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बलात्कार और पुरुष मानसिकता

लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में देश का कोई भी शहर या गांव अछूता नहीं रह गया है। ये कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। चाहे घर के अंदर हो या बाहर । अगर हम बात करें देश के मेट्रो शहरों के बारे में तो वे सबसे ज्यादा यहीं असुरक्षित हैं। राजधानी दिल्ली की तो बात ही मत कीजिए जनाब। यौन उत्पीड़न और बलात्कार के मामले में इस शहर ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। सपनों का शहर दिल्ली आज सबसे अधिक डरावना है। हर लड़की के चेहरे पर डर और आतंक की झलक साफ देखी जा सकती है। लड़कियों के साथ बढ़ती इन घटनाओं ने सोचने पर मजबूर कर दिया है। आखिर क्या वजह है, पुरुष लड़कियों को देखते ही अपना व्यवहार बदल लेता है। पिछले दो दशकों में बलात्कार और यौन उत्पीड़न की घटनाओं में बेताहाशा बढोत्तरी हुई है। इस तरह के मामलों में क्या आम और क्या खास। लगभग हर तबके के लोगों का नाम सामने आया है। लड़कियों को देखते ही उसकी आंखों और व्यवहार में कामुकता आ जाना मामूली बात सी हो गई है। इस सब के पीछे है जो वजह नजर आती है वह है पुरुष का बीमार नजरिया। जहां तक लगता है आदमी महिलाओं का आर्थिकरुप से मजबूत और आजाद होना बर्दाश्त नहीं कर पा रह...

मार्डन वुमेन विद सिगरेट और ड्रिंक्स

कुछ सालों से समूचे विश्व को महिलाओं की बढ़ती शाक्ति ने प्रभावित किया है। महिलाएं तमाम नए-नए पेशों में अपनी उपस्थित दर्ज कर चुकी हैं और इससे उनमें आत्मविश्वास का भी काफी इजाफा हुआ। इस शाक्ति ने जहां उन्हें समाज में एक नया मुकाम दिलाया है वहीं इस वर्क प्रेशर के चलते उनमें सिगरेट और शराब की लत को भी बढ़ाया है। नशे की लत कभी तो वर्क प्रशेर को कम करने में सहायक हुई लेकिन ज्यादातर इस लत ने महिलाओं को नई पीढ़ी की माडर्न महिला का खिताब दिया। भारत में भी महिलाओं ने आईटी, बैकिंग, बीपीओ और मीडिया जैसे क्षेत्रों में अपनी एक पेंठ बना ली है। लेकिन इस न्यू जेनरेशन की वूमेन के तमगे को कायम रखने के लिए कुछ महिलाओं ने स्मोकिंग और ड्रिंक जैसी आदतों को निरविरोध अपना लिया है। अब डिस्को में थिरकते कदम, हाथ में छलकता जाम और होठों के बीच दबी सिगरेट सिर्फ अमीर महिला की नहीं बल्कि बेहद मार्डन समझी जाने वाली महिला की छवि को पेश करते हैं। स्मोकिंग करना और अल्होकल का सेवन करना आज माडर्न समझी जाने वाली महिलाओं के लिए फैशन स्टेटमेंट बन चुका है। पहले के समय में देखा जाता था कि वही महिलाएं नशे से दोस्ती करती थी जो...

बिग बॉस का तमाशा

मैंने अभी तक बिग बॉस का एक भी एपीसोड नहीं देखा है। और न ही राखी का इंसाफ देखने को मौका मिला। जब भी देखा चलते चलते देखा या फिर चैनल लगाते हुए नजर पड़ गई तो थोड़ा रुक कर देख लिया। जब भी देखा न्यूज चैनल पर देखा। जब मैंने इसको देखना और सुनना शुरु किया तो बड़ा अजीब सा लगा कि यह किस तरह का प्रोग्राम है। ये लोग किस तरह के समाज और संस्कृति को दिखा रहे हैं। इन दोनों प्रोग्राम को लेकर जो हंगामा मचा उसका कारण सिर्फ इतना है कि टीवी का चरित्र सती सवित्री जैसा माना जाता रहा है। लोग उससे वैसी ही उम्मीद करते हैं। लेकिन लगभग आठ साल पहले टीवी सीरियल क्योंकि सास भी कभी बहू थी में एक बलात्कार की घटना का फिल्मांकन किया गया था। जिसने टीवी चरित्र की सभी हदें पार कर दी थी। तब हंगामा क्यों नहीं मचा। अब भी कुछ सीरियल में ऐसे दृश्यों की भरमार है। जिन्हें परिवार के साथ नहीं देख सकते। जमाना बहुत तेजी से बदल रहा है। टीवी संस्कृति ने बेडरुम और ड्राइंगरुम में फर्क खत्म कर दिया है।

कश्मीर बनाम जहन्नुम

मैं समझता हूं कश्मीर के मामले में जरूरत है समस्याओं और हालात पर एक नए नजरिये को अपनाने की। बीते सालों में हुई गलतियों और भूलों से सबक लिया जाए जिससे कि सूफियों की सरज़मीं कश्मीर, कश्मीर ही रहे, कुछ और न बनने पाए। लेकिन ये क्या हो रहा है कश्मीर में... कहां तो अमन-चैन की बात हो रही थी, लेकिन कश्मीर एक बार फिर सुलग उठा है। दो महीने पहले सेना के फर्जी एनकाउंटर से उठा विवाद और फिर पत्थरबाजों का कोहराम इतना बढ़ा कि 20 साल बाद एक बार फिर श्रीनगर में हालात को काबू करने के लिए सेना को मुस्तैद करना पड़ा। लेकिन हालात सुधरने और काबू में आने की बजाय और बिगड़ते ही जा रहे हैं। कश्मीर में लगी आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। युवा आक्रोशित हैं। लोगों के दिलों में नफरत जवां होती जा रही है। लोगों का गुस्सा ज्वाला मुखी की तरह आग उगल रहा है। इसमें बड़ी ही शर्मनाक बात यह है कि अपनी जिम्मेदारियों से कन्नी काटने का खेल बड़े आराम से खेला जा रहा है। राजनीति का बाजार गर्म है। गृहमंत्री पी चिदम्बरम को इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ नजर आता है और राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अब भी यह मानने के लिए तैयार नहीं ह...

