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उत्तर प्रदेश की राजनीति में हिंदुत्व का कार्ड वर्सेस समाजवादी विकास कार्ड

अजय शर्मा वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक

उत्तर प्रदेश की सियासत में मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि और शाही मस्जिद को लेकर केशव प्रसाद मौर्य के ट्वीट के ऊपर संभल के सांसद और सपा नेता रहमान के बयान ने सियासी तड़का लगा दिया है. 
सहारनपुर में भाजपा के वरिष्ठ नेता और गृहमंत्री अमित शाह मैं अपनी रैली में जो कहा है वह अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि सहारनपुर में शाकुंभरी देवी के नाम पर विश्वविद्यालय बनेगा। 

इससे उत्तर प्रदेश की सियासत में ध्रुवीकरण की संभावनाएं बहुत ज्यादा बढ़ गई है केशव प्रसाद मौर्य अपने बयान पर कायम है बीजेपी के प्रवक्ता हिंदुत्व और विकास की राजनीति की बात कर रहे हैं जिससे यह साफ हो गया है कि अब उत्तर प्रदेश की सियासत में कृष्ण जन्मभूमि ही चुनावी मुद्दा रहेगा. 

आपको मैं यहां पर बता दूं जब पीवी नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री थे उस वक्त की सरकार ने वरशिप एक्ट 1991 मैं पास किया था। साल 1991 में रामजन्मभूमि आंदोलन चरम पर था. उस दौरान अयोध्या के साथ ही तमाम मंदिर-मस्जिद विवाद उठने लगे थे. ऐसे में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने साल 1991 में एक कानून बनाकर इस विवाद को शांत करने की कोशिश की थी. यह कानून था पूजा स्थल कानून, 1991 (Places of Worship Act). इस कानून के तहत 15 अगस्त 1947 तक अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरी आस्था के पूजा स्थल के रूप में परिवर्तित नहीं किया जा सकता. अयोध्या विवाद को इस कानून से बाहर रखा गया था. यदि कोई व्यक्ति ऐसा करने की कोशिश करता है तो उसे एक से तीन साल तक की जेल और जुर्माना लगाया जा सकता है. 
यानी कि कृष्ण जन्मभूमि का मामला 1 लंबी लड़ाई के रूप में बीजेपी के पास है। 

वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी दल महंगाई, बेरोजगारी और कालाबाजारी नारी सुरक्षा को लेकर मैदान में डटे हुए हैं.
केशव प्रसाद मौर्य ने यह बयान देकर ओम प्रकाश राजभर, भीम आर्मी के अध्यक्ष रावण और अरविंद केजरीवाल के वोट बैंक को तितर-बितर करने की कोशिश की है उनकी वोट बैंक को भटकाने की कोशिश की है जिससे कि यह वोटर जाति के बजाय हिंदुओं के नाम पर बीजेपी के खेमे में आ जाए और बेरोजगारी महंगाई और बेसिक बुनियादी आवश्यकताओं के मुद्दे को भूल जाए. 

जिसको लेकर बीजेपी ने अपना हिंदुत्व के कार्ड खेला है बीजेपी को भरोसा है कि उसका एक कार्ड काम करेगा और चुनावी रण में समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी दलौ  को भरोसा है कि लोगों को रोजगार और सुविधाएं चाहिए जिनका वह उपयोग कर सकें. 

इस वक्त पेट्रोल, डीजल सीएनजी और सब्जियों के दाम आसमान पर है प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी लगभग 50% कम है जिसने जीवन जीने के लिए जीवन स्तर की कीमत को बढ़ा दिया है। 

इस महंगाई ने लोगों के शोषण को बढ़ावा दिया है। इसका सीधा असर महिलाओं की नौकरियों पर भी पड़ा है उनके शोषण की संभावनाएं बहुत ज्यादा बढ़ गई है। अपने परिवार की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए लोग कम पैसों पर काम करने के लिए मजबूर है। 

 शिक्षा स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं भी बहुत महंगी हो चुकी है ऐसे में उत्तर प्रदेश की जनता हिंदुत्व के कार्ड को स्वीकार करेगी या फिर समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी दलों के मुद्दों को जिसमें एक बेहतर जीवन देने की बात करते हैं। 
भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में एयरपोर्ट की बात कर रही है नए-नए एक्सप्रेस वे की बात कर रही है लेकिन वह इन पर लगने वाले टोल टैक्स की कीमत बसों और ट्रांसपोर्ट का भाड़ा की कीमत की बात नहीं कर रही है। आम आदमी की ट्रेन पैसेंजर उसका टिकट भी एक्सप्रेस का टिकट हो चुका है प्लेटफॉर्म टिकट भी महंगा हो चुका है दवाइयां भी महंगी हो चुकी है। 

अक्टूबर के महीने में उत्तर प्रदेश की महंगाई दर 4.48 के आसपास थी। 

संभल के सांसद का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी यह सब कुछ सिर्फ चुनावों के लिए कर रही है वह हिंदू मुसलमानों को आपस में  लङवाना चाहती है। वहीं इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने चुप्पी साध रखी है लेकिन मायावती ने मुखर होकर कहा है कि वह अपने लोगों को बीजेपी की चाल के बारे में समझाएंगी। 

लेकिन इस चुनाव से पहले कोरोनावायरस के ओमी क्रोम वैरीअंट की वाइल्ड कार्ड एंट्री हो चुकी है। 

अब आने वाला एक महीना तय करेगा कि उत्तर प्रदेश में क्या होने जा रहा है चुनाव या फिर कोरोनावायरस से लड़ने के लिए एक और लॉकडाउन की तैयारी। 

ऐसे में आम जनता के लिए विकास के मायने क्या है यह सन 2022 का चुनाव बताएगा उसे क्या चाहिए।

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