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अखिलेश यादव ने बदल दी है उत्तर प्रदेश की सियासत


अखिलेश यादव ने बदल दिया है सियासी माहौल

अजय शर्मा वरिष्ठ टीवी पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक

उत्तर प्रदेश में सियासत अब घोड़े की चाल यानी कि  कदम चलने लगी है. पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं सत्ताधारी पक्ष अपने आप को उसी पुराने तौर-तरीकों के साथ जनता के सामने रख रहा है जिसमें राष्ट्रवाद, जिन्ना, अब्बा जान, कोरोना से निपटने की कामयाबी, माफियाओं और अपराधियों पर बुलडोजर चलाना. 

वहीं विपक्ष रोटी, कपडा और मकान, महंगाई, बेरोजगारी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और बलात्कार जैसे मामलों पर सियासी मैदान में है. जिसमें बिजली का बिल से लेकर पेट्रोल डीजल, सीएनजी, आलू टमाटर, तेल और मोबाइल कंपनियों के रिचार्ज के बढ़ते दाम सियासी तीर है. 

यह वह मुद्दे हैं जिनके सामना हर व्यक्ति कर रहा है. 

ऐसे में समाजवादी पार्टी अपनी सियासत को मजबूत कर रही है जिसमें उसने कुछ पार्टियों के साथ गठबंधन किया है और कुछ के साथ आने वाले समय में होगा और दूसरी तरफ कांग्रेस बाहर से लड़ रही है. वही बहुजन समाज पार्टी शांत है जो कभी-कभी समुद्र की लहरों की तरह से अपना रूप दिखा देती है उसके बाद फिर शांत हो जाती है. 

पूर्वांचल में अखिलेश यादव की रैलियों में उमड़ा जनसैलाब बदलाव का संकेत दे रहा है जिसका असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में देखा जा रहा है समाजवादी पार्टी के सभी कार्यकर्ता जोश से भरे हुए हैं. किसान नेता राकेश टिकैत की हुंकार और किसानों का समर्थन समाजवादी पार्टी को कितना सियासी फायदा पहुंचाएगा यह आने वाले जनवरी तक स्पष्ट हो जाएगा. 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की इस चुनाव में भूमिका पर पूर्व विधायक और समाजवादी नेता पंडित अमरपाल शर्मा का मानना है कि इस बार किसान मजदूर और आम आदमी भी अपने लोकतांत्रिक वोट देने के अधिकार को इस्तेमाल करते हुए भारतीय जनता पार्टी को समझा देगा कि कि वह उन सब बातों में आने वाला नहीं है सभी लोगों ने किसानों के दर्द को समझा है. उनकी तकलीफों को देखा है और किसान इस देश में वास्तविक हीरो के रूप में उभर कर सामने आए हैं. किसानों ने एक बार फिर उस नारे को सही साबित कर दिया जो कई दशकों पहले दिया गया था "जय जवान जय किसान"

 किसान और मजदूर इस देश की रीड की हड्डी है इन को नजरअंदाज करने का मतलब है आप बहुत कुछ खोने के लिए तैयार हो जाइए और यह सब कुछ दिखाई देगा सन 2022 के चुनाव में. 

पिछले 1 महीने से समाजवादी पार्टी हर मुद्दे को जनता के बीच लेकर जा रही है. सड़क पर उतरकर आंदोलन करने की रणनीति आम जनता को उत्साहित कर रही है. 
पार्टी ने महापुरुषों पर एकाधिकार, उनकी जयंती पर एकाधिकार को भी खत्म करने की रणनीति पर काम किया है.  समाजवादी पार्टी ने पूरी कोशिश की है कि वह ब्राह्मणों के बीच में अपनी पैठ बनाए जिसमें से कामयाबी मिलती दिखाई देती है. 

अखिलेश यादव ने इस बार रणनीति एक क्षेत्रीय पार्टी से ऊपर उठकर राष्ट्रीय पार्टी के रूप में बनाई है जो सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करती है और उनके सामाजिक मूल्यों की रक्षा का वादा करती है. 

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने आप को एक प्रजातंत्र वादी नेता के रूप में स्थापित कर लिया है यह अपने आप में एक सुखद संकेत है उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए और वहीं दूसरी तरफ प्रतिद्वंद्वियों के लिए चिंता का विषय है. अब अखिलेश यादव एक परिपक्व नेता के रूप में दिखाई देते हैं. 
वहीं दूसरी तरफ यदि कांग्रेस की बात करें तो वह अपनी सियासी जमीन तलाशती  दिखाई दे रही है जिसके लिए उसने महिलाओं के सशक्तिकरण एवं सुरक्षा को लेकर मैदान में है।  यह चुनाव प्रियंका गांधी की सियासत को भी तय करेगा, जो लोग उनके अंदर स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को देखते हैं उनके लिए भी बहुत मायने रखता है. यदि इस चुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत नहीं बढ़ा विधानसभा सीटें जीत में तब्दील नहीं हुई तो कहीं उनकी आलोचना भी राहुल गांधी की तरह ना हो. 

ऐसे में यह चुनाव बहुत सारे लोगों के लिए उम्मीदों से भरा है तो कुछ लोगों के लिए अग्नि परीक्षा है। 

यह चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है यदि इस चुनाव में उनको नुकसान होता है सीटों के रूप में या फिर हार का सामना करना पड़ता है तो केंद्र की राजनीति पर फर्क पड़ेगा। 
यह चुनाव भारत की आने वाली 10 से 15 साल की राजनीति को तय करेगा। 

कोरोना महामारी ने लोगों की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक समझ को पूरी तरह से बदल दिया है।

 समाजवादी पार्टी से गाजियाबाद महानगर अध्यक्ष राहुल चौधरी इस चुनाव को विकास का चुनाव मानते हैं, बदलाव का चुनाव मानते हैं। कहते हैं लोगों को रोजगार चाहिए जिससे कि जीवन खुशहाल हो। 

लोगों के लिए बुनियादी आवश्यकता है सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है ना कि अब्बा जान या फिर अन्य तरह के जुमले। 

ऐसे में यह चुनाव अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है यह कोई साधारण चुनाव नहीं है बल्कि भारतीय राजनीति में बदलाव वाला चुनाव भी है जो भविष्य की दिशा और दशा दोनों को तय करेगा।

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