Skip to main content

मैं उन में से हूं जो लिखकर फाड़कर फेंक देते हैं।


मैं दो दिन पहले साहिबाबाद के मार्केट में किसी काम से घूम रहा था। उसी दौरान मेरे ट्रेनी ने मेरा ध्यान सड़क के किनारे एक घर के बाहर एक बोर्ड की तरफ आकर्षित किया। तो मैंने उससे पूछा क्या हुआ। तो उसने कहा कि आज इन से मिलते हैं। मैंने कहा ठीक है।

तो दोस्तो ये महाशय थे भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा के साहिबाबाद अध्यक्ष रामजी झा।
तो मेरे ट्रेनी ने उनके घर के बेल बजाई और उन्हें बुलाया। एक आदमी लगभग 50 से 55 साल उम्र का बाहर आया। मेरी उनसे औपचारिक बातचीत हुई। उसके बाद शुरु होता है दिलचस्प वार्तालाप। जिसमें उन्होंने मीडिया कर्मियों को निशाने पर लेने की कोशिश की।

उन्होंने साहिबाबाद के स्थानीय अखबारों और उनमें काम करने वाले पत्रकारों पर आरोप लगाते हुए कहा  कि इन सभी लोगों को 2000-5000 के विज्ञापन चाहिए। इन्हें हमेशा विज्ञापन ही चाहिए होता है। अरे मैं तुम्हें इतने रुपयों का विज्ञापन क्यों दूं भाई। मैं क्या पागल हूं। मैं अखबार में विज्ञापन देने की बजाय इतने रुपयों के शहर में होर्डिंग और बेनर लगवा दूंगा। अखबार में विज्ञापन के मुकाबले ऐसे ज्यादा प्रचार होगा मेरा। और वो बड़े ही अजीब ढंग से हंसने लगे।

जब मैं यह सुन रहा था तो मैंने यह निश्चय कर रखा था। कि राम जी झा को अपनी बात पूरी कर लेने दूं। उसके बाद जवाब दूंगा।

मैंने रामजी झा से उनके इस वक्तवय पर जवाब दिया कि भाई साहब ये लोग बड़े ही भले और सीधे सच्चे लोग हैं। जो अखबार में समाज का आइना दिखाते हुए सच लिखने के लिए अखबार के लिए विज्ञापन की डिमांड करते हैं। उन्हें आप जैसे लोग इस तरह की संकुचित मानसिकता रखते हैं। बल्कि होना यह चाहिए कि वह आपके बारे में खोजी पत्रकारिता करें और सच को लोगों के सामने रखें। आपको भी बताएं कि यह सच है। और यदि उनमें सच लिखने में कुछ हिचक हो या कोई दवाब हो तो लिखकर फाड़ दें।

भाई साहब यदि कोई व्यक्ति होटल के टिशू पेपर पर यह लिखकर कि यह अमुक व्यक्ति चोर है तो इससे उस व्यक्ति कितना तनाव और बैचेनी होगी। पता नहीं किस किस ने यह पेपर पढ़ा होगा। और यह तो न्यूज पेपर है और सैंकड़ों से लेकर हजारों में वितरित होता है। तो क्या हाल हो सकता है। इसलिए पत्रकारों और मीडिया का अपमान करने की कोशिश न करें। मैं तो उन पत्रकारों में से हूं जो लिखकर फाड़कर फेंक देते हैं। और उसके बाद उनका चेहरा देखने लायक था। उसके बाद बातचीत का सिलसिला चलता रहा है।

