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नहीं मानी एनजीटी की गाइडलाइंस तो लगेगा जुर्माना


दिल्ली में एयर पल्यूशन को नियंत्रित करने के लिए नैशनल ग्रीन ट्राईब्यूनल (एनजीटी) ने अप्रैल 2015 में दिल्ली-एनसीआर में उन प्रॉजक्ट्स के कंस्ट्रक्शन रोकने को कहा जो पर्यावरण मंत्रालय के साल 2010 की गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रहे हैं। एनजीटी ने दिल्ली, यूपी और हरियाणा सरकारों को काम रोकने के निर्देश दिए साथ ही नियम तोड़ने वाले बिल्डरों पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाने को कहा।

नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने कंस्ट्रक्शन से जुड़ी गतिविधियों के मामले में बिल्कुल  साफ कर दिया कि ट्राइब्यूनल के निर्देशों की अनदेखी करने वाले हर व्यक्ति को खामियाजा भुगतना होगा। ट्राइब्यूनल ने इस संबंध में प्लान सेक्शन करने वाली अथॉरिटीज से लेकर बिल्डरों तक के लिए तमाम निर्देश जारी किए हैं।

एमओईफ की वर्ष 2010 की गाइडलाइंस का पालन आवश्यक
रेजिडेंशल, कमर्शियल या छोटे प्लॉट पर कंस्ट्रक्शन की इजाजत मांग रहे बिल्डरों को कोई भी अथॉरिटी तब तक मंजूरी नहीं देगी, जब तक वे एमओईफ की वर्ष 2010 की गाइडलाइंस का पालन नहीं करते। गाइडलाइंस में कंस्ट्रक्शन के दौरान बिल्डरों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियां बताई गई हैं। जिसके लिए अथॉरिटीज सभी बिल्डरों को नोटिस जारी कर एमओईफ की गाइडलाइंस और ट्राइब्यूनल के निर्देशों के बारे में बताएंगी।
क्या हैं निर्देंश 
कंस्ट्रक्शन वाले एरिया को टारपोलिन से कवर करें 

हर बिल्डर को कंस्ट्रक्शन वाले पूरे एरिया को टारपोलिन से कवर करना होगा। बिल्डर और मालिक समेत किसी को भी किसी कॉलोनी की सड़क या गली में कंस्ट्रक्शन मटीरियल, खासतौर पर रेत, स्टोर करने की परमिशन नहीं होगी। साइट पर मौजूद कंस्ट्रक्शन मटीरियल को पूरी तरह ढक कर रखा जाएगा, ताकि वह हवा के साथ उड़े या बिखरे नहीं।


कंस्ट्रक्शन मटीरियल या मलबे का ट्रांसपॉर्टेशन 
यह हर हाल में ध्यान रखना है कि कंस्ट्रक्शन मटीरियल या मलबे के ट्रांसपॉर्टेशन के दौरान उन्हें कवर कर के ही ले जाया जाए। कंस्ट्रक्शन मटीरियल या मलबे को ढोने वाली गाडियों से सामान उतारने के बाद साफ करके ही सड़कों पर चलने दिया जाए।

वर्करों का मास्क पहनना जरूरी
कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने वाले या कंस्ट्रक्शन मटीरियल ढोने वाले ट्रकों पर काम करने वाले सभी वर्करों को मास्क पहनना अनिवार्य है ताकि धूल के कण उनकी सांस के साथ अंदर न जाएं। साइट पर काम करने वाले सभी वर्करों को मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराना बिल्डर की जिम्मेदारी होगी।

कानून के दायरे में होगा खनन
पत्थरों की कटिंग और ग्राइंडिंग के लिए वेटजेट का इस्तेमाल करना अनिवार्य है। दिल्ली सरकार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा यह सुनिश्चित करे कि कानून के दायरे में ही माइनिंग हो।

पेड़ लगाकर हरियाली बढ़ाएं
एमसीडी, डीडीए, नोएडा, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और अन्य विभाग ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाकर ग्रीन कवर तैयार करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। जिससे परर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके। जो बिल्डर साल 2006 के ईआईए नोटिफिकेशन के तहत कमर्शियल या रेजिडेंशल बिल्डिंग बना रहे हैं, उन्हें भी बिल्डिंग के आसपास ग्रीन बेल्ट तैयार करनी होगी। यदि कोई भी इन निर्देशों की अनदेखी कर प्लान सेंक्शन करता है तो उसके लिए वह स्वयं द जिम्मेदार होगा और उसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए हर्जाना देना होगा।

दंड 
यदि कोई व्यक्ति, बिल्डर या भवन मालिक कंस्ट्रक्शन के दौरान साइट पर ट्राइब्यूनल के गाइडलाइंस की अनदेखी करता पाया गया तो उस पर 50,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा। कंस्ट्रक्शन मटीरियल के ट्रांसपॉर्टेशन के दौरान हर लापरवाही पर 5000 रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा।

