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मार्डन वुमेन विद सिगरेट और ड्रिंक्स

कुछ सालों से समूचे विश्व को महिलाओं की बढ़ती शाक्ति ने प्रभावित किया है। महिलाएं तमाम नए-नए पेशों में अपनी उपस्थित दर्ज कर चुकी हैं और इससे उनमें आत्मविश्वास का भी काफी इजाफा हुआ। इस शाक्ति ने जहां उन्हें समाज में एक नया मुकाम दिलाया है वहीं इस वर्क प्रेशर के चलते उनमें सिगरेट और शराब की लत को भी बढ़ाया है। नशे की लत कभी तो वर्क प्रशेर को कम करने में सहायक हुई लेकिन ज्यादातर इस लत ने महिलाओं को नई पीढ़ी की माडर्न महिला का खिताब दिया। भारत में भी महिलाओं ने आईटी, बैकिंग, बीपीओ और मीडिया जैसे क्षेत्रों में अपनी एक पेंठ बना ली है। लेकिन इस न्यू जेनरेशन की वूमेन के तमगे को कायम रखने के लिए कुछ महिलाओं ने स्मोकिंग और ड्रिंक जैसी आदतों को निरविरोध अपना लिया है।



अब डिस्को में थिरकते कदम, हाथ में छलकता जाम और होठों के बीच दबी सिगरेट सिर्फ अमीर महिला की नहीं बल्कि बेहद मार्डन समझी जाने वाली महिला की छवि को पेश करते हैं। स्मोकिंग करना और अल्होकल का सेवन करना आज माडर्न समझी जाने वाली महिलाओं के लिए फैशन स्टेटमेंट बन चुका है। पहले के समय में देखा जाता था कि वही महिलाएं नशे से दोस्ती करती थी जो या तो किसी गम के साए से घिरी होती थीं या जिन्होंने प्यार में शिक्सत या धोखा खाया होता था। लेकिन बदलते वक्त के साथ अधिकतर महिलाएं किसी दर्द-गम को भूलाने के लिए नही बल्कि खुद को मार्डन दिखाने के लिए स्मोकिंग और ड्रिंक करती हैं। अगर देखा जाए तो भारत में 90 के दशक से महिलाओं में नशे का फैलाव ज्यादा बढ़ने लगा क्योंकि यह वो वक्त था जब महिलाएं पश्चिमी देशों की महिलाओं का काफी हद तक स्वंय से मिलान करने लगी थी। तरक्की पसंद यह महिलाएं अपने दोस्तों के बीच, आफिस के बाहर, क्लब, पब, डिस्को और हाई-फाई पार्टी कलचर में खुद को सबसे ज्यादा मार्डन दिखाने के लिए सिगरेट के धुएं का छल्ला उड़ाने और शराब के घूंट भरने से परहेज नहीं करती है। इसके अलावा माडर्न कहलाने के लिए कई महिलाएं ड्रग्स का सेवन करने से भी नही हिचकिचाती हैं। स्मोक, ड्रिंक्स और ड्रग्स से शाम रंगीन करने वाली इन महिलाओं में ज्यादातर पढ़ी-लिखीं और पैसे वाली महिलाओं के अलावा अच्छी तनखवाह पाने वाली महिलाएं शामिल हैं। बदलते वक्त के साथ ना सिर्फ कॉलेज बल्कि स्कूल में पढ़ने वाली युवतियों में भी खुद को ज्यादा आधुनिक यानि मार्डन दिखाने की हौड़ लगी हुई है और आधुनिकता की इस रेस को जीतने के लिए उन्होने अधिक से अधिक मार्डन लिबास के अलावा अपनी हाई-फाई सोशल गेदरिंग में फिट होने के लिए सिगरेट और शराब के सेवन से गुरेज नही की है। नशा करने वाली कुछ महिलाओं का मानना है कि उन्होने सिगरेट और शराब के नशे को अपनी जिंदगी का हिस्सा सिर्फ इसलिए बनाया क्योंकि वह ऐसे प्रोफेशन में जहां सिगरेट और शराब पीना एक आम बात है, तो कई महिलाओं का मानना है कि उनके बेस्ट फ्रैंड या बॉयफ्रैंड को स्मोक और शराब का शौक है और अपने साथी की संगत के कारण ही उनमें भी नशे की लत लगी है, तो कुछ महिलाएं नशा करने को हाई स्टेट्स का सिंबल मानती हैं।





खुद को प्रोग्रेसिव दिखाने वाली यह माडर्न माने जाने वाली महिलाएं नशे के खतरों को अनदेखा कर रही हैं। टबेको एटलस एंड अमेरिकन केंसर सोसायटी और वर्ल्ड लंग फाउंडेशन के सर्वे के मुताबिक विश्व में 25 करोड़ महिलाएं स्मोक करती हैं ओर इन महिलाओं में एक बड़ी तादाद भारतीय महिलाओं की है। स्मोक करने वाली महिलाओं में भारत का विश्व में तीसरा स्थान है। यूएस इसमे पहले स्थान पर है जहां 2.3 करोड़ महिलाएं स्मोक करती हैं। दूसरे स्थान पर चीन है जहां 1.3 करोड़ महिलाएं स्मोकिंग करती हैं। भारत तीसरे स्थान पर है जहां 1.1 करोड़ महिलाएं सिगरेट के धुऐं में खुद को खो देती हैं।



एक रिसर्च के मुताबिक भारत में महिलाओं में स्मोकिंग की आदत से उनकी सेहत पर घातक दुष्प्रभाव पड़ते हैं। सिगरेट पीने वाली महिलाओं में सरवाइकिल केंसर ओर हद्घय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। स्मोकिंग करने वाली अधिकांश महिलाओं की उम्र 25 से 44 वर्ष के बीच होती हैं। सिगरेट के कश लेने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट केंसर का खतरा भी स्मोक ना करने वाली मकिलाओं से 75 प्रतिशत तक अधिक होता है। टीनऐज से सिगरेट की लत रखने वाली महिलाओं को सिगरेट ना पीने वाली महिलाओं की तुलना में मेनापोज की स्थिती भी जल्दी आती है।




इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को सिगरेट ओर शराब के सेवन से दूर ही रहना चाहिए। गर्भावस्था में शराब का सेवन करने से गर्भ में पल रहे बच्चों के दिमाग पर गहरा असर पड़ता है। इस कारण बच्चों को आने वाले समय में मानसिक परेशानियां का सामना करना पड़ता है जिनमे किसी भी कार्य में ध्यान केंद्रित करना, यादशात की कमी और पढ़ाई में मन ना लगने जैसी दिक्कतें आ सकती हैं। इसके अलावा पैदा होने वाले इन बच्चों में अस्थमा होने के चांस भी ज्यादा होता है। कई बार स्मोक करने वाली स्त्रियों के गर्भपात का भी चांस ज्यादा रहता है।

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