लोकसभा चुनाव में पराजय के बाद से आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल का दिल्ली के आठवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने तक का सफर काफी अदभुत रहा है जहां उन्होंने अपनी पार्टी को रिकार्डतोड़ सफलता दिलायी।
अपने फौलादी इरादों और लगन के लिए जाने जाने वाले 46 वर्षीय केजरीवाल ने पस्त हाल पड़ी पार्टी में नयी जान फूंकने के लिए लीक से हटकर प्रचार रणनीति बनायी और 70 सदस्यीय विधानसभा में 67 सीटों पर आप को जीत दिलायी। दिल्ली विधानसभा चुनाव को डेविड बनाम गोलियथ संग्राम की संज्ञा दी गयी थी जहां भाजपा ने दिल्ली में सत्ता पर कब्जा जमाने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी थी।
आप की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल दिल्ली में राजनीति की हवा का रूख बदल दिया बल्कि केजरीवाल को भी राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य के केंद्र में ला दिया। अब केजरीवाल की मुख्य चुनौती अपने चुनावी वादों को लागू करना होगी जिनमें से कई वादों को आलोचक बहुत मुश्किल मान रहे हैं राजनीतिक परिदृश्य में आप की रिकार्डतोड़ सफलता को गहरी नजर से देखा जा रहा है जहां आईआईटी के एक सीधे सादे दिखने वाले युवक ने मई में हुए लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के विजयी चुनावी रथ के दौड़ते घोड़ों पर नकेल कस दी। आप की सफलता को सभी प्रमुख दल भगवा चुनौती का सामना करने के लिए एकजुट होने के संकेत के रूप में देख रहे हैं ।
लोकसभा चुनाव में दिल्ली में अपना खाता तक खोल पाने में विफल रहने के बाद आप ने मौन रहकर अपने पंख फैलाए और कार्यकर्ता से नेता बने केजरीवाल ने भागीदारी की राजनीति के माडल को अपनाया तथा समर्पित कार्यकर्ताओं की एक मजबूत विशाल सेना को लेकर वे जनता के बीच गए ।
दिल्ली में 49 दिन तक सरकार चलाने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को लेकर भारी आलोचनाओं का सामना कर रहे केजरीवाल ने गरीब और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों तक सिमटे अपने आधार को विस्तार देने के लिए गैर पारंपरिक अवधारणा को अपनाया। इस बार के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल प्रचार के दौरान काफी विनम्र रहे और जनता से बदलाव का वादा किया। साथ ही उन्होंने पिछले वर्ष 14 फरवरी को इस्तीफा देने के लिए जनता से कई बार माफी मांगी और वे सभी वगरे के साथ संवाद कायम करने में सफल रहे।
केजरीवाल ने भ्रष्टाचार, बिजली और पानी की अनापशनाप दरों, महिलाओं की सुरक्षा आदि मुददों पर कांग्रेस के साथ ही भाजपा को भी निशाने पर लिया और दोनों ही दलों के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाने में सफल रहे। वैकल्पिक राजनीति के ब्रांड बनकर उभरे केजरीवाल ने पिछले दिल्ली विधानसभा चुनाव में 15 साल से सत्ता पर जमी कांग्रेस को हाशिये पर भेजकर और तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को करारी शिकस्त देने के बाद से ही राजनीति की दिशा बदल दी थी।
मुख्यमंत्री बनने के तीन सप्ताह बाद ही उन्होंने विवादों को जन्म दे दिया। अपराधियों के खिलाफ कथित रूप से कार्रवाई नहीं करने वाले तीन पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी की मांग को लेकर वह संसद भवन के समीप धरने पर जा बैठे। प्रशासन के एजेंडे को लेकर भी वह आलोचनाओं से घिरे रहे। सादा जीवन में यकीन रखने वाले केजरीवाल वर्ष 2011 में 75 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के जन लोकपाल के समर्थन में चलाए गए आंदोलन के दौरान सुर्खियों में आए थे।
16 अगस्त, 1968 को हरियाणा के हिसार में गोबिंद राम केजरीवाल एवं गीता देवी के घर पैदा हुए तथा मदुभाषी लेकिन मजबूत इरादों वाले केजरीवाल देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी और अधिवक्ता प्रशांत भूषण के साथ टीम अन्ना का हिस्सा थे।
भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल विधेयक को लेकर आंदोलन चलाए जाने के बाद सरकार द्वारा विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए बनायी गयी समिति में रेमन मैगसायसाय पुरस्कार से सम्मानित केजरीवाल को सिविल सोसायटी के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल किया गया। समिति के मसौदे को सरकार द्वारा खारिज किए जाने से ठगा हुआ महसूस कर रहे केजरीवाल को कांग्रेस तथा कुछ अन्य नेताओं ने तंज कसते हुए कह डाला कि यदि वह सिस्टम के भीतर से सिस्टम से लड़ना चाहते हैं तो राजनीति में आएं, चुनाव जीतें और संसद में आकर भ्रष्टाचार को मिटाएं तथा जन लोकपाल विधेयक को पारित कराएं।
चुनौतियों से खेलने वाले केजरीवाल ने इस पर राजनीति में कूदने का फैसला किया और टीम अन्ना से औपचारिक रूप से अलग होने के बाद 26 नवंबर 2012 को आम आदमी पार्टी का गठन कर डाला। बचपन से ही हर परीक्षा में प्रथम आने वाले केजरीवाल ने आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री हासिल की थी।
1989 से उन्होंने तीन साल तक टाटा स्टील में नौकरी की और संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के लिए 1992 में नौकरी से इस्तीफा दे दिया। यूपीएससी परीक्षा पास कर वह भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी बन गए।
सरकारी सेवा में रहते हुए केजरीवाल सामाजिक मुद्दों को उठाने में आगे रहे और जमीनी स्तर पर सूचना के अधिकार कानून के क्रियान्वयन के लिए काम किया। भारत के गरीब नागरिकों को सशक्त बनाने में आरटीआई के क्रियान्वयन के उनके प्रयासों के लिए उन्हें 2006 में रेमन मैगसायसाय अवार्ड से सम्मानित किया गया।
फरवरी 2006 में आयकर विभाग में संयुक्त आयुक्त पद से इस्तीफा देने के बाद वह पूरी तरह सामाजिक कार्यकर्ता बन गए और पुरस्कार की राशि से अपना गैर सरकारी संगठन पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन शुरू किया। पक्के शाकाहारी और घर के बने खाने को तरजीह देने वाले केजरीवाल ने सुनीता से शादी की है जो खुद भी एक आईआरएस अधिकारी हैं। वह मसूरी में राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में उनकी बैचमेट रही हैं। केजरीवाल दंपति के दो बच्चे हर्षिता और पुलकित हैं । उनकी एक छोटी बहन और एक भाई भी है ।
कानून का उल्लंघन करने वाले किसी व्यक्ति को नहीं बख्शे जाने पर जोर देते हुए केजरीवाल ने कहा, कुछ लोग आप कार्यकर्ता के रूप में अपने आप को पेश करके छवि खराब करने की कोशिश कर सकते हैं। मैं कानून का अनुपालन करने वाले तंत्र से कहना चाहता हूं कि गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल किसी को भी नहीं बख्शा जाए। उन्होंने वीआईपी कल्चर समाप्त करने पर भी जोर दिया।
रामलीला मैदान में लोगों की भारी भीड़ के बीच केजरीवाल ने कहा कि आज से एक साल पहले 14 फरवरी 2014 को हम लोगों ने इस्तीफा दिया था और एक साल बाद फिर दिल्ली में आम आदमी की सरकार बनी। फर्क सिर्फ इतना है कि पिछली बार 8 सीटों की कमी रह गई थी । इस बार दिल्ली की जनता और उपर वाले ने इस कमी को पूरा कर दिया।
उन्होंने कहा, दिल्ली के लोग हमें प्यार करते हैं, यह मालूम था। लेकिन इतना प्यार करते हैं, यह पता नहीं था। 70 में से 67 सीट मिलना, यह किसी इंसान के काम की वजह से नहीं हो सकता है। यह कुदरत का करिश्मा है। हमें यह समझना होगा कि ऊपर वाला हमसे कुछ कहना चाहता है, उसकी कुछ मंशा है। हम तो निमित्त मात्र है।
इससे पहले केजरीवाल दिल्ली से सटे गाजियाबाद के कौशांबी स्थिति अपने घर से अपने परिवार के साथ कार में सवार होकर रामलीला मैदान के लिए निकले। उनके साथ वाहनों के काफिले में उनके भावी मंत्रिमंडल के सहयोगी तथा पार्टी के अन्य पदाधिकारी सवार थे। पिछली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए केजरीवाल मेट्रो से रामलीला मैदान पहुंचे थे। ऐतिहासिक रामलीला मैदान में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई थी और करीब तीन हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था जिनमें दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और एसएसबी के जवान शामिल थे।
