मैंने अभी तक बिग बॉस का एक भी एपीसोड नहीं देखा है। और न ही राखी का इंसाफ देखने को मौका मिला। जब भी देखा चलते चलते देखा या फिर चैनल लगाते हुए नजर पड़ गई तो थोड़ा रुक कर देख लिया। जब भी देखा न्यूज चैनल पर देखा। जब मैंने इसको देखना और सुनना शुरु किया तो बड़ा अजीब सा लगा कि यह किस तरह का प्रोग्राम है। ये लोग किस तरह के समाज और संस्कृति को दिखा रहे हैं।
इन दोनों प्रोग्राम को लेकर जो हंगामा मचा उसका कारण सिर्फ इतना है कि टीवी का चरित्र सती सवित्री जैसा माना जाता रहा है। लोग उससे वैसी ही उम्मीद करते हैं। लेकिन लगभग आठ साल पहले टीवी सीरियल क्योंकि सास भी कभी बहू थी में एक बलात्कार की घटना का फिल्मांकन किया गया था। जिसने टीवी चरित्र की सभी हदें पार कर दी थी। तब हंगामा क्यों नहीं मचा। अब भी कुछ सीरियल में ऐसे दृश्यों की भरमार है। जिन्हें परिवार के साथ नहीं देख सकते। जमाना बहुत तेजी से बदल रहा है। टीवी संस्कृति ने बेडरुम और ड्राइंगरुम में फर्क खत्म कर दिया है।
इन दोनों प्रोग्राम को लेकर जो हंगामा मचा उसका कारण सिर्फ इतना है कि टीवी का चरित्र सती सवित्री जैसा माना जाता रहा है। लोग उससे वैसी ही उम्मीद करते हैं। लेकिन लगभग आठ साल पहले टीवी सीरियल क्योंकि सास भी कभी बहू थी में एक बलात्कार की घटना का फिल्मांकन किया गया था। जिसने टीवी चरित्र की सभी हदें पार कर दी थी। तब हंगामा क्यों नहीं मचा। अब भी कुछ सीरियल में ऐसे दृश्यों की भरमार है। जिन्हें परिवार के साथ नहीं देख सकते। जमाना बहुत तेजी से बदल रहा है। टीवी संस्कृति ने बेडरुम और ड्राइंगरुम में फर्क खत्म कर दिया है।
Comments