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केजरीवाल के होनहारों के जीवन से जुड़ी रोचक जानकारी

छुपा रूस्तम संदीप कुमार 
दिल्ली विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक अंतर से जीतने वाले और पेशे से वकील संदीप कुमार को जमीनी स्तर पर पार्टी के आधार को विस्तार प्रदान करने में मदद के लिए मंत्री पद से नवाजा गया है। 34 वर्षीय कुमार ने सुल्तानपुर माजरा सीट पर चार बार के विधायक जय किशन को 64, 439 मतों से शिकस्त दी और इसलिए उन्हें छुपा रूस्तम का तमगा मिला है। फीसद के हिसाब से भी देखा जाए तो उन्हें सर्वाधिक वोट मिले हैं।

वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में संदीप कुमार ने इसी सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन वह 1112 मतों से चुनाव हार गए थे। चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ से एलएलबी की डिग्री हासिल करने वाले संदीप ने दिल्ली विश्वविद्यालय से 2004 में स्नातक किया था। वह वर्ष 2012 में इंडिया अगेन्स्ट करप्शन आंदोलन के दौरान पहली बार केजरीवाल के संपर्क में आए। उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों के मुकदमों की मुफ्त में पैरवी करने के लिए जाना जाता है।

 
कुमार को श्रेय जाता है कि उन्होंने कार्यकर्ताओं के एक समूह के साथ मिलकर उत्तरी पश्चिमी दिल्ली में आम आदमी पार्टी के आधार को जमीनी स्तर पर विस्तार दिया। उन्होंने सैंकड़ों नुक्कड़ सभाएं कीं और लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद घर घर जाकर प्रचार अभियान चलाया। उन्हें अनुसूचित जाति-जनजातियों के कल्याण और महिला तथा बाल कल्याण मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

मनीष सिसौदिया का राजनीति में सफर 
पत्रकारिता से अपने कैरियर की शुरूआत कर भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता और अंतत: दिल्ली सरकार में मुख्यमंत्री अरिवंद केजरीवाल के बाद नंबर दो की हैसियत हासिल करने वाले मनीष सिसौदिया का यह सफर कोई कम रोचक नहीं रहा है।
 
उप मुख्यमंत्री का पद संभालने जा रहे सिसौदिया शिक्षा, शहरी विकास और लोक निर्माण विभाग का कामकाज देखेंगे। ये ऐसे महत्वपूर्ण विभाग हैं जिनमें केंद्र के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की जरूरत होगी।
 
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के फौगाता गांव में एक अध्यापक के घर 2 फरवरी 1972 को जन्मे 43 वर्षीय मनीष सिसौदिया आप के शैक्षणिक एजेंडे को क्रियान्वित करेंगे जिसमें नए स्कूलों का निर्माण और शैक्षणिक ढांचे में विस्तार भी शामिल है।
 
गांधीवादी सिद्धांतों का कड़ाई से पालन करने वाले सिसौदिया को पार्टी नेता केजरीवाल की छाया के रूप में देखते हैं क्योंकि दोनों नेताओं के बीच गजब के निजी रिश्ते हैं।
सिसौदिया का टिवटर प्रोफाइल बताता है, यह तो पक्का पता नहीं कि मैं नेता हूं, कार्यकर्ता, पाठक, लेखक, पत्रकार या लेकिन मैं भारतीय हूं। मुझे गांधी पसंद हैं क्योंकि वह हमेशा अपनी खुद की पहचान से आगे रहे।
 
सिसौदिया ने पत्रकारिता में डिप्लोमा हासिल करने के बाद बतौर पत्रकार कैरियर शुरू किया लेकिन उन्हें सामाजिक कार्य अधिक पसंद आते थे। पहले उन्होंने अपने एनजीओ कबीर और उसके बाद केजरीवाल के साथ परिवर्तन की शुरूआत की।

गोपाल राय 
ओजस्वी वक्ता के रूप में जाने जाने वाले और पूर्व छात्र नेता गोपाल राय ने वर्ष 2012 में आम आदमी पार्टी के अस्तित्व में आने के बाद से ही जमीनी स्तर पर पार्टी की जड़ों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन वह अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान ही सुर्खियों में आए। इंडिया अगेन्स्ट करप्शन( आईएसी) के दिनों से अरविंद केजरीवाल से जुड़े राय दिल्ली के नए परिवहन और श्रम मंत्री होंगे।
 
39 वर्षीय राय ने वर्ष 2013 में बाबरपुर से विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन वह तीसरे स्थान पर रहे थे। लेकिन इस बार उन्होंने लंबी छलांग लगायी और भाजपा के नरेश गौड़ को 35 हजार मतों के भारी अंतर से हराया।
 
राय ने 1992 में लखनऊ विश्वविद्यालय में आल इंडिया स्टूडेंटस एसोसिएशन के साथ अपने राजनीतिक कैरियर की शुरूआत की थी। वह आंशिक रूप से अपंग हैं क्योंकि लखनऊ में छात्र जीवन के दौरान उन्हें गोली लगी थी लेकिन इस बाधा ने उन्हें पार्टी के लिए काम करने से नहीं रोका।
 
पार्टी के कार्यकर्ता आधार को बढ़ाने का श्रेय राय को जाता है जिन्होंने आप प्रमुख के साथ अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में भाग लिया था। मनीष सिसौदिया की तरह ही उन्होंने भी आम आदमी पार्टी का गठन करने में केजरीवाल का समर्थन किया था। वह पार्टी की शीर्ष नीति नियंता इकाई राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य भी हैं ।
 
रालेगण सिद्धि में जन लोकपाल विधेयक को पारित कराने के लिए अन्ना हजारे के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के चौथे दिन 13 दिसंबर 2013 को वी के सिंह और गोपाला राय के बीच काफी कहासुनी हो गयी थी, जिसके बाद अन्ना को राय को वहां से चले जाने को कहना पड़ा था।

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