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गाजियाबाद से करणी सेना की धमक कहां तक ​​सुनी गई

अजय शर्मा की कलम से 


गाजियाबाद में करणी सेना की धमक से कुछ सवाल पैदा हो रहे हैं कि राष्टीय कार्यसमिति की बैठक के लिए गाजियाबाद में मैंने क्यों चुना। इसके राजनीतिक मायने क्या हैं। यहाँ करणी सेना कौन सी सी जमीन बना रही है। करणी सेना की इस धमक को कहां तक ​​महसूस किया जाएगा।  


करणी सेना ने गाजियाबाद में अपनी कार्यसमिति की बैठक आयोजित की। जिसमें पूरे देश से उसके 22 प्रदेश अध्यक्ष और राष्टीय पदाधिकारी शामिल हुए। करणी सेना के संस्थापक और राष्टीय अध्यक्ष सूरजपाल अक्षित ने अपनी पूरी ताकत दिखाई। करणी सेना ने अपने सदस्यों की संख्या 25 लाख बताई। जो दिन रात हिन्दुत्व, सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा की लड़ाई लड़ रही है। सूरजपाल अब्दुल कहते हैं कि हम सिर्फ राजपूतों का संगठन नहीं हैं, बल्कि हिन्दुत्व की मशाल जलाए रखने वाले एक उर्जावन संगठन हैं। सूरजपाल अस्था के संबोधन में भीम आर्मी, मायावती, अखिलेश यादव, औवेसी, ओमप्रकाश राजभर और ममता बनर्जी टारगेट पर बने रहे। अलीगढ़ मुस्लिम यूनी संचार में प्रधानमंत्री का संबोधन और उसकी खत्म हो चुकी लीज भी करणी सेना के अध्यक्ष के संबोधन की भागीदारी रही है। उन्होंने गाजियाबाद के नाम पर चुटकी लेते हुए कहा कि इसका कोई और नाम नहीं रखा जाना चाहिए। श्यामनगर, रामनगर, शिव नगर आदि कुछ भी रख दिया जाना चाहिए। बॉलीवुड में अश्लीलता को आड़े हाथों लिया। महिला शक्ति की राष्टीय अध्यक्ष कीर्ती राठौर ने इस संगठन को महिलाओं के मान सम्मान की रक्षा और रानी लक्ष्मीबाई को एक प्रेरणास्रोत बताया। कीर्ति राठौर कहती हैं कि हम एक सामाजिक संगठन हैं। हमारी राजनीति से कोई सरोकार नहीं हैं। लेकिन पथभ्रष्ट और जातिगत राजनीति का हम विरोध करते हैं। जिला गाजियाबाद महिला शक्ति अध्यक्ष वंदना सिंह मानती हैं कि सनातन संस्कृति की रक्षा रामपरि है। महिलाएं लव जेहादियों के निशाने पर हैं। इसलिए हम सभी की जिम्मेदारी बढ़ गई है। महिला शक्ति अध्यक्ष वंदना सिंह मानती हैं कि सनातन संस्कृति की रक्षा रामपरि है। महिलाएं लव जेहादियों के निशाने पर हैं। इसलिए हम सभी की जिम्मेदारी बढ़ गई है। महिला शक्ति अध्यक्ष वंदना सिंह मानती हैं कि सनातन संस्कृति की रक्षा रामपरि है। महिलाएं लव जेहादियों के निशाने पर हैं। इसलिए हम सभी की जिम्मेदारी बढ़ गई है। 


कार्यसमिति की बैठक में लव जेहाद कानून को समाज के विकास के लिए उचित बताने वाले सूरजपाल अब्द ने किसान एक्ट को किसानों के हित में बताया और उसका समर्थन किया। करणी सेना आने वाले समय में मथुरा और बनारस में धर्म और संस्कृति को केन्द्र में रखकर कुछ देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। 


यह कार्यसमिति की बैठक सामाजिक और राजनीतिक रूप से उत्तर प्रदेश में एक गहरा असर जरूर छोड़ेगी। करणी सेना की वजह से आने वाले कुछ महीने यूपी के लिए महत्वपूर्ण होंगे। 

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