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मीडिया के सामने चुनौतियां

मीडिया के सामने चुनौतियां ''

मीडिया के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है कि उसकी विश्वसनीयता बनी रहे. विश्वसनीयता सिर्फ खबरों के संकलन में नहीं बल्कि उसे प्रस्तुत करने और विश्लेषित करने की आवश्यकता है.  यदि पत्रकार के पास साक्ष्य के साथ तथ्य है तो उसे प्रस्तुत करने में कोई खतरा नहीं है. सही तथ्य सामने आने पर प्रशासन और समाज को भी दिशा मिलती है. बाजार ने मीडिया को प्रभावित किया है. लेकिन हम अपने दायरे में तथ्यों को प्रस्तुत करें तो विश्वशनीयता बनी रहेगी. आम जनता का भरोसा मीडिया पर है उसे टूटने नहीं दें. सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों को मीडिया को खास स्थान देना चाहिए. आज समाज में अनेक प्रकार की कुरीतियां हैं. इन कुरीतियों के खिलाफ मीडिया की लड़ाई होनी चाहिए. साथ ही सरकार की जो महत्वपूर्ण योजना है. उन योजनाओं से आम लोग कैसे लाभान्वित हो तथा इसमें क्या बाधाएं हैं. इस दिशा में ठोस पहल किये जाने की आवश्यकता है

मीडिया लोकतंत्र के चौथा स्तंभ के रूप में जाना जाता है. इसके स्वरूप में भूमंडलीकरण के प्रभाव से कुछ अंतर तो आया है. लेकिन मीडिया का विस्तृत दायरा है. इस दायरे का प्रयोग बेहतरी के लिए होना चाहिए. तभी हम सशक्त भारत के निर्माण की ओर अग्रसर हो सकेंगे.

मीडिया के समक्ष जो चुनौती पहले से थी. उसके स्वरूप में व्यापक परिवर्तन हुआ है. व्यापकता के दौर में खबरों की गति में तो तेजी आयी ही है और इस तेजी के चक्कर में कभी-कभी चूक भी हो रही है. इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है. इसके अलावा मीडिया को प्रभावशाली लोग अपने शिकंजे में कर उसका अपने तरीके से इस्तेमाल करना चाहते हैं. जबकि आम लोगों की बात होने से एक सकारात्मक संदेह जा सकता है. जो छिपी हुई बात है. उसे सामने लाना ही पत्रकारिता है.

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