Skip to main content

बड़े बदलाव की ओर रियल एस्टेट इंडस्ट्री


उत्तर प्रदेश सरकार नई आवास नीति लाने जा रही है जिसमें ऐसे प्रावधान किए जा रहे हैं कि छोटे प्लोटों में भी बहुमंजिला इमारत बन सकें। इसके लिए डेवलपरों से भी सहमति ली गई है। साथ में टाउनशिप पर भी है फोकस है।

उत्तर प्रदेश सरकार अर्फोडेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रही है। ताकि मध्यम आय वर्ग को आसानी से आवास की उपलब्धता हासिल हो सके। उत्तर प्रदेश सरकार नई आवास नीति का सारे मसौदे तैयार कर लिए हैं। इस आवास नीति की खास बात यह है कि इस नीति से बहुमंजिला आवासीय भवनों का निर्माण आसानी से हो सकेगा। सरकार द्वारा प्रस्तावित आवास नीति में साफ है कि अब छोटे भूखंड़ों पर अपार्टमेंट बनाना संभव हो सकेगा।


अखिलेश सरकार जो आवास नीति लाने जा रही है। इससे अब आवासीय कॉलनियों में पहले की अपेक्षा कम चैड़ी सड़कों के पास बहुमंजिला इमारत अब बन सकेगी। साथ में यह प्रावधान किया जा रहा है कि भूतल के अतिरिक्त तीन मंजिला इमारत बनाने के लिए 24 मीटर चैड़ी सड़क के नियम को शिथिल कर दिया जाएगा।

नई आवास नीति लागू होने के बाद 18 मीटर चैड़ी सड़क पर ही बहुमंजिला इमारत बनाई जा सकेगी। इसके साथ ही भूखंड के क्षेत्रफल  के मानक को भी कम करने का प्रावधान है। सरकार इस बात पर भी गौर कर रही है कि अब न्यूनतम 200 वर्ग मीटर क्षेत्र वाले भूखंडों में बहुमंजिला इमारत बनाई जा सकेगी। सरकार ने आवास नीति को लेकर डेवलपरों से भी आम सहमति बनाई है ताकि इन्हें कोई दिक्कत न हो। नई आवास नीति से न केवल आवंटियों बल्कि डेवलपरों की भी कई  समस्याओं का समाधान किया गया है। डेवलपरों की एक बड़ी दिक्कत थी कि विकसित शहरी इलाकों में बड़े भूखंड़ों का न होना और आवंटियों की भी यही मूल शिकायत थी। इसके अतिरिक्त नगर नियोजन विभाग का कहना था कि विकसित शहरी इलाकों में छोटे भूखंड़ों पर फ्लैट बनने से उनकी लागत कम होगी जिसका फायदा निवेशकों को मिलेगा।


सरकारी आवासीय संस्थाएं जैसे विकास संस्थाएं व आवास विकास परिषद पहले से ही छोटे भूखंड़ों का दुर्बल आय वर्ग व अल्प आय वर्ग के लिए फ्लैट बना रहे हैं। निजी क्षेत्र का भी इसी तरह की सुविधा देने पर सस्ते आवास बन सकेंगे। गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में बनने वाली हाई टेक टाउनशिप को छोड़ पूर्व की आवासीय कॉलनियों में खाली भूखंड़ों की काफी कमी है। सरकार जिसकी पूर्ति करना चाहती है। वहीं, आज भी टाउनशिप की मांग लगातार बढ़ रही है।

दरअसल आज शहरों में आबादी का बोझ बढ़ता जा रहा है। इस बोझ से बचने के लिए जरूरत है, नई टाउनशिप्स बनने की। आज देश में 250 से ज्यादा टाउनशिप प्लानिंग और डेवलपमेंट के विभिन्न चरणों में चल रही हंै। एक अनुमान के मुताबिक साल 2001 के मुकाबले 2030 तक भारत की शहरी जनता में तीन करोड़ की बढ़ोत्तरी हो जाएगी। आज देश में 35 ऐसे शहर हैं जिनकी आबादी दस लाख से ज्यादा है। जनसंख्या के लिहाज से अभी कम से कम 70 शहरों की जरूरत होगी। केंद्र सरकार इसी को ध्यान में रखते रियल एस्टेट रेगुलेशन बिल लाने जा रही है ताकि डेवलपरों के साथ आवटिंयों को भी सहायता मिल सकें।