अपने फौलादी इरादों और लगन के लिए जाने जाने वाले 46 वर्षीय केजरीवाल ने पस्त हाल पड़ी पार्टी में नयी जान फूंकने के लिए लीक से हटकर प्रचार रणनीति बनायी और 70 सदस्यीय विधानसभा में 67 सीटों पर आप को जीत दिलायी। दिल्ली विधानसभा चुनाव को डेविड बनाम गोलियथ संग्राम की संज्ञा दी गयी थी जहां भाजपा ने दिल्ली में सत्ता पर कब्जा जमाने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी थी।
आप की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल दिल्ली में राजनीति की हवा का रूख बदल दिया बल्कि केजरीवाल को भी राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य के केंद्र में ला दिया। अब केजरीवाल की मुख्य चुनौती अपने चुनावी वादों को लागू करना होगी जिनमें से कई वादों को आलोचक बहुत मुश्किल मान रहे हैं राजनीतिक परिदृश्य में आप की रिकार्डतोड़ सफलता को गहरी नजर से देखा जा रहा है जहां आईआईटी के एक सीधे सादे दिखने वाले युवक ने मई में हुए लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के विजयी चुनावी रथ के दौड़ते घोड़ों पर नकेल कस दी। आप की सफलता को सभी प्रमुख दल भगवा चुनौती का सामना करने के लिए एकजुट होने के संकेत के रूप में देख रहे हैं ।
लोकसभा चुनाव में दिल्ली में अपना खाता तक खोल पाने में विफल रहने के बाद आप ने मौन रहकर अपने पंख फैलाए और कार्यकर्ता से नेता बने केजरीवाल ने भागीदारी की राजनीति के माडल को अपनाया तथा समर्पित कार्यकर्ताओं की एक मजबूत विशाल सेना को लेकर वे जनता के बीच गए ।
दिल्ली में 49 दिन तक सरकार चलाने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को लेकर भारी आलोचनाओं का सामना कर रहे केजरीवाल ने गरीब और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों तक सिमटे अपने आधार को विस्तार देने के लिए गैर पारंपरिक अवधारणा को अपनाया। इस बार के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल प्रचार के दौरान काफी विनम्र रहे और जनता से बदलाव का वादा किया। साथ ही उन्होंने पिछले वर्ष 14 फरवरी को इस्तीफा देने के लिए जनता से कई बार माफी मांगी और वे सभी वगरे के साथ संवाद कायम करने में सफल रहे।
केजरीवाल ने भ्रष्टाचार, बिजली और पानी की अनापशनाप दरों, महिलाओं की सुरक्षा आदि मुददों पर कांग्रेस के साथ ही भाजपा को भी निशाने पर लिया और दोनों ही दलों के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाने में सफल रहे। वैकल्पिक राजनीति के ब्रांड बनकर उभरे केजरीवाल ने पिछले दिल्ली विधानसभा चुनाव में 15 साल से सत्ता पर जमी कांग्रेस को हाशिये पर भेजकर और तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को करारी शिकस्त देने के बाद से ही राजनीति की दिशा बदल दी थी।
मुख्यमंत्री बनने के तीन सप्ताह बाद ही उन्होंने विवादों को जन्म दे दिया। अपराधियों के खिलाफ कथित रूप से कार्रवाई नहीं करने वाले तीन पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी की मांग को लेकर वह संसद भवन के समीप धरने पर जा बैठे। प्रशासन के एजेंडे को लेकर भी वह आलोचनाओं से घिरे रहे। सादा जीवन में यकीन रखने वाले केजरीवाल वर्ष 2011 में 75 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के जन लोकपाल के समर्थन में चलाए गए आंदोलन के दौरान सुर्खियों में आए थे।
16 अगस्त, 1968 को हरियाणा के हिसार में गोबिंद राम केजरीवाल एवं गीता देवी के घर पैदा हुए तथा मदुभाषी लेकिन मजबूत इरादों वाले केजरीवाल देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी और अधिवक्ता प्रशांत भूषण के साथ टीम अन्ना का हिस्सा थे।
भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल विधेयक को लेकर आंदोलन चलाए जाने के बाद सरकार द्वारा विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए बनायी गयी समिति में रेमन मैगसायसाय पुरस्कार से सम्मानित केजरीवाल को सिविल सोसायटी के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल किया गया। समिति के मसौदे को सरकार द्वारा खारिज किए जाने से ठगा हुआ महसूस कर रहे केजरीवाल को कांग्रेस तथा कुछ अन्य नेताओं ने तंज कसते हुए कह डाला कि यदि वह सिस्टम के भीतर से सिस्टम से लड़ना चाहते हैं तो राजनीति में आएं, चुनाव जीतें और संसद में आकर भ्रष्टाचार को मिटाएं तथा जन लोकपाल विधेयक को पारित कराएं।
चुनौतियों से खेलने वाले केजरीवाल ने इस पर राजनीति में कूदने का फैसला किया और टीम अन्ना से औपचारिक रूप से अलग होने के बाद 26 नवंबर 2012 को आम आदमी पार्टी का गठन कर डाला। बचपन से ही हर परीक्षा में प्रथम आने वाले केजरीवाल ने आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री हासिल की थी।
1989 से उन्होंने तीन साल तक टाटा स्टील में नौकरी की और संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के लिए 1992 में नौकरी से इस्तीफा दे दिया। यूपीएससी परीक्षा पास कर वह भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी बन गए।
सरकारी सेवा में रहते हुए केजरीवाल सामाजिक मुद्दों को उठाने में आगे रहे और जमीनी स्तर पर सूचना के अधिकार कानून के क्रियान्वयन के लिए काम किया। भारत के गरीब नागरिकों को सशक्त बनाने में आरटीआई के क्रियान्वयन के उनके प्रयासों के लिए उन्हें 2006 में रेमन मैगसायसाय अवार्ड से सम्मानित किया गया।
फरवरी 2006 में आयकर विभाग में संयुक्त आयुक्त पद से इस्तीफा देने के बाद वह पूरी तरह सामाजिक कार्यकर्ता बन गए और पुरस्कार की राशि से अपना गैर सरकारी संगठन पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन शुरू किया। पक्के शाकाहारी और घर के बने खाने को तरजीह देने वाले केजरीवाल ने सुनीता से शादी की है जो खुद भी एक आईआरएस अधिकारी हैं। वह मसूरी में राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में उनकी बैचमेट रही हैं। केजरीवाल दंपति के दो बच्चे हर्षिता और पुलकित हैं । उनकी एक छोटी बहन और एक भाई भी है ।
कानून का उल्लंघन करने वाले किसी व्यक्ति को नहीं बख्शे जाने पर जोर देते हुए केजरीवाल ने कहा, कुछ लोग आप कार्यकर्ता के रूप में अपने आप को पेश करके छवि खराब करने की कोशिश कर सकते हैं। मैं कानून का अनुपालन करने वाले तंत्र से कहना चाहता हूं कि गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल किसी को भी नहीं बख्शा जाए। उन्होंने वीआईपी कल्चर समाप्त करने पर भी जोर दिया।
रामलीला मैदान में लोगों की भारी भीड़ के बीच केजरीवाल ने कहा कि आज से एक साल पहले 14 फरवरी 2014 को हम लोगों ने इस्तीफा दिया था और एक साल बाद फिर दिल्ली में आम आदमी की सरकार बनी। फर्क सिर्फ इतना है कि पिछली बार 8 सीटों की कमी रह गई थी । इस बार दिल्ली की जनता और उपर वाले ने इस कमी को पूरा कर दिया।
उन्होंने कहा, दिल्ली के लोग हमें प्यार करते हैं, यह मालूम था। लेकिन इतना प्यार करते हैं, यह पता नहीं था। 70 में से 67 सीट मिलना, यह किसी इंसान के काम की वजह से नहीं हो सकता है। यह कुदरत का करिश्मा है। हमें यह समझना होगा कि ऊपर वाला हमसे कुछ कहना चाहता है, उसकी कुछ मंशा है। हम तो निमित्त मात्र है।
इससे पहले केजरीवाल दिल्ली से सटे गाजियाबाद के कौशांबी स्थिति अपने घर से अपने परिवार के साथ कार में सवार होकर रामलीला मैदान के लिए निकले। उनके साथ वाहनों के काफिले में उनके भावी मंत्रिमंडल के सहयोगी तथा पार्टी के अन्य पदाधिकारी सवार थे। पिछली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए केजरीवाल मेट्रो से रामलीला मैदान पहुंचे थे। ऐतिहासिक रामलीला मैदान में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई थी और करीब तीन हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था जिनमें दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और एसएसबी के जवान शामिल थे।


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