बीती रात गाजियाबाद में इंजीनियरिंग की स्टूडेंट वैशाली की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत ने एकदम से झकझोर कर रख दिया। गाजियाबाद में आटो वालों से लेकर बस ड्राइवर तक बेलगाम और उददंड हैं। अनुशासन नाम की कोई व्यवस्था सड़क पर रह ही नहीं गई है।
इस सड़क हादसे के बाद सारी जिम्मेदारी का सेहरा गाजियाबाद पुलिस के सिर पर बांधा जाएगा। यातायात माह को निशाने पर लिया जाएगा क्योंकि पुलिस को निशाना बनाना आसान है, लेकिन सवाल यह है कि सड़क पर इस तरह के एक्सीडेंट हो क्यों रहे हैं। कौन जिम्मेदार है। ऐसे में कुछ बातें मेरे जेहन में आती हैं। कहीं ना कहीं इसके लिए सड़क पर बढ़ता वाहनों का दबाव और अतिक्रमण हैं। जिसकी वजह से सड़के संकरी होती चली गई हैं। जो सड़कें बनते वक्त चैड़ी नजर आती हैं। वहीं कुछ सालों बाद संकरी नजर आती हैं। अब फिर वही सवाल- कौन है जिम्मेदार सड़कों के संकरे होने के लिए। पुलिस, प्रशासन या हमारी मनमानी ?
इस सड़क हादसे के बाद सारी जिम्मेदारी का सेहरा गाजियाबाद पुलिस के सिर पर बांधा जाएगा। यातायात माह को निशाने पर लिया जाएगा क्योंकि पुलिस को निशाना बनाना आसान है, लेकिन सवाल यह है कि सड़क पर इस तरह के एक्सीडेंट हो क्यों रहे हैं। कौन जिम्मेदार है। ऐसे में कुछ बातें मेरे जेहन में आती हैं। कहीं ना कहीं इसके लिए सड़क पर बढ़ता वाहनों का दबाव और अतिक्रमण हैं। जिसकी वजह से सड़के संकरी होती चली गई हैं। जो सड़कें बनते वक्त चैड़ी नजर आती हैं। वहीं कुछ सालों बाद संकरी नजर आती हैं। अब फिर वही सवाल- कौन है जिम्मेदार सड़कों के संकरे होने के लिए। पुलिस, प्रशासन या हमारी मनमानी ?

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