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पुलिस खुदगर्ज नहीं कर्तव्यनिष्ठ है

पुलिस खुदगर्ज नहीं कर्तव्यनिष्ठ है.....

अपने देश की पुलिस सेवा दुनिया की सबसे बड़ी पुलिसिंग मानी जाती है ऐसे में हिंदुस्तान के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की पुलिस सेवा बहुत ही महत्वपूर्ण और जिम्मेदारियों की कसौटी पर रहती है. आजादी के बाद से लेकर अब तक पुलिस की चुनौतियां समय के साथ बढ़ रही है और साख हमेशा लोगों के निशाने पर रहती है। 

पुलिस के ऊपर अक्सर खुदगर्ज होने के आरोप लगते रहते हैं, इसके साथ ही राजनीतिक लोगों का पुलिसिंग में दखल और उस पर नियंत्रण करने की कोशिशों की खबरें भी चर्चा का विषय बनती रही है। पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का यह कहना कि खाकी भगवा या गेरूआ से किसी मामले में कम नहीं है, 19 नहीं है। यह सोचने पर मजबूर करता है। इसलिए ऐसे ज्वलंत मुद्दों पर मीडिया भी सवाल खड़े करता रहता है। 

दोस्तों ऐसे तमाम आरोपों और अफवाहों के बावजूद पुलिस अपने कर्तव्य को निभाने में समर्पित है, संविधान की शपथ तथा संविधान के प्रति उत्तरदायी पुलिस विभाग के कुछ जांबाज, ईमानदार, दूरदर्शी, संवैधानिक जिद्दी, कूटनीतिज्ञ, देश सेवा और समाज सेवा से भरे हुए अफसरों ने उत्तर प्रदेश राज्य को अपराध मुक्त राज्य बनाया हुआ है। यह अफसर अपराधियों के लिए एक सजा है, ऐसे अपराधियों के शरणदाता भी खौफ जदा रहते हैं। मुझे याद आता है जब पिछले साल जुलाई में यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि प्रत्येक 6 महीने में अच्छा काम करने वाले सिपाहियों को सुपर कॉप का तमगा मिलेगा और उन्होंने 68 सिपाहियों के साथ एक ढाबे पर भोजन भी किया।

बेहतर पुलिस व्यवस्था के लिए यूपी पुलिस ने डिजिटल वांलटियर्स के जरिए सोशल मीडिया पर नजर रखने की पहल की। पुलिस ने अपने आपको आधुनिक बनाते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर टिवटर और ऑनलाइन शिकायतों को स्वीकार करना प्रारंभ किया। टिवटर के जरिए इसे अंतरराष्टीय स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय पीपीएस अधिकारी राहुल श्रीवास्तव को जाता है। महिला सुरक्षा के प्रति कार्रवाई के लिए 1090 हेल्पलाइन का श्रेय आईपीएस नवनीत सिकेरा को जाता है। वहीं पुलिस के द्वारा कुछ लोगों की समय रहते जिंदगी बचाने की खबरें भी सुर्खियां बनीं। जिसमें इटावा पुलिस द्वारा बाइक सवार दंपति का पीछा कर सुरक्षित बचाना और लखनउ पुलिस कर्मचारी द्वारा एक युवक को आत्महत्या से बचाना। यूपी पुलिस ने अपराधियों के सफाए के लिए कुछ ऑपरेशन चलाए जिनमें ऑपरेशन लंगड़ा, ऑपरेशन क्लीन, ऑपरेशन आल आउट, खोए हुए बच्चों की खोज के लिए आपरेशन स्माइल, स्माइल तो इतना पसंद किया गया कि गृह मंत्रालय ने उस वक्त इसे पूरे देश में चलाने के आदेश जारी कर दिए। इस ऑपरेशन का जिक्र संसद से लेकर सार्क सम्मेलन तक हुआ। इसके लिए गाजियाबाद के पूर्व एसएसपी धर्मेंन्द्र सिंह को विदेशी जमीन पर सम्मानित किया गया। ये कुछ ऐसे उदाहरण हैं जो बदलती पुलिंसिंग का चेहरा बयां करते हैं।   

उत्तर प्रदेश के पिछले 6 महीने के आपराधिक आंकड़ों पर नजर डालें तो अपराध के ग्राफ में गिरावट आई है। जो बेहतर होती पुलिसिंग के बारे में बताने के लिए काफी है।

देश की राजधानी दिल्ली की पुलिसिंग से तुलना करें तो पाएंगे कि उत्तर प्रदेश पुलिस भी स्मार्ट होने के साथ अपराध पर अंकुश लगाने में कामयाब हो रही है लेकिन इसके बावजूद भी यूपी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठते रहते हैं, कभी-कभी उसे निरंकुश और हृदयविहीन तक कह दिया जाता है।

मैं यहां पर आपको यह बताना चाहता हूं कि ऐसा नहीं है पुलिस वाले भी इंसान हैं उनके अंदर दिल है, मानवता है और इंसानियत है। इसके कई उदाहरण हमारे सामने आए हैं जहां पर पुलिस वालों ने इंसानियत और मानवता की मिसाल को पेश किया है। संत कबीर नगर जिले में तैनात कॉन्स्टेबल मानवी द्वारा एक वृद्धा की सहायता करना। वही लोकसभा चुनाव 2019 में एक वृद्ध दिव्यांग को मतदान स्थल तक पहुचाने के प्रयास के लिए एसपी शिवहरि मीणा की तारीफों के पुल बांधे गए।

आज की यह पुलिस बदलते भारत की पुलिस है। जो वक्त के साथ स्मार्ट, हाईटेक और उच्च शिक्षा से शिक्षित अधिकारियों वाली अनुकरणीय पुलिस फोर्स है। जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और जांबाज़ अधिकारियों व कर्मचारियों की कमी नहीं है। राज्य के निवासियों को अपनी पुलिस को खुदगर्ज़ कहने के पूर्वाग्रह से बचना होगा। एक सकारात्मक सोच ही पुलिस और जनता के बीच की दूरी को भर सकती है।

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