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सर्फाबाद नोएडा---- आजादी से पहले और आजादी के बाद


सर्फाबाद नोएडा 
आजादी से पहले और आजादी के बाद 
‘यादवों के गांव की 13 पीढ़ियों का विशालतम इतिहास‘ 
प्रस्तावना 

दुनिया के मानचित्र में ग्रामीण भारत की पहचान रखने वाला अपना देश हिंदुस्तान आज जीवन के हर क्षेत्र में विकास कर रहा है।  चाहे वह रियल एस्टेट सेक्टर हो या फिर सूचना प्रौद्योगिकी का क्षेत्र हो। भारत की पहचान एक विकासशील देश के रूप में होती है लेकिन इसके बावजूद भी अपने देश हिंदुस्तान ने अपनी ग्रामीण पहचान और सादा जीवन को जीवंत रखा है।

किसी भी जीवन देश के लिए मजबूत और स्वतंत्र लोकतंत्र का होना महत्वपूर्ण जरूरत है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और तमाम तरह के उतार-चढ़ाव देखने के बावजूद इसकी लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती गई है। बीच में कुछ झटके, हिचकोले आए लेकिन यह आगे बढ़ता गया। इसके साथ-साथ भारत का साहित्य सृजन भी समृद्ध होता गया है, ऐसे में भारतीय मीडिया तथा साहित्य का दायित्व और बढ़ जाता है कि वह देश समाज, राजनीति, कला और दुनिया में जो घटित हो रहा है उसे बिना किसी लाग लपेट, बिना किसी दबाव और पूरी सच्चाई के साथ दो टूक शब्दों में पाठकों के सामने रखे।

यही कोशिश ‘सर्फाबाद आजादी से पहले और आजादी के बाद‘ किताब के माध्यम से हम कर रहे हैं। इस किताब के अंदर यादवों की ‘13 पीढ़ियों का विशालतम इतिहास‘ लिपिबद्ध करने का एक अनूठा प्रयास किया गया है।

हमारी कोशिश है कि सर्फाबाद की तेरह पीढ़ियों का सफर जिन मानदंडों और आदर्शों का परिचायक रहा है, वह दुनिया के सामने आए और सर्फाबाद की वर्तमान पीढ़ी को अपने इतिहास के बारे में जानने का मौका मिले और वह उस पर गर्व कर सके। सर्फाबाद का मूल मंत्र है ‘स्वाभिमान के साथ जीवन को जीना‘। ऐसे ही मानदंडों और जीवन के मूल्यों पर आधारित सर्फाबाद का इतिहास किताब के रूप में आपके हाथों में है।
सर्फाबाद ने आजादी से पहले और आजादी के बाद अपने तेरह पीढ़ियों के सफर में कई राजनैतिक और सामाजिक बदलाव देखे हैं। जाहिर है, आने वाले दिनों में भी बदलाव का सिलसिला जारी रहेगा। बदलाव के विविध पहलू इस किताब में भी दर्ज हुए हैं। लगभग 300 सालों से ज्यादा के इस सफर के दौरान साहित्य, समाज, संस्कृति, कला और राजनीति में आए बदलावों के साथ ही बड़े परिदृश्य और घटनाक्रमों को पाठकों के समक्ष रखने का प्रयास किया गया है। इसमें नोएडा और सर्फाबाद गांव के समक्ष आज और आने वाले दिनों की चुनौतियों की भी चर्चा है। 

इसके लिए हमने सर्फाबाद और नोएडा के प्रतिष्ठित चिंतकां, समाजसेवियों, राजनीतिज्ञों, किसानों, व्यापारियों, अध्यापकों और घर गांव के बुजुर्गों के संस्मरण, जानकारी और अनुभव के आधार पर उनका सहयोग प्राप्त किया है। कमजोर सेहत और व्यस्तताओं के बावजूद कई बुजुर्ग चिंतकां के सहयोग से हमारी कोशिश कामयाबी तक पहुंच पाई। इन सभी सहयोगियों ने जो कहा और जो जानकारी दी, वह देश और समाज के लिए इस समय मायने रखती है।