Comments

Popular posts from this blog

बदहाल साहिबाबाद रेलवे स्टेशन

साहिबाबाद रेलवे स्टेशन दिल्ली के नजदीक होने के कारण काफी व्यस्त रहता है। यहां 98 पैंसेजर ट्रेन और 16 एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टॉपेज़ हैं। जिनसे लगभग 50 हजार यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। यही रेलवे स्टेशन अनियमिताओं का शिकार है। पूरे परिसर में गंदगी और आवारा पशुओं का जमावड़ा आम बात है। बंदरों के आतंक से भी यह स्टेशन अछूता नहीं है। टिकट खिड़की परिसर में लगी हुई दोनों एटीवीएम मशीनें महीनों से खराब पड़ी हुई हैं। इस परिसर में तीन टिकट खिड़की हैं और एक पूछताछ कार्यालय है। जिसमें से अक्सर दो बंद ही रहती हैं। जिसके चलते यात्रियों को होने वाली असुविधाओं के बारे में जब स्टेशन मास्टर नरेश मलिक से बात की गई तो उन्होंने स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए अपना दामन बचाने की कोशिश की। साहिबाबाद रेलवे स्टेशन मास्टर नरेश मलिक ने बताया कि कर्मचारियों की कमी हैं। मैं उनसे कहां तक काम करवाउं। पेयजल की बाधित व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि यह इंजीनियरिंग विभाग का काम है। इसके बारे में आप इस विभाग से बात करें। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह विभाग आपके आदेश के अधीन नहीं हैं तो उन्होंने चुप्पी साध ली। रेलवे स्टेशन पर ...

बलात्कार के बढ़ने के कारण क्या है

 पिछले कुछ सालों में बलात्कार और यौन शोषण के मामलों में बहुत तेजी आई है जिसने समाज को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है और एक नई बहस को जन्म दिया है इसके कारण क्या है  हैदराबाद मैं पशु चिकित्सक दिशा के साथ हुआ बलात्कार और उसके बाद उसकी पेट्रोल डालकर जला कर हत्या. इस घटना ने पूरे देश को उबाल दिया आक्रोश से भर दिया और जनाक्रोश चारों तरफ फूटने लगा.   मीडिया के माध्यम से एक नई बहस शुरू हुई और लोगों ने अपनी अपनी राय स्पष्ट करना शुरू कर दिया लोग बलात्कार जैसी सामाजिक बीमारी से तुरंत छुटकारा चाहते हैं और सख्त कानून की डिमांड कर रहे हैं.  सरकार भी सख्त कानून की बात कर रही है लेकिन कानून सख्त होने के बावजूद भी बलात्कार जैसी घटनाएं नहीं रुक रही है. पिछले 10 साल के यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें बढ़ोतरी ही ही हुई है.  दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप के बाद से अब तक हैदराबाद दिशा गैंगरेप तक समाज में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने के लिए नहीं मिला है बल्कि यौन शोषण और बलात्कार की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है एनसीआरबी के आंकड़े यही बताते हैं कि बलात्कार के मामले  ...

रथयात्रा का महारथी सवालों के चक्रव्यूह में

बीजेपी के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर से 11 अक्टूबर को रथ यात्रा पर निकल रहे हैं। यह रथ यात्रा बीजेपी सिताब दियारा से जेपी की जयंती के मौके पर भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू करेगी। इस बार यह बहुत ही चर्चा का विषय है। बीजेपी में भी इस पर घमासान मचा हुआ है। लेकिन इस बार रथयात्रा के महारथी आडवाणी अन्ना हजारे और रामदेव की वजह से भ्रष्टाचार के खिलाफ जो माहौल बना है उसे भुना लेना चाहते हैं और बीजेपी की खोती साख की लाज बचाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। आडवाणी की रथयात्रा को पार्टी व्यापक बनाने में जुट गई है। कोर ग्रुप की बैठक में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, अनंत कुमार, बाल आप्टे समेत कई नेताओं ने योजना को तराशने की कोशिश की। पहले इस यात्रा को महात्मा गांधी के जन्मदिन 2 अक्टूबर पर निकाले जाने पर विचार हो रहा था। लेकिन 11 अक्टूबर पर ही सहमति बनी। 41 दिन तक चलने वाली आडवाणी की रथयात्रा 20 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली के साथ पूरी होगी। 21 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने की उम्मीद है। उससे ठीक पहले भाजपा केंद्र की संप्रग सरकार को कठघरे में खड़ा करने की ...