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बदहाल साहिबाबाद रेलवे स्टेशन


साहिबाबाद रेलवे स्टेशन दिल्ली के नजदीक होने के कारण काफी व्यस्त रहता है। यहां 98 पैंसेजर ट्रेन और 16 एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टॉपेज़ हैं। जिनसे लगभग 50 हजार यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। यही रेलवे स्टेशन अनियमिताओं का शिकार है। पूरे परिसर में गंदगी और आवारा पशुओं का जमावड़ा आम बात है। बंदरों के आतंक से भी यह स्टेशन अछूता नहीं है। टिकट खिड़की परिसर में लगी हुई दोनों एटीवीएम मशीनें महीनों से खराब पड़ी हुई हैं। इस परिसर में तीन टिकट खिड़की हैं और एक पूछताछ कार्यालय है। जिसमें से अक्सर दो बंद ही रहती हैं। जिसके चलते यात्रियों को होने वाली असुविधाओं के बारे में जब स्टेशन मास्टर नरेश मलिक से बात की गई तो उन्होंने स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए अपना दामन बचाने की कोशिश की।

साहिबाबाद रेलवे स्टेशन मास्टर नरेश मलिक ने बताया कि कर्मचारियों की कमी हैं। मैं उनसे कहां तक काम करवाउं। पेयजल की बाधित व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि यह इंजीनियरिंग विभाग का काम है। इसके बारे में आप इस विभाग से बात करें। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह विभाग आपके आदेश के अधीन नहीं हैं तो उन्होंने चुप्पी साध ली। रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ के जवान क्यों नहीं हैं- के बारे में कहा कि स्टाफ की कमी है। रेलवे स्टेशन पर ट्रेन यातायात से संबधित सूचनाओं की उदघोषणाओं की अनियमिता पर भी उन्होंने अपना बचाव कर लिया। फिर हमने पूछा कि स्टेशन के एग्जिट गेट पर टीटी बाहर जाने वाले यात्रियों की टिकट चेक करने के लिए नहीं होते हैं। तो उन्होंने कहा कि हमारे पास सिर्फ दो ही टीटी हैं। जब हमने पूछा कि एटीवीएम मशीनें खराब हैं?- इस पर स्टेशन मास्टर ने कहा कि आप डिवीजन से बात करें। रेलवे स्टेशन परिसर और प्लेटफार्म पर गंदगी के बारे में नरेश मलिक ने कहा कि हमारे पास सिर्फ तीन ही आदमी हैं।

आरपीएफ कार्यालय का हाल
इसके बाद हम पहुंचे आरपीएफ कार्यालय लेकिन वहां पर लॉक लगा हुआ था। फिर भी हमें वहां पर हेड कांस्टेबल बराबर के कमरे में कुछ काम करते हुए मिल गए। जब हमने पूछा कि 15 लोगों के स्टाफ में सिर्फ तीन ही कर्मचारी तैनात क्यों हैं। तो उन्होंने भी नरेश मलिक की तरह ही सपाट जवाब दिया कि स्टाफ की कमी है।

पूछताछ कार्यालय का हाल 
अब हम पहुंचे स्टेशन के बाहर पूछताछ कार्यालय पर जहां पर रेलवे कर्मचारी वी के शर्मा बैठे हुए दिखई दिए जो फोन पर व्यस्त थे। हम भी वहीं पर खड़े हो गए। शर्मा जी लगभग फोन पर 15 मिनट तक व्यस्त रहे और यात्री वहीं परेशान और आक्रोशित खड़े रहे। कुछ यात्री शर्मा जी पर चीखते रहे साहब ट्रेन के आरे तें बता दीजिए लेकिन मजाल है जूं की जो कान पर रेंग जाए। यात्री गुस्से बड़बड़ाते हुए चले गए लेकिन शर्मा जी अपनी प्यार भरी गप्पे लड़ाने में व्यस्त रहे। इसके बाद हम बढ़ चले टिकट रिजर्वेशन कार्यालय की तरफ।

टिकट रिजर्वेशन कार्यालय का हाल 

यहां की तस्वीर देखकर तो हम दंग रह गए। यहां पर चारों तरफ गंदगी ही गंदगी। यात्रियों के लिए सिर्फ दो सीट बेंच वो भी आड़ी तिरछी पड़ी हुई थी। जन सुविधा प्रसाधन पर ताला लगा हुआ था। पेयजल के रूम पर भी ताला। आरपीएफ का एक भी जवान वहां पर तैनात नहीं था। इन्हीं सब बातों की जानकारी लेने के लिए हमने रिजर्वेशन सुपरवाइजर से बात की। रिजर्वेशन सुपरवाइजर अरुण अग्रवाल ने बताया कि यहां पर स्टाफ की कमी है। इस परिसर में बाहरी लोगों का आवाजाही ज्यादा है क्योंकि इसके बाहर स्लम एरिया है। जिसके चलते ऐसे हालत हैं। ये लोग यहां पर पानी भरने और टॉयलेट रुम का इस्तेमाल करने आते हैं। जिसकी वजह से गंदगी फैली रहती है। जिस वजह से हमने विकलांग वॉश रुम को  स्टोर रुम में तब्दील कर दिया है।

जब हमने बाहर के छोटे दुकानदार और स्लम एरिया के लोगों से इस बारे में जानकारी लेनी चाही तो इन लोगों ने बताया कि बाबू साहेब यह व्यक्ति हम लोगों से इन सुविधाओं के बदले रुपयों की मांग करता है। शाम को हम से शराब के पैसे मांगता है। जब यह सुविधाएं सरकार ने पब्लिक के लिए दी हैं तो हम क्यों ना इस उपयोग करें।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए क्या अपनी जिम्मेदारी से बचा जा सकता है। आरपीएफ के जवान यहां पर तैनात क्यों नहीं हैं।

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