एमएलसी स्नातक के टिकट को लेकर चल रही लगातार चर्चा पर बृहस्पतिवार को विराम लग गया। भाजपा ने आरकेजीआइटी के मालिक दिनेश गोयल को एमएलसी स्नातक का टिकट थमाकर वैश्य वर्ग में पैठ पुख्ता रखने की कोशिश की है। हालांकि मेरठ-सहारनपुर मंडल की एमएलसी स्नातक का टिकट वैश्य के खाते में जाते ही अन्य बिरादरियों को साधने के लिए संगठन में हिस्सेदारी के कयासों को तेज कर दिया है।
आरकेजीआइटी के मालिक दिनेश गोयल ने भाजपा आलाकमान का भरोसा जीतकर मेरठ-सहारनपुर मंडल से एमएलसी स्नातक का टिकट हासिल कर अन्य दावेदारों को चारों खाने चित कर दिया। पार्टी सूत्रों की माने तो एक संवैधानिक पद पर आसीन एक बडे़ नेता खुद अपने पुत्र के टिकट के लिए पैरवी में लगे थे। भाजपा में दूसरे दल से आकर भाजपा में पैठ जमा चुके एक पूर्व एमएलसी अपने या पत्नी के टिकट के लिए प्रयासरत थे। एक एसएमएस भेजने वाले पुराने भाजपा नेता ने इस अपेक्षा में होर्डिंग तक लगवा दिए थे। राज्यसभा सदस्य की दावेदारी में भी दिनेश गोयल का नाम प्रमुखता से चल रहा था। लेकिन उस समय एचआरआइटी के मालिक अनिल अग्रवाल ने बाजी मार ली थी। बता दें कि दिनेश गोयल के पिता राजकुमार गोयल का भी लंबा राजनीतिक सफर रहा है। दिलचस्प होंगे नए राजनीतिक समीकरण
एमएलसी स्नातक के लिए दिनेश गोयल का टिकट कई नए राजनीतिक समीकरण पैदा करेगा। मौजूदा समीकरणों पर गौर करें तो प्रदेश में स्वास्थ्य मंत्री पद से वैश्य वर्ग से ताल्लुक रखने वाले अतुल गर्ग को नवाज कर कद बढ़ाया गया। इससे पहले राज्यसभा में भी वैश्य वर्ग के वाले अनिल अग्रवाल को भेजा गया। अब एकबार फिर दिनेश गोयल के नाम पर मुहर लगाकर भाजपा ने भले ही वैश्य वर्ग में अपनी जड़ और गहरी की हो, लेकिन अन्य बिरादरियों का साधे रखना पार्टी के लिए चुनौती से कम नहीं होगा। इसकी भरपाई भाजपा संगठन अन्य वर्गों को प्रतिनिधित्व करने की जुगत में रहेगी।
समर्पण का मिला सिला
दिनेश गोयल को भारतीय जनता पार्टी के प्रति समर्पित रहने का सकारात्मक सिला मिलता दिखा है। गौरतलब है कि भाजपा की स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय कार्यकारिणी तक के कार्यक्रमों के लिए दिनेश गोयल का दरबार हमेशा खुला रहा है। कई केंद्रीय मंत्रियों समेत उनके यहां भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तक के कार्यक्रम हुए। यहाँ तक कि लोकसभा चुनाव में जीत का जश्न भी केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह ने कार्यकर्ताओं के साथ आरकेजीआइटी में ही मनाया था।
अरमानों में लग गई थी आग
भाजपा ने दिनेश गोयल को एमएलसी स्नातक का प्रत्याशी बनाकर सियासी जख्मों पर लाल दवा लगाने का काम किया है। बता दें कि निकाय चुनाव से पहले मेयर बनने का ख्वाब देख रहे दिनेश गोयल के अरमानों में तब आग लग गई जब आरक्षण की कैंची के गाजियाबाद की सीट को कतर कर महिला को थमा दिया। पार्टी ने मुझ पर विश्वास जताया है। मैं इस विश्वास पर खरा उतरूंगा। सभी का धन्यवाद।
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