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विवेक ओबरॉय का मीम और फिल्म का प्रचार

विवेक ओबरॉय के मजाक रूपी  मीम ने चुनावी माहौल को और भी गरमा दिया. विवेक ओबरॉय का यह मजाक एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था उनके द्वारा अभिनीत फिल्म नमो आने वाली है और चुनाव का मौसम है ऐसे में उनको प्रचार की सख्त आवश्यकता थी तो कम समय में कैसे प्रचार हो फिल्म का जिसके लिए उन्होंने कंट्रोवर्सी को चुना.  चुनाव के रिजल्ट आने वाले हैं इसीलिए उन्होंने चुनाव संबंधी एक मीम बनाया और सोशल मीडिया पर उछाल दिया उसके बाद जो हुआ सभी को पता है हमारे देश में भोले भाले लोगों ने उन्हें मुफ्त में बहुत बड़ा प्रचार दे दिया. मेरे देश के भोले भाले लोगों को बहुत-बहुत बधाइयां ऐसी समझदारी पर वारी जाऊं.

24 मई को आप विवेक ओबरॉय की फिल्म का मजा लेने के लिए तैयार रहिए.  हो सकता है उन्हें यह लगा हो कि यदि गठबंधन की सरकार बन गई तो उनकी फिल्म को कौन देखने जाएगा

दोस्तों सभी जानते हैं , मीम लतीफे की तरह होते हैं. आप उन्हें सार्वजनिक मंच पर छेड़ते हैं, लोग मजे लेते हैं और फिर भूल जाते हैं. औरतों को लेकर मीम खूब बनाए जाते हैं- लतीफे भी. विवेक ओबरॉय ने भी लतीफा छोड़ा था. वह कह रहे थे कि लतीफे को लतीफों की तरह लें. यह कल की बात थी. आज की बात यह है कि वह मिमिया रहे हैं- मैं क्षमाप्रार्थी हूं.

कह दिया, फिर माफी मांग ली. आजकल का यही चलन है. आप अनर्गल कुछ भी बकिए- फिर कहिए- आई एम सॉरी. मेरा यह मतलब नहीं था. मतलब निकालने वालों ने गलत मतलब निकाला. मैंने तो मजाक किया था

बहरहाल जो भी हो विवेक ओबरॉय का काम हो चुका है उनको मुफ्त की पब्लिसिटी मिल चुकी है और वह भी ऐसे समय में जब कोई भी चैनल उनकी फिल्म के प्रचार के लिए एक फोटो तक नहीं दिखाता ऐसे में इतनी कंट्रोवर्सी हो जाना. किसी फिल्म के एक्टर के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है तो उनकी पीआर एजेंसी और उनकी रणनीति  बधाई की पात्र है

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