नोएडा में करीब 50 प्रॉजेक्टों पर पड़ेगा असर 
ओखला बर्ड सैंक्चुरी के इको सेंसटिव जोन में कंप्लीशन पर लगी रोक से यहां की कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री पहले ही झटका खा चुकी है। अब एनजीटी के नए आदेश से रीयल एस्टेट इंडस्ट्री को तगड़ा झटका लगेगा। इससे अभी तक महज कागजों की खानापूर्ति कर इनवायरन्मेंटल क्लियरेंस (ईसी) लेने के बाद अपनी मनमर्जी से कंस्ट्रक्शन एक्टिविटीज के संचालन पर ना केवल रोक लगेगी, बल्कि ईसी की कंडिशन्स का भी अनुपालन जरूरी हो जाएगा। रीयल एस्टेट जानकारों के अनुसार शहर के करीब पांच दर्जन से ज्यादा ऐसे प्रॉजेक्टों पर इसका असर पड़ेगा, जहां पर फ्लैट्स का कंस्ट्रक्शन जारी है। इसके अलावा नए प्रॉजेक्टों पर भी आदेश का अनिवार्य अनुपालन करने से प्रॉजेक्ट कास्ट बढ़ने की संभावना बन गई है जिसका सीधा असर मकान खरीदने वालों पर पड़ेगा।

एनजीटी का बायर्स पर होगा गहरा असर 
नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल के फैसले से ग्रेनो और यमुना सिटी में बायर्स को पजेशन मिलने में और देरी होगी। हवा में धूल के कण उड़ाने का मामला पहले जहां ग्रेनो एक्शटेंनशन के दो किलोमीटर एरिया तक सीमित था, अब वह पूरे ग्रेनो समेत यमुना सिटी तक जा पहुंचा है। इस मामले में सुनवाई के दौरान ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की तरफ से दाखिल किए गए जवाब से एनजीटी संतुष्ट नहीं हुई। एनजीटी के ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी में सभी बिल्डरों के प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य 17 अप्रैल तक बंद रखने से अकेले ग्रेटर नोएडा में करीब ढाई सौ बिल्डरों के प्रॉजेक्ट्स पर असर पड़ा। वहीं लगभग यमुना सिटी में करीब 16 बिल्डरों के प्रॉजेक्ट्स पर असर पड़ा। इन प्रॉजेक्ट में लाखों बायर्स ने फ्लैट्स बुक करवाएं हैं।

रियल स्टेट कारोबार पर असर 
कंस्ट्रक्शन रोकने के एनजीटी के आदेश से रियल एस्टेट सेक्टर और सिटी में विकास कार्य कराने वाली सरकारी एजेंसीज के अफसरों में खलबली मच गई। इस आदेश से सिटी में चल रहे कई हजार करोड़ के विकास कार्य फंस गए। रियल एस्टेट सेक्टर इस झटके से डूबने के कगार पर पहुंच सकता है। गाजियाबाद में कई विकास कार्य चल रहे हैं। 145 करोड़ की लागत से नई लिंक रोड बनाई जा रही है, जिसकी लंबाई 3.7 किलोमीटर है। छह लेन रोड को बनाने का करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इस रोड के लिए 39 करोड़ रुपये की लागत से गाजियाबाद-दिल्ली रेलवे लाइन के ऊपर आरओबी बनाने का कार्य चल रहा है। इसका करीब 30 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। हिंडन नदी पर चैथा पुल बनाने का काम चल रहा है। यह 90 प्रतिशत से ज्यादा बन गया है। दो लेन के इस पुल को बनाने पर जीडीए करीब 32 करोड़ खर्च कर रहा है। इस पुल के बनाने का काम अगर नहीं रोका गया तो अगले महीने से इस पुल पर से ट्रैफिक चलने लगेगा।


मेट्रो को भी लग सकते हैं ब्रेक 
एनजीटी के तहत आने वाला सेंट्रल पल्यूशन कंट्रोल बोर्ड भी कुछ दिनों पहले साफ कर चुका है कि दिल्ली के बाद एनसीआर सिटीज में सबसे ज्यादा प्रदूषण गाजियाबाद और फरीदाबाद में है। ऐसे में माना जा रहा है कि नए आदेशों को लेकर सख्ती की गई तो शहर के कई प्रॉजेक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं। आपको बता दें कि शहर का ड्रीम फरीदाबाद मेट्रो प्रॉजेक्ट इस आदेश की चपेट में नहीं आएगा क्योंकि इसका सिविल वर्क पूरा हो चुका है और स्टेशनों की फिनिशिंग की जा रही है। वाईएमसीए से बल्लभगढ़ तक मेट्रो कंस्ट्रक्शन का काम शुरू होना है और यदि इसमें कहीं से भी मिनिस्ट्री ऑफ इन्वाइरनमेंट ऐंड फॉरेस्ट की संबंधित गाइडलाइंस और ट्राइब्यूनल के निर्देशों के पालन में कमी पाई गई तो फरीदाबाद मेट्रो प्रॉजेक्ट के विस्तार की रफ्तार पर ब्रेक लग सकते हैं।

डीजल व्हीकल पर तकरार 
10 साल से पुरानी डीजल गाडियों पर एनजीटी की रोक के बाद ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपॉर्ट कांग्रेस ने ऐलान किया है कि कोई भी कमर्शल गाड़ी अब दिल्ली में एंट्री नहीं करेगी। इसका असर रोजमर्रा की चीजों पर पड़ सकता है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि हम (एनजीटी के) फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन इसे लागू करते समय देश की आर्थिक स्थिति और अन्य पहलू देखना जरूरी है। एनजीटी ने एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवाओं को छूट देने की दिल्ली सरकार की मांग खारिज कर दी। हालांकि इन पर बैन के लिए 6 महीने की छूट दी।

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