जकूजी ने बदले स्नान के मायने

जकूजी और आपका स्नान तेज रफ्तार जिदंगी। सोचने का वक्त नहीं। कामकाज का बेतहाशा बोझ। आगे निकलने की होड़। ऐसे में थकता तन और मन। फिर से तरोताजा होने की जरुरत। आप क्या करते हैं। चाय की चुस्की या कुछ घंटों की नींद या फिर कुछ देर की मस्ती। इसी पर जानकारी दे रहे हैं आपको अजय शर्मा यदि आप यह महसूस करते हैं कि समय के साथ-साथ आपका एनर्जी लेवल कमजोर हो गया है। आपको काम की थकान के बाद आराम करने पर भी फ्रेशनेस महसूस नहीं होती है। दिनभर की थकान दूर करने के लिए बहुत से कारगर तरीके हैं। कोई चाय की चुस्की या कुछ घंटों की नींद लेना पसंद करता है। लेकिन इससे भी आप फ्रेश महसूस नहीं कर पाते हैं। तो ऐसे में बाथ ऐसा तरीका है जो सबसे ज्यादा कारगर और लोकप्रिय है। लेकिन वक्त के साथ साथ इसमें भी बदलाव आए हैं। अब लोग इसको लेकर अधिक जागरुक हो गए हैं। स्नान भी अब एक रिफ्रेशमेंट का जरिया बन गया है। आजकल बाथरुम में बाथटब ने बहुत तेजी के साथ अपनी जगह बनाई है। लोगों में बाथटब जकूजी को लेकर खासा क्रेज है। क्योंकि इस भागमभाग की जिंदगी में व्यक्ति कुछ भी बोरिंग नहीं चाहता। ऐसे में बात हो स्नान की, तो समझौता बिल्कुल ...

राष्ट्रमंडल खेल और पर्यटक, तैयार है आगरा

अक्टूबर में शुरु होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ताजमहल और फतेहपुर सीकरी के निकट सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करेगी। जिसमें विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां शिरकत करेगी। गौरतलब है कि आगामी तीन अक्टूबर से दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल शुरू हो रहे हैं। पन्द्रह दिन तक चलने वाले इस आयोजन में एक लाख से ज्यादा पर्यटकों के आने की उम्मीद है। पर्यटकों के लिए दिल्ली के नजदीक होने के कारण राजस्थान का जयपुर और उत्तरप्रदेश में आगरा आकर्षण का मुख्य केन्द्र होगें। वैसे भी भारत आने वाले पर्यटक ताजमहल देखने जरूर आते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर ताजमहज के आसपास राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम की योजना बनाई है जिसमें फिल्म और कला के क्षेत्र की जानी मानी हस्तियों को आमंत्रित किया जाएगा। ताज महोत्सव की तर्ज पर होने वाले इस समारोह में जानी मानी हस्तियां पर्यटकों को आकर्षित करेंगी। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के महानिदेशक अवनीश अवस्थी ने गुरुवार को बताया कि आगरा में पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र ताजमहल...

फेंगशुई का क्रेज

फेंग शुई भारत में अब काफी चर्चित हो चुका है। धीरे धीरे लोगों में इसका क्रेज बढ़ता जा रहा है। लोगों की उत्सुकता का आलम यह है कि लोग इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा से जानना चाहते हैं। चीन का यह लोकप्रिय वास्तुशास्त्र भारत में भी अपनी जड़े जमा रहा है। आज लगभग हर दूसरा व्यक्ति आपको फेंग शुई का उपयोग करता हुआ मिल जाएगा। इसने बहुत ही जल्द लोगों का विश्वास जीतने में सफलता हासिल की है। जिसके चलते इसके जानकार और विशेषज्ञ भी उसी रफ्तार से बढ़ रहे हैं। इसी फेंग शुई पर कुछ जानकारी हम आपको दे रहें हैं। फेंग शुई एक तरह की सकारात्मक ऊर्जा है जो वातावरण में मौजूद ऊर्जा को सुख, समृद्धि और सौभाग्य के लिए उपयोग करती है। वातावरण में अच्छी ऊर्जाएं आपके चारों तरफ मौजूद होती है। यह फेंग शुई उन्हीं ऊर्जाओं को आपकी तरफ खींच कर लाती हैं। जिसका एहसास आप अपनी जिदंगी में हर पल महसूस करत हैं। यह एनर्जी सभी प्रकार के रुप रंग, आकार और आकृति के साथ आपकी तरफ आती है। सामान्यत फेंग शुई एनर्जी को भाग्यशाली माना जाता है। फेंगशुई का प्रयोग फेंग शुई में लगभग सभी प्रकार के नेचुरल तत्वों का प्रयोग किया जाता है। जि...