मौजूदा समय की चुनौतियों का हल क्या हो, इस पर भी सर्फाबाद के शुभचिंतकों की राय पाठकों के लिए प्रेरणा बन सकती है। देश में लगातार बदल रही राजनीति, सामाजिक व्यवस्था और विचारधारा की वजह से गंभीर होती समस्याओं का गहरा विवेचन भी इसमें किया गया है, जो पाठकों को मानसिक रूप से समृद्ध करेगा।
सर्फाबाद गांव के सभी निवासी इस बात पर एकमत हैं कि सर्फाबाद विविधताओं से भरा बहुलतावादी समाज का गांव है। यहां हर वर्ग, जाति, धर्म, संप्रदाय और स्त्री-पुरुष के लिए मुकम्मल जगह है। एक तरीके से यह असली भारत की तस्वीर पेश करता है, जो लोग इस धारणा में नहीं रखते उनको अपना नजरिया बदल लेना चाहिए।
सर्फाबाद के निवासियों का मानना है कि देश को साफ-सुथरा करने का जिम्मा देश के नागरिकों पर भी है। देश में आर्थिक बदहाली, अशिक्षा और जातिगत विसंगतियों को दूर करने का जिम्मा भी नागरिकों पर  है।
इस किताब को लिखने में सर्फाबाद के प्रधान वीरपाल यादव की भूमिका बहुत ही अहम है। उन्होंने बहुत ही संजीदगी के साथ एक सूत्रधार की भूमिका को निभाया है। सर्फाबाद गांव के यादवों से जुड़ी हुई हर जानकारी को उन्होंने उपलब्ध कराया है, और इसके साथ-साथ अपनी बातों को वे बहुत ही तार्किक ढंग से कहते हैं।
प्रधान वीरपाल यादव कहते हैं कि देश में सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन की जरूरत है क्योंकि सकारात्मक बदलाव उसी से संभव है। यह राजनीति भर के बस की बात नहीं है। मौजूदा राजनीतिक दल तो सत्ता हथियाने के लिए अपने एजेंडे पर काम करते हैं, इसलिए उनसे बदलाव का वाहक बनने की उम्मीद करना बेमानी है। जन चेतना और सामाजिक सांस्कृतिक आंदोलनों में ही वह क्षमता है कि राजनीति की धारा भी बदल जाए।

सर्फाबाद गांव के कुछ विचारशील बुद्धिजीवियों ने सर्फाबाद गांव की मौजूदा स्थिति पर भी तीखी टिप्पणियां की है और उन्होंने इसके प्रति कुछ हद तक मीडिया को जिम्मेदार ठहराया है, उनका मानना है कि सरफाबाद गांव की असली तस्वीर मीडिया ने दुनिया के सामने नहीं रखी, यह गलत है।

मुझे पूरी आशा है पाठकों को यह किताब कुछ नया सोचने पर मजबूर करेगी। नोएडा और सर्फाबाद गांव के प्रतिष्ठित समाजसेवियों, राजनीतिज्ञों और बुद्धिजीवियों के द्वारा दी गई जानकारियां पाठकों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेंगी, जो आज के समय की महती जरूरत है। यह नए विचारों को प्रश्रय देने, नई बहस का सूत्रपात करने में भी थोड़ा सा मददगार होंगी, तो हम अपनी कोशिश को सफल मानेंगे। बहुत ही जल्द, सर्फाबाद गांव के यादवों की 13 पीढ़ियों का विशालतम इतिहास की यह किताब पाठकों के हाथों में होगी। जिसके बाद इस गांव को लेकर दुनिया का सोचने और समझने का नजरिया बदल जाएगा और मौजूदा पीढ़ी अपने इतिहास पर गर्व कर सकेगी। साथ ही आने वाली पीढ़ी को गर्व के साथ जीने के लिए तैयार कर सकेगी।
अजय शर्मा 

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