Skip to main content

रियल एस्टेट रेग्युलेटरी बिल का विरोध हुआ तेज


रियल एस्टेट रेग्युलेटरी बिल के केबिनेट से हरी झंडी मिलते ही इसका विरोध भी शुरू हो गया है। क्योंकि पहले से चल रही रियल एस्टेट परियोजनाओं को बिल्डर इस के तहत लाए के खिलाफ हैं। पिछली तिथि से संशोधन के चलते इसके पहले भी कंपनियों के टैक्स को लेकर कई विवाद हो चुके हैं। हालांकि, इन सबके बावजूद बिल्डर अपनी रूकी परियोजनाओं में तेजी लाना चाहते हैं, जिससे रेग्युलेटरी के नियमों से वे बच सकें। क्योंकि इसमें बिल्डरों को फाइनैंशल दिक्कतें आ सकती हैं। रियल एस्टेट की मौजूदा चालू परियोजनाओं को प्रस्तावित रियल इस्टेट कानून के दायरे में लाए जाने के साथ डिवेलपर किसी भी नियामकीय कार्रवाई से बचने के लिए मौजूदा आवासीय परियोजनाओं के निर्माण में तेजी लाने की कोशिश में जुट गए हैं।

आपको बता दें कि रियल एस्टेट बाजार में परियोजनाओं के पूरा होने में कई सालों की देरी चल रही है या फिर वे लंबित पड़ी हैं। जिससे खरीदारों के लाभ पर असर पड़ा है। केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले सप्ताह रियल इस्टेट विधेयक में संशोधन को मंजूरी दी, जिससे सभी चालू परियोजनाएं इसके दायरे में आ जाएंगी और नया कानून लागू होने के बाद इन्हें प्रस्तावित नियामक के यहां पंजीकृत कराने की जरूरत होगी। गौरतलब है कि रियल एस्टेट डिवेलपरों के शीर्ष निकाय क्रेडाई ने चल रही परियोजनाओं को प्रस्तावित कानून के दायरे में लाए जाने का यह कहते हुए विरोध किया है कि ये प्रावधान बाद की तिथि से लागू होने चाहिए न कि पिछली तिथि से। क्रेडाई के अध्यक्ष गीतांबर आनंद ने कहा है कि यदि डिवेलपरों को विकल्प दिया जाता है तो वे चल रही परियोजनाओं में तेजी लाना चाहेंगे ताकि वे नियामकीय विभाग की पंजीकरण प्रक्रिया में न फंसे।

क्या है रियल एस्टेट रेग्युलेटरी बिल
केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले महीने ही रियल एस्टेट रेग्युलेटरी बिल को हरी झंडी दिखाई है। इसके तहत बिल्डरों को अपने प्रॉजेक्ट रेग्युलेटरी के पास रजिस्टर्ड कराने होंगे। साथ ही, सारी मंजूरी मिलने के बाद ही वे परियोजनाओं को शुरू कर सकेंगे। बिल्डरों के प्रॉजेक्ट में देरी के खिलाफ भी ग्राहकों के पास शिकायत करने का अधिकार होगा। इसमें बायर्स के हितों की रक्षा के कुछ उपाय किए गए हैं। बिल में प्रस्ताव किया गया है कि बायर्स से मिलने वाली 50 पर्सेंट रकम को बिल्डर अलग एस्क्रो अकाउंट में रखेंगे। इससे एक प्रॉजेक्ट का पैसा डिवेलपर्स दूसरे में नहीं लगा पाएंगे और इससे प्रॉजेक्ट्स समय पर पूरे होंगे। अगर बिल्डर समय पर डिलिवरी नहीं दे पाता है तो बायर्स ब्याज सहित बिल्डर से पूरे पैसे मांग सकता है। इस बिल को संसद से मंजूरी मिलते ही एक साल के अंदर राज्यों को लागू करना होगा। हालांकि, महाराष्ट्र में पहले से ही मंजूर कानून के तहत अगले दो महीनों में ही रेग्युलेटरी काम शुरू कर सकती है।

