जैसे-जैसे कंप्यूटर और इंटरनेट का जीवन में इस्तेमाल बढ़ रहा है सायबर अपराध, सायबर जोखिम, सायबर हमला, सायबर लूट और सायबर शत्रु जैसे शब्द भी हमारे जीवन में प्रवेश करने लगे हैं। इसमें विस्मय की बात नहीं, क्योंकि आपराधिक मनोवृत्तियाँ नहीं बदलीं, उनके औजार बदले हैं। एक ज़माने में घरों में सोना दुगना करने वाले आते थे। लोग जानते हैं कि सोना दुगना नहीं होता, पर कुछ लोग उनके झाँसे में आ जाते थे।
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार देश में सायबर धोखाधड़ी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सन 2015-16 एक लाख रुपये से ज्यादा बड़ी रकम बैंक खातों से उड़ाने से प्रभावित धनराशि 40.20 करोड़ रुपये थी, जो 2017-18 में 109.56 करोड़ रुपये हो गई। 2017 में फिशिंग, वेबसाइट घुसपैठ, वायरस और रैनसमवेयर अटैक जैसे 53 हजार से ज्यादा मामले सामने आए। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़ों के अनुसार, 2016 में सायबर धोखाधड़ी के 2,522 मामले दर्ज किए गए। सन 2015 में इनकी संख्या 2,384 और 2014 में 1,286 थी।
सायबर सिक्योरिटी के सॉफ्टवेयर बनाने वाली विश्व की अग्रणी संस्था सिमेंटेक ने सन 2018 की इंटरनेट सिक्योरिटी थ्रैट रिपोर्ट में कहा था कि मोबाइल फोन के मालवेयर संक्रमण के मामले में भारत दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। उसके अनुसार क्रिप्टोमाइनिंग गतिविधियों में भारत का स्थान दुनिया में चौथा और एशिया प्रशांत तथा जापान क्षेत्र में दूसरा है।
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