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Showing posts from May, 2015

बड़े बदलाव की ओर रियल एस्टेट इंडस्ट्री

उत्तर प्रदेश सरकार नई आवास नीति लाने जा रही है जिसमें ऐसे प्रावधान किए जा रहे हैं कि छोटे प्लोटों में भी बहुमंजिला इमारत बन सकें। इसके लिए डेवलपरों से भी सहमति ली गई है। साथ में टाउनशिप पर भी है फोकस है। उत्तर प्रदेश सरकार अर्फोडेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रही है। ताकि मध्यम आय वर्ग को आसानी से आवास की उपलब्धता हासिल हो सके। उत्तर प्रदेश सरकार नई आवास नीति का सारे मसौदे तैयार कर लिए हैं। इस आवास नीति की खास बात यह है कि इस नीति से बहुमंजिला आवासीय भवनों का निर्माण आसानी से हो सकेगा। सरकार द्वारा प्रस्तावित आवास नीति में साफ है कि अब छोटे भूखंड़ों पर अपार्टमेंट बनाना संभव हो सकेगा।

बायर्स के लौटने से आएगी बहार

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) आवासीय भवन के लकी ड्रॉ के परिणाम में जिन लोगों का नाम इसमें नहीं आया वे लोग एनसीआर के प्राइम लोकेशंस में नोएडा की ओर रुख कर सकते हैं। ऐसे में स्थानीय प्रॉपर्टी बाजार में तेजी आने की प्रबल संभावना हैं। लकी ड्रॉ के बाद डीडीए फ्लैट नहीं पा सके करीब पौने दस लाख लोगों की मायूसी स्थानीय प्रॉपर्टी बाजार की चमक बन सकती है। अफोर्डेबल और लग्जरी दोनों तरह के डिवेलपर्स के अलावा रीसेल सेगमेंट के जानकार कहते हैं कि डीडीए स्कीम के कारण लाखों खरीदार हाथ बांधकर बैठे थे और इससे दिल्ली-एनसीआर में खरीद-बिक्री लगभग ठप हो गई थी, लेकिन अब 9.75 असफल आवेदकों के बाजार में लौटने और फॉर्म खरीदकर भी अप्लाई नहीं करने वाले अन्य 7 लाख लोगों की ओर से भी बाईंग होने से अचानक सेंटिमेंट बदल सकता है। दिल्ली में लैंड पूलिंग पॉलिसी को मंजूरी मिलने के बाद एक्टिव हुई रीयल्टी कंपनियों के पहले निशाने पर यही लोग हैं। करीब 3 लाख अनसोल्ड फ्लैटों वाले एनसीआर रीजन के बड़े डिवेलपर्स में से एक ग्रुप के ऐग्जिक्युटिव ने अनुमान जताया कि मार्केट में तेजी आएगी और कीमतें भी बढ़ेंगी। जबकि डीडीए स्कीम में ...

मिडिल क्लास के लिए ‘समाजवादी आवास योजना’

उत्तर प्रदेश सरकार ने मार्च-अप्रैल 2015 मिडिल क्लास को ध्यान में रखते हुए घर का सपना पूरा करने के लिए ‘समाजवादी आवास योजना’ की शुरुआत की घोषणा की। इसके तहत वर्ष 2016 तक तीन लाख मकान बनाने का लक्ष्य है। यह समाजवादी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। आवास विभाग के प्रमुख सचिव सदाकान्त ने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में मध्यम आय वर्ग को लाभ पहुंचाने के लिये ‘समाजवादी आवास योजना’ शुरू करने का फैसला किया गया है। इसमें अपार्टमेंट की दरें निर्धारित की गयी हैं। भविष्य में यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में भी लागू की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह योजना कब शुरू की जाएगी। प्रमुख सचिव ने बताया कि इस योजना के तहत बनाये जाने वाले आवासों की लागत 15 से 30 लाख रुपये के बीच होगी। इन मकानों के निर्माण के लिये भू-उपयोग परिवर्तन के लिये कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। सदाकान्त ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने अपार्टमेंट की प्रति वर्गमीटर दरें तय करने का फैसला किया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बनने वाले अपार्टमेंट के लिए यह दर 3000 रुपये प्रति वर...

जानिए क्या हैं डेराबस्सी फ्लाईओवर के डिजाइन में बदलाव

चंडीगढ़-अंबाला हाईवे पर डेराबस्सी में बन रहे फ्लाईओवर के डिजाइन में बदलाव कर दिया गया है। अब फ्लाईओवर के निर्माण के लिए हाईवे से सटे घर नहीं गिराए जाएंगे। क्योंकि अब दोनों सर्विस लेन ओवरब्रिज के एक ही में साइड होंगी। यह जानकारी सीपीएस व हलका विधायक एनके शर्मा ने एक पत्रकार वार्ता के दौरान दी। एनके शर्मा ने कहा कि नेशनल हाईवे के अधिकारियों से हाईवे पर स्थित खेड़ा मंदिर व इसके साथ अन्य निर्माणों को न गिराने का आग्रह किया गया था। नए डिजाइन में क्या है बदलाव  पहले फ्लाईओवर के नीचे दोनों ओर सड़क बनाने की योजना थी, लेकिन अब बरवाला मोड़ के पास से जाने व आने वाली दोनों सड़कों को फ्लाईओवर के एक ही तरफ बनाया जाएगा। इसके बाद मुख्य मार्ग पर स्थित फायर ब्रिगेड के कार्यालय के पास से फिर से सड़क फ्लाईओवर के दोनों ओर बंट जाएगी। घरों के आगे साढ़े चार फुट रास्ता छोड़ा जाएगा हाईवे के साइड बनाई जा रही सर्विस लेन के कारण बरवाला मोड़ से आगे रहने वाले लोगों के घरों के आगे चार फुट से साढ़े चार फुट का रास्ता छोड़ा जाएगा। इसके बाद मुख्य मार्ग पर स्थित जनेतपुर कट में वाहनों के मुड़ने के लिए जगह क...

