कुछ दिन पहले गाजियाब़ाथ जाने का मौका मिला तो में समाजवादी पार्टी के कार्यालय भी गया तो वहां पर मैंने दिलचस्प नजारा देखा । यहाँ पर कुछ वरिस्थ कार्यकर्ता और पदा अधिकारी आपस में चर्चा कर रहे थे की अब उन्हें मौजूदा नए अध्यझ कार्यक्रम की सूचना नहीं देते है । इस सब के पीछे उनकी पता नहीं क्या रणनीति है। जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। अब ये नए पद अधिकारी पुराने और पूर्व पद अधिकारियो को तवज्जो नहीं देते है। जिस से वे बहुत ही आहत है ।
यह इस बात की और संकेत करता है की पार्टी गुटबाजी की बुरी तरह शिकार है। कार्यकर्ता पार्टी हित और जन हित की बजाय व्यक्तिगत हित को लेकर ज्यादा जागरूक है । राजनीतिक विमर्श की बजाय एक दुसरे की टांग खीच रहे थे। बड़ी हैरानी की बात है उस दिन मुलायम सिंह यादव को स्वाइन फ्लू के चलते हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। लेकिन चर्चा का विषय अपनी तारीफ और दुसरे की टांग खीचाई।
साहिबाबाद रेलवे स्टेशन दिल्ली के नजदीक होने के कारण काफी व्यस्त रहता है। यहां 98 पैंसेजर ट्रेन और 16 एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टॉपेज़ हैं। जिनसे लगभग 50 हजार यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। यही रेलवे स्टेशन अनियमिताओं का शिकार है। पूरे परिसर में गंदगी और आवारा पशुओं का जमावड़ा आम बात है। बंदरों के आतंक से भी यह स्टेशन अछूता नहीं है। टिकट खिड़की परिसर में लगी हुई दोनों एटीवीएम मशीनें महीनों से खराब पड़ी हुई हैं। इस परिसर में तीन टिकट खिड़की हैं और एक पूछताछ कार्यालय है। जिसमें से अक्सर दो बंद ही रहती हैं। जिसके चलते यात्रियों को होने वाली असुविधाओं के बारे में जब स्टेशन मास्टर नरेश मलिक से बात की गई तो उन्होंने स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए अपना दामन बचाने की कोशिश की। साहिबाबाद रेलवे स्टेशन मास्टर नरेश मलिक ने बताया कि कर्मचारियों की कमी हैं। मैं उनसे कहां तक काम करवाउं। पेयजल की बाधित व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि यह इंजीनियरिंग विभाग का काम है। इसके बारे में आप इस विभाग से बात करें। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह विभाग आपके आदेश के अधीन नहीं हैं तो उन्होंने चुप्पी साध ली। रेलवे स्टेशन पर ...
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