Skip to main content

बीजेपी प्रत्याशी संजीव शर्मा का कम मतदान का डर, बढ़ सकती है चुनौतियां?

बीजेपी प्रत्याशी संजीव शर्मा का कम मतदान का डर, बढ़ सकती है चुनौतियां? 

अजय शर्मा राजनीतिक विश्लेषक 

गाजियाबाद में सदर सीट पर उपचुनाव को लेकर प्रत्याशियों की मतदाताओं से मुलाकात शुरू हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी संजीव शर्मा हर वार्ड में प्रभावशाली लोगों से मिल रहे हैं लेकिन एक खबर ऐसी है जिसने पूरे शहर को चौंका दिया है और वह है कि संजीव शर्मा ने मतदान प्रतिशत में वृद्धि की अपील की है जिसका विश्लेषण करने पर यह समझ में आता है कि उन्हें कम मतदान का डर है और यदि ऐसा है तो उनके जीतने की राह काफी कठिन है। कम मतदान होने से उनके हर और जीत का अंतर बहुत ज्यादा काम हो सकता है जो दूसरे प्रत्याशी को फायदा पहुंचाने का काम कर सकता है और यदि मतदान को लेकर मतदाताओं में निरस्त रहेगी तो कोई भी बड़ा उलट फेर हो सकता है। 
वैसे भी कहां जाता है जनता के दिल में क्या है यह समझ पाना बहुत मुश्किल है लेकिन इतना जरूर है जो भी पार्टी अपने कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरकर मतदाताओं को बाहर निकाल लेगी वह जीत की तरफ बढ़ जाएगी ऐसे में सपा प्रत्याशी सिंह राज और बसपा के प्रत्याशी पीएम कर के कार्यकर्ता कितनी अच्छी चुनौती संजीव शर्मा को दे पाते हैं यह आने वाले दिनों में पता चल जाएगा। 
संजीव शर्मा गाजियाबाद के जटवाड़ा में जाट समाज के कार्यक्रम में मतदाताओं से मतदान वृद्धि के अपील कर रहे हैं ऐसा प्रेस रिलीज के माध्यम से कहा गया है। यह प्रेस रिलीज कार्यक्रम संचालक पंडित अशोक भारतीय ने जारी की है। 
फिलहाल जो भी है उपचुनाव को लेकर सभी प्रत्याशी अपनी पूरी ताकत झोंक देना चाहते हैं लेकिन कौन जीतेगा यह है कार्यकर्ता और मतदाताओं की इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है।

Comments

Popular posts from this blog

बदहाल साहिबाबाद रेलवे स्टेशन

साहिबाबाद रेलवे स्टेशन दिल्ली के नजदीक होने के कारण काफी व्यस्त रहता है। यहां 98 पैंसेजर ट्रेन और 16 एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टॉपेज़ हैं। जिनसे लगभग 50 हजार यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। यही रेलवे स्टेशन अनियमिताओं का शिकार है। पूरे परिसर में गंदगी और आवारा पशुओं का जमावड़ा आम बात है। बंदरों के आतंक से भी यह स्टेशन अछूता नहीं है। टिकट खिड़की परिसर में लगी हुई दोनों एटीवीएम मशीनें महीनों से खराब पड़ी हुई हैं। इस परिसर में तीन टिकट खिड़की हैं और एक पूछताछ कार्यालय है। जिसमें से अक्सर दो बंद ही रहती हैं। जिसके चलते यात्रियों को होने वाली असुविधाओं के बारे में जब स्टेशन मास्टर नरेश मलिक से बात की गई तो उन्होंने स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए अपना दामन बचाने की कोशिश की। साहिबाबाद रेलवे स्टेशन मास्टर नरेश मलिक ने बताया कि कर्मचारियों की कमी हैं। मैं उनसे कहां तक काम करवाउं। पेयजल की बाधित व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि यह इंजीनियरिंग विभाग का काम है। इसके बारे में आप इस विभाग से बात करें। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह विभाग आपके आदेश के अधीन नहीं हैं तो उन्होंने चुप्पी साध ली। रेलवे स्टेशन पर ...

रथयात्रा का महारथी सवालों के चक्रव्यूह में

बीजेपी के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर से 11 अक्टूबर को रथ यात्रा पर निकल रहे हैं। यह रथ यात्रा बीजेपी सिताब दियारा से जेपी की जयंती के मौके पर भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू करेगी। इस बार यह बहुत ही चर्चा का विषय है। बीजेपी में भी इस पर घमासान मचा हुआ है। लेकिन इस बार रथयात्रा के महारथी आडवाणी अन्ना हजारे और रामदेव की वजह से भ्रष्टाचार के खिलाफ जो माहौल बना है उसे भुना लेना चाहते हैं और बीजेपी की खोती साख की लाज बचाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। आडवाणी की रथयात्रा को पार्टी व्यापक बनाने में जुट गई है। कोर ग्रुप की बैठक में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, अनंत कुमार, बाल आप्टे समेत कई नेताओं ने योजना को तराशने की कोशिश की। पहले इस यात्रा को महात्मा गांधी के जन्मदिन 2 अक्टूबर पर निकाले जाने पर विचार हो रहा था। लेकिन 11 अक्टूबर पर ही सहमति बनी। 41 दिन तक चलने वाली आडवाणी की रथयात्रा 20 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली के साथ पूरी होगी। 21 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने की उम्मीद है। उससे ठीक पहले भाजपा केंद्र की संप्रग सरकार को कठघरे में खड़ा करने की ...

बलात्कार के बढ़ने के कारण क्या है

 पिछले कुछ सालों में बलात्कार और यौन शोषण के मामलों में बहुत तेजी आई है जिसने समाज को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है और एक नई बहस को जन्म दिया है इसके कारण क्या है  हैदराबाद मैं पशु चिकित्सक दिशा के साथ हुआ बलात्कार और उसके बाद उसकी पेट्रोल डालकर जला कर हत्या. इस घटना ने पूरे देश को उबाल दिया आक्रोश से भर दिया और जनाक्रोश चारों तरफ फूटने लगा.   मीडिया के माध्यम से एक नई बहस शुरू हुई और लोगों ने अपनी अपनी राय स्पष्ट करना शुरू कर दिया लोग बलात्कार जैसी सामाजिक बीमारी से तुरंत छुटकारा चाहते हैं और सख्त कानून की डिमांड कर रहे हैं.  सरकार भी सख्त कानून की बात कर रही है लेकिन कानून सख्त होने के बावजूद भी बलात्कार जैसी घटनाएं नहीं रुक रही है. पिछले 10 साल के यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें बढ़ोतरी ही ही हुई है.  दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप के बाद से अब तक हैदराबाद दिशा गैंगरेप तक समाज में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने के लिए नहीं मिला है बल्कि यौन शोषण और बलात्कार की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है एनसीआरबी के आंकड़े यही बताते हैं कि बलात्कार के मामले  ...