हाउसिंग प्रॉजेक्ट में विलंब , टैक्स छूट का नुकसान

राहुल ने कुछ साल पहले ग्रेनो में फ्लैट बुक कराया था, लेकिन अभी भी उन्हें इसका कब्जा नहीं मिला है। राहुल घर के लिए लगभग 80 पर्सेंट कीमत दे चुके हैं, लेकिन प्रॉजेक्ट अब भी तैयार नहीं है। वह खुद को सिर्फ इसी बात से तसल्ली दे लेते हैं कि इस मुसीबत में वह अकेले नहीं हैं। रियल एस्टेट ऐनालिसिस के मुताबिक मुंबई महानगर के 3,753 प्रॉजेक्ट्स में से 45 प्रॉजेक्ट्स के लिए 2011 से 2014 के बीच कब्जा देने का वादा किया गया था, लेकिन ये अभी तक तैयार नहीं हैं। दिल्ली एनसीआर एरिया में तो मुश्किलें और भी बड़ी हैं। यहां 856 प्रॉजेक्ट्स में से करीब 78 पर्सेंट में देरी हुई है। बेंगलुरु, चेन्नै, हैदराबाद, पुणे और कोलकाता में भी यही ट्रेंड है। वहीं कैबिनेट मंत्रिमंडल ने रियल एस्टेट रेग्युलेटरी बिल को मंजूरी दे दी है। इसे जल्द ही संसद में पेश किया जाएगा। इसमें बायर्स के हितों की रक्षा के कुछ उपाय किए गए हैं। बिल में प्रस्ताव किया गया है कि बायर्स से मिलने वाली 50 पर्सेंट रकम को बिल्डर अलग एस्क्रो अकाउंट में रखेंगे। इससे एक प्रॉजेक्ट का पैसा डिवेलपर्स दूसरे में नहीं लगा पाएंगे और इससे प्रॉजेक्ट्स समय पर पूरे ...

नहीं मानी एनजीटी की गाइडलाइंस तो लगेगा जुर्माना

दिल्ली में एयर पल्यूशन को नियंत्रित करने के लिए नैशनल ग्रीन ट्राईब्यूनल (एनजीटी) ने अप्रैल 2015 में दिल्ली-एनसीआर में उन प्रॉजक्ट्स के कंस्ट्रक्शन रोकने को कहा जो पर्यावरण मंत्रालय के साल 2010 की गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रहे हैं। एनजीटी ने दिल्ली, यूपी और हरियाणा सरकारों को काम रोकने के निर्देश दिए साथ ही नियम तोड़ने वाले बिल्डरों पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाने को कहा। नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने कंस्ट्रक्शन से जुड़ी गतिविधियों के मामले में बिल्कुल  साफ कर दिया कि ट्राइब्यूनल के निर्देशों की अनदेखी करने वाले हर व्यक्ति को खामियाजा भुगतना होगा। ट्राइब्यूनल ने इस संबंध में प्लान सेक्शन करने वाली अथॉरिटीज से लेकर बिल्डरों तक के लिए तमाम निर्देश जारी किए हैं। एमओईफ की वर्ष 2010 की गाइडलाइंस का पालन आवश्यक रेजिडेंशल, कमर्शियल या छोटे प्लॉट पर कंस्ट्रक्शन की इजाजत मांग रहे बिल्डरों को कोई भी अथॉरिटी तब तक मंजूरी नहीं देगी, जब तक वे एमओईफ की वर्ष 2010 की गाइडलाइंस का पालन नहीं करते। गाइडलाइंस में कंस्ट्रक्शन के दौरान बिल्डरों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियां बताई गई हैं। ...

रियल एस्टेट रेग्युलेटरी बिल का विरोध हुआ तेज

रियल एस्टेट रेग्युलेटरी बिल के केबिनेट से हरी झंडी मिलते ही इसका विरोध भी शुरू हो गया है। क्योंकि पहले से चल रही रियल एस्टेट परियोजनाओं को बिल्डर इस के तहत लाए के खिलाफ हैं। पिछली तिथि से संशोधन के चलते इसके पहले भी कंपनियों के टैक्स को लेकर कई विवाद हो चुके हैं। हालांकि, इन सबके बावजूद बिल्डर अपनी रूकी परियोजनाओं में तेजी लाना चाहते हैं, जिससे रेग्युलेटरी के नियमों से वे बच सकें। क्योंकि इसमें बिल्डरों को फाइनैंशल दिक्कतें आ सकती हैं। रियल एस्टेट की मौजूदा चालू परियोजनाओं को प्रस्तावित रियल इस्टेट कानून के दायरे में लाए जाने के साथ डिवेलपर किसी भी नियामकीय कार्रवाई से बचने के लिए मौजूदा आवासीय परियोजनाओं के निर्माण में तेजी लाने की कोशिश में जुट गए हैं। आपको बता दें कि रियल एस्टेट बाजार में परियोजनाओं के पूरा होने में कई सालों की देरी चल रही है या फिर वे लंबित पड़ी हैं। जिससे खरीदारों के लाभ पर असर पड़ा है। केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले सप्ताह रियल इस्टेट विधेयक में संशोधन को मंजूरी दी, जिससे सभी चालू परियोजनाएं इसके दायरे में आ जाएंगी और नया कानून लागू होने के बाद इन्हें प्रस्तावित न...