझने की संस्कृति नहीं थी. उसका सम्मान और अधिकार एक इंसान के रूप में था जो विभिन्न स्वरूपों में समाज के अंदर विद्यमान था चाहे वह मां हो पत्नी हो बहन हो शिक्षक हो.
लेकिन जब हिंदुस्तान पर दूसरे देशों से आने वाले आनेवाले मुगल आक्रांताओं ने लूटना और कत्लेआम शुरू किया तो स्थितियां एकदम तेजी से बदल गई. मुगलों ने इस देश पर आक्रमण किए यहां पर लूटपाट की तथा वापस चले गए लेकिन कुछ मुगल आक्रमणकारी यहां पर शासन करने के लिए अपने प्रतिनिधि के रूप में कुछ लोगों को हिंदुस्तान पर शासन करने के लिए छोड़ गए जिस बात का गवाह इतिहास है. मुगलों के आने से हिंदुस्तान की संस्कृति में बहुत तेजी से बदलाव हुए क्योंकि उन्होंने धर्म के आधार पर अपनी संस्कृति को इस देश में बढ़ाया और जबरन लोगों पर धर्म और संस्कृति को थोपा.
जिसका सबसे ज्यादा असर स्त्रियों पर पड़ा स्त्रियों को सुरक्षा की दृष्टि से पर्दे के भीतर रखने की प्रथा चली, घर की चारदीवारी में सुरक्षित रखने की प्रथा चली, स्त्रियों की समाज एवं शासन प्रशासन में भागीदारी सीमित होती चली गई.
चौकी मुगलों के लिए स्त्रियों की उपयोगिता सिर्फ उन्हे अपने लिए इस्तेमाल करने की रही है. यदि आप उनके धर्म और मौलवियों के वक्तव्य सुनें या फिर उनका साहित्य पढ़ें तो आपको समझ में आ जाएगा कि उनके समाज और संस्कृति में स्त्रियों की क्या स्थिति रही है. जिसने सीधे तौर पर हिंदुस्तान की सनातनी संस्कृति को भी अपने प्रभाव में लिया. क्योंकि आधे से ज्यादा हिंदुओं को मुस्लिम धर्म स्वीकार कराया गया उनका धर्म परिवर्तन हुआ. यानी उस वक्त का इंसान दोहरा जीवन जी रहा था. वह हिंदू मुस्लिम संस्कृति को जीने के लिए मजबूर हुआ.
यह वही दौर था जब मंदिरों की देखभाल करने वाले किन्नरों को मुगल बादशाह होने या फिर नवाबों ने अपनी स्त्रियों की देखभाल करने के लिए उनकी तीमारदारी में लगाया जिससे कि वह पुरुषों की छाया से दूर रहें. यहां से किन्नरों के शोषण की भी कहानी शुरू होती है यह वही किन्नर थे जिन्हें सनातन धर्म में मंदिरों की देखभाल और सात सज्जा का दायित्व मिला हुआ था. क्योंकि किन्नर कभी भी अशुद्ध नहीं होते हैं इसीलिए देवी देवता और मंदिरों की देखभाल का दायित्व न दिया गया था. हिंदुस्तान की संस्कृति में यह भी बहुत बड़ा बदलाव था.
इसके बाद आए अंग्रेज जिन्होंने हिंदुस्तान पर लगभग पौने 200 साल राज किया यह अपने साथ अपनी संस्कृति लेकर आए इस संस्कृति ने हिंदू और मुस्लिम संस्कृति को प्रभावित किया और यह अंग्रेजी संस्कृति भी हिंदुस्तान में रच बस गई.
यानी कि हिंदुस्तान का आदमी तीन संस्कृतियों को जी रहा था एक तो वह जो उसकी मालिक संस्कृति थी और बाकी दो वह बाहर से आने वाले आक्रमणकारियों ने या फिर यहां कर शासन करने वाले देशों ने हिंदुस्तान पर थोप दिया.
बात करते हैं हिंदुस्तान की आजादी के वक्त की जब हिंदुस्तान आजाद हुआ तो दो देशों में बट गया हिंदुस्तान और पाकिस्तान.
यानी कि इस देश का बंटवारा दो धार्मिक संस्कृतियों के आधार पर हुआ मुसलमानों ने अपने लिए अलग देश की मांग की और अंग्रेज यहां से जा रहे थे.
देश तो आजाद हो गया लेकिन यहां पर रहने वाला आदमी उन्हीं संस्कृति में जकड़ आ रहा जिसे वह इतनी सदियों से जी रहा था. लेकिन आजादी के बाद विकास के क्रम में स्त्रियों को वापस सामाजिक आर्थिक रूप से सशक्त बनाने हेतु अभियान चलने शुरू हुए उन्हें फिर से इंसान के बतौर जिंदगी जीने के लिए प्रेरित किया जाने लगा, अब तक की जितनी सरकार है उन्होंने उनको अधिकार दिए उनके लिए कानून बनाए.
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