रात को टीवी पर एक न्यूज़ अचानक फ्लैश हुई भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज नहीं रही.
इस खबर ने मुझे पूरी तरह से आश्चर्यचकित कर दिया. मुझे बहुत ही हैरानी हुई. हमारी ‘सुषमाजी ‘नहीं रही। अनंत में विलीन हो गयी वो। बड़ा ही दुखद समाचार .भारत का संम्मान ,नारी जगत की शान, सुषमा जी के जाने से ,हमारी ‘सुषमा’ नही रही .
इस बार के लोकसभा चुनाव में जब उन्होंने खराब सेहत का हवाला देते हुए कहा चुनाव नहीं लडूंगी तो मैंने महसूस किया शायद वे सक्रिय राजनीति से दूर रहते हुए आराम करना चाहती हैं. वे दूर रहकर भी सक्रिय नजर आ रही थी अक्सर उनका कोई न कोई बयान आ जाता था या फिर ट्विटर के माध्यम से वे सक्रिय नजर आती थीं.
जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने को लेकर उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए अभिनंदन का ट्वीट किया. मोदी जी मैं इस दिन का अपने जीवन में बेसब्री से इंतजार कर रही थी. और इसके बाद उनकी मौत की खबर आई.
ऐसा लगा शायद वह सिर्फ इसी दिन का इंतजार कर रही थी और उसकी खबर सुनते ही सुषमा जी देवलोक की ओर प्रस्थान कर गई. मुझे याद पड़ता है जब मैंने उनके कुछ पुराने वीडियो में उनके भाषण सुने थे सुषमा जी किस तरह से कश्मीर और कश्मीर के मुद्दों पर बहुत ही ओजस्वी ढंग से बोला करती थी. वह कहती थी हां हम कम्युनल है क्योंकि हम कश्मीर की समस्याओं को उठाते हैं. हम चाहते हैं कि कश्मीर के शरणार्थियों की आवाज सुनी जाए उनका दर्द समझा जाए.
उन्होंने 1996 की लोकसभा में कहा था, जी हां अध्यक्ष महोदय हम कम्युनल हैं क्योंकि हम वंदे मातरम गाने की वकालत करते हैं हम राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए लड़ते हैं. हम जनतंत्र की पैरोकारी करते हैं. हम इस देश से जाति व्यवस्था एवं उसकी रूढ़ियों को दूर कर देना चाहते हैं.
अध्यक्ष महोदय हमारे हमारे लिए सेक्युलर होने का मतलब है. एक हिंदू अच्छा हिंदू होना चाहिए. एक मुसलमान अच्छा मुसलमान होना चाहिए. एक सिख अच्छा सिख होना चाहिए.
जी हां अध्यक्ष महोदय हम कम्युनल हैं क्योंकि हम धारा 370 को खत्म कर देना चाहते हैं.
और इसी धारा 370 की सबको होने की खबर के साथ ही उन्होंने देहलोक छोड़कर देवलोक की ओर प्रस्थान कर लिया.
सुषमा जी को उनकी ओजस्वी वाणी के लिए याद किया जाता रहेगा. सुषमा जी एक कुशल वक्ता दूरदर्शी राजनीतिज्ञ थी.
भगवान दिव्यात्मा को सदगति एवं शान्ती दे। परिजनों को मनोबल। देशवासियों को साहस। हमारी अपूरणीय क्षति है उनका चले जाना। विलक्षण बुद्धिमती ,विदुषी नारी ,,एक निष्णात ,कर्मठ नेतृत्व को हमने खोया है। हमारे मन में वो और उनकी मधुर स्मृतिया हमेशा बनी रहेगी। सारा विश्व उनकी हाज़िरजबाबी ,उनके ज्ञान का कायल था। अपनों के लिए हरसंभव यत्न करना उनका मानव धर्म था।
देश की प्रगति ,मानवता की उन्नति के लिए आप सदा प्रयत्नशील रही। आप के योगदान को हम कभी भुला न पाएंगे। आप से बनने का यत्न करना और अपने देश-हित को सर्वोपरि मान कर जीना ही आप को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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