आज देश में इटिंग्रेटेड टाउनशिप की महत्ता बढ़ गई है। कहीं किसी न्यूक्लियस से जुड़ी टाउनशिप सफल हो रही है। तो कहीं किसी सेज, आईटी या आईटीइएस से जुड़े कॉम्प्लेक्सों के पास तैयार टाउनशिप हाथों-हाथ ली जा रही है। टाउनशिप की सफलता के लिए कनेक्टिविटी भी खास रोल अदा करती है। किसी इकनॉमिक हब से हाईवे या मेट्रों से कनेक्टिविटी वाली टाउनशिप पसंद की जाती है। सरकार टाउनशिप के लिए रियल एस्टेट रेगुलेशन बिल में नए प्रावधान ला रही है। ऐसे प्रोजेक्ट में काफी इंवेस्टमेंट होता है। डेवलपर इसी पैसे को कहीं और लगा देते हैं जिससे प्रोजेक्ट पूरा करने में समय लगता है अब ऐसा प्रावधान किया जा रहा है कि ऐसे कोई भी प्रोजेक्ट चाहे वह टाउनशिप हो या कोई और प्रोजेक्ट यहां के पैसे सत्तर फीसदी एक ही प्रोजेक्ट पर खर्च हो। आम तौर पर डेवलपर हाउसिंग प्रोजेक्ट को दो से तीन साल में पूरा कर लेता है लेकिन इंटीग्रेटेड टाउनशिप को तैयार करने में सात या आठ साल लग जाते हैं। जिसमें काफी रकम की भी जरूरत होती है। सरकार इसी बात को ध्यान में रखकर जहां यूपी सरकार आवास नीति में नए प्रावधान करने जा रही है वहीं केंद्र सरकार रियल एस्टेट रेगुलेशन बिल में खास प्रावधान करेगी। केंद्र सरकार ने राज्यों के अनुसार बिल में अलग से नियम बनाने की छूट दे रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसे प्रावधान किए हैं जिसके तहत गरीबों के लिए 12,000 मकान इसी साल बनाकर देने होंगे। बहरहाल, यह तय है कि उत्तर प्रदेश आवास नीति से जहां मध्यम व छोटे डेवलपरों के हितों का ध्यान रखा जा रहा है, वहीं बड़े टाउनशिप के लिए डेवलपरों का एक ही प्रोजेक्ट पर फोकस प्वाइंट बढ़ाया जा रहा है ताकि आवंटितों को नुकसान न हो।

गरीबों के लिए मुफ्त मकान
केंद्र सरकार ने राजीव गांधी आवास योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 21 जिलों का चुनाव किया है। यूपी के इन जिलों के लिए मंजूर योजना के तहत गरीबों के लिए मुफ्त मकान बनाए जाएंगें। इससे वेस्टर्न यूपी के कई जिलों में कम आय वर्ग में शामिल लोगों को फायदा होगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, फिरोजाबाद, सहारनपुर, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर और मथुरा जैसे प्रमुख शहरों में यह योजना लागू की जाएगी। इसके अलावा बुंदेलखंड के झांसी, इटावा-कन्नौज, शाहजहांपुर-बरेली से लेकर मुरादाबाद-रामपुर और सेंट्रल-ईस्ट यूपी के कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, लखनऊ, गोरखपुर और रायबरेली को राजीव गांधी आवास योजना से फायदा होगा। नेशनल अरबन इंफॉर्मेशन सिस्टम के तहत जीआईसी मैपिंग का काम तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