Comments

Popular posts from this blog

बदहाल साहिबाबाद रेलवे स्टेशन

साहिबाबाद रेलवे स्टेशन दिल्ली के नजदीक होने के कारण काफी व्यस्त रहता है। यहां 98 पैंसेजर ट्रेन और 16 एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टॉपेज़ हैं। जिनसे लगभग 50 हजार यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। यही रेलवे स्टेशन अनियमिताओं का शिकार है। पूरे परिसर में गंदगी और आवारा पशुओं का जमावड़ा आम बात है। बंदरों के आतंक से भी यह स्टेशन अछूता नहीं है। टिकट खिड़की परिसर में लगी हुई दोनों एटीवीएम मशीनें महीनों से खराब पड़ी हुई हैं। इस परिसर में तीन टिकट खिड़की हैं और एक पूछताछ कार्यालय है। जिसमें से अक्सर दो बंद ही रहती हैं। जिसके चलते यात्रियों को होने वाली असुविधाओं के बारे में जब स्टेशन मास्टर नरेश मलिक से बात की गई तो उन्होंने स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए अपना दामन बचाने की कोशिश की। साहिबाबाद रेलवे स्टेशन मास्टर नरेश मलिक ने बताया कि कर्मचारियों की कमी हैं। मैं उनसे कहां तक काम करवाउं। पेयजल की बाधित व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि यह इंजीनियरिंग विभाग का काम है। इसके बारे में आप इस विभाग से बात करें। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह विभाग आपके आदेश के अधीन नहीं हैं तो उन्होंने चुप्पी साध ली। रेलवे स्टेशन पर ...

बलात्कार के बढ़ने के कारण क्या है

 पिछले कुछ सालों में बलात्कार और यौन शोषण के मामलों में बहुत तेजी आई है जिसने समाज को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है और एक नई बहस को जन्म दिया है इसके कारण क्या है  हैदराबाद मैं पशु चिकित्सक दिशा के साथ हुआ बलात्कार और उसके बाद उसकी पेट्रोल डालकर जला कर हत्या. इस घटना ने पूरे देश को उबाल दिया आक्रोश से भर दिया और जनाक्रोश चारों तरफ फूटने लगा.   मीडिया के माध्यम से एक नई बहस शुरू हुई और लोगों ने अपनी अपनी राय स्पष्ट करना शुरू कर दिया लोग बलात्कार जैसी सामाजिक बीमारी से तुरंत छुटकारा चाहते हैं और सख्त कानून की डिमांड कर रहे हैं.  सरकार भी सख्त कानून की बात कर रही है लेकिन कानून सख्त होने के बावजूद भी बलात्कार जैसी घटनाएं नहीं रुक रही है. पिछले 10 साल के यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें बढ़ोतरी ही ही हुई है.  दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप के बाद से अब तक हैदराबाद दिशा गैंगरेप तक समाज में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने के लिए नहीं मिला है बल्कि यौन शोषण और बलात्कार की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है एनसीआरबी के आंकड़े यही बताते हैं कि बलात्कार के मामले  ...

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा सांसद किशन कपूर ने कहा समाज भ्रष्ट हो चुका है बीमार हो चुका है

हिमाचल प्रदेश से कांगड़ा सांसद श्री किशन कपूर  ने गुरुवार 5 दिसंबर 2019 मैं एक मुलाकात के दौरान अखिल भारतीय  खत्री युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उनके टीम से बातचीत में कहा कि अरविंद अरोड़ा खत्री समाज को एकजुट करें, खत्री समाज को एक मंच पर लेकर आएं और समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने की कोशिश करें.  समाज में स्वार्थ परता चरम पर पहुंच रही है घर के बुजुर्गों और महिलाओं का सम्मान नहीं हो पा रहा है.   समाज में फिर से संस्कारों को पोषित करने की आवश्यकता है और इसके लिए हमें युद्ध स्तर पर अभियान चलाने पड़ेंगे.  उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं अरविंद अरोड़ा इस कार्य में सफल होंगे और समाज को एक नई दिशा देने में कामयाबी हासिल करेंगे.   इस बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार अजय शर्मा जी ने कहा कि अरविंद अरोड़ा आपके विचारों और चिंतन को पुष्ट करते हुए ही कार्य कर रहे हैं और पूरे समाज को एकजुट करने में लगे हुए हैं मैंने पिछले एक दशक से देख रहा हूं किस तरह से यह अथक और कर्मठ व्यक्ति के रूप में कार्य कर रहे हैं.  सांसद किशन कपूर जी ने कहा म...