Comments

Popular posts from this blog

बदहाल साहिबाबाद रेलवे स्टेशन

साहिबाबाद रेलवे स्टेशन दिल्ली के नजदीक होने के कारण काफी व्यस्त रहता है। यहां 98 पैंसेजर ट्रेन और 16 एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टॉपेज़ हैं। जिनसे लगभग 50 हजार यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। यही रेलवे स्टेशन अनियमिताओं का शिकार है। पूरे परिसर में गंदगी और आवारा पशुओं का जमावड़ा आम बात है। बंदरों के आतंक से भी यह स्टेशन अछूता नहीं है। टिकट खिड़की परिसर में लगी हुई दोनों एटीवीएम मशीनें महीनों से खराब पड़ी हुई हैं। इस परिसर में तीन टिकट खिड़की हैं और एक पूछताछ कार्यालय है। जिसमें से अक्सर दो बंद ही रहती हैं। जिसके चलते यात्रियों को होने वाली असुविधाओं के बारे में जब स्टेशन मास्टर नरेश मलिक से बात की गई तो उन्होंने स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए अपना दामन बचाने की कोशिश की। साहिबाबाद रेलवे स्टेशन मास्टर नरेश मलिक ने बताया कि कर्मचारियों की कमी हैं। मैं उनसे कहां तक काम करवाउं। पेयजल की बाधित व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि यह इंजीनियरिंग विभाग का काम है। इसके बारे में आप इस विभाग से बात करें। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह विभाग आपके आदेश के अधीन नहीं हैं तो उन्होंने चुप्पी साध ली। रेलवे स्टेशन पर ...

उत्तर प्रदेश की राजनीति में हिंदुत्व का कार्ड वर्सेस समाजवादी विकास कार्ड

अजय शर्मा वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक उत्तर प्रदेश की सियासत में मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि और शाही मस्जिद को लेकर केशव प्रसाद मौर्य के ट्वीट के ऊपर संभल के सांसद और सपा नेता रहमान के बयान ने सियासी तड़का लगा दिया है.  सहारनपुर में भाजपा के वरिष्ठ नेता और गृहमंत्री अमित शाह मैं अपनी रैली में जो कहा है वह अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि सहारनपुर में शाकुंभरी देवी के नाम पर विश्वविद्यालय बनेगा।  इससे उत्तर प्रदेश की सियासत में ध्रुवीकरण की संभावनाएं बहुत ज्यादा बढ़ गई है केशव प्रसाद मौर्य अपने बयान पर कायम है बीजेपी के प्रवक्ता हिंदुत्व और विकास की राजनीति की बात कर रहे हैं जिससे यह साफ हो गया है कि अब उत्तर प्रदेश की सियासत में कृष्ण जन्मभूमि ही चुनावी मुद्दा रहेगा.  आपको मैं यहां पर बता दूं जब पीवी नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री थे उस वक्त की सरकार ने वरशिप एक्ट 1991 मैं पास किया था। साल 1991 में रामजन्मभूमि आंदोलन चरम पर था. उस दौरान अयोध्या के साथ ही तमाम मंदिर-मस्जिद विवाद उठने लगे थे. ऐसे में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की स...

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा सांसद किशन कपूर ने कहा समाज भ्रष्ट हो चुका है बीमार हो चुका है

हिमाचल प्रदेश से कांगड़ा सांसद श्री किशन कपूर  ने गुरुवार 5 दिसंबर 2019 मैं एक मुलाकात के दौरान अखिल भारतीय  खत्री युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उनके टीम से बातचीत में कहा कि अरविंद अरोड़ा खत्री समाज को एकजुट करें, खत्री समाज को एक मंच पर लेकर आएं और समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने की कोशिश करें.  समाज में स्वार्थ परता चरम पर पहुंच रही है घर के बुजुर्गों और महिलाओं का सम्मान नहीं हो पा रहा है.   समाज में फिर से संस्कारों को पोषित करने की आवश्यकता है और इसके लिए हमें युद्ध स्तर पर अभियान चलाने पड़ेंगे.  उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं अरविंद अरोड़ा इस कार्य में सफल होंगे और समाज को एक नई दिशा देने में कामयाबी हासिल करेंगे.   इस बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार अजय शर्मा जी ने कहा कि अरविंद अरोड़ा आपके विचारों और चिंतन को पुष्ट करते हुए ही कार्य कर रहे हैं और पूरे समाज को एकजुट करने में लगे हुए हैं मैंने पिछले एक दशक से देख रहा हूं किस तरह से यह अथक और कर्मठ व्यक्ति के रूप में कार्य कर रहे हैं.  सांसद किशन कपूर जी ने कहा म...