अजय शर्मा
कुछ दिन पहले मुझे गाजियाबाद जाने का मौका मिला और मैं पहुंच गया गाजियाबाद के मेयर तेलूराम काम्बोज के आवास और कार्यालय पर। वक्त रहा होगा लगभग 11.30 का। मैंने जो देखा उसे देखकर दंग रह गया। तेलूराम काम्बोज अपने कार्यालय में एकदम अकेले बैठे हुए थे।
एक भी व्यक्ति उनके पास मौजूद नहीं था। मैंने उम्मीद की थी कि मेयर के यहां थोड़ी सी भीड़ देखने को मिल सकती है फरियादियों या मिलने वालों की। लेकिन मुझे निराशा हुई। मैं थोड़ी देर तक उनके ऑफिस के बाहर पार्क की रेलिंग के सहारे खड़ा रहा यह सोचते हुए शायद कोई मुझे गलत साबित कर दे। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। कुछ देर बाद उनकी सुरक्षा में लगा पुलिस का सिपाही अपनी स्पलेंडर पर आया।
लेकिन वो भी अंदर नहीं गया। आखिरकार मैंने अंदर जाने का फैसला किया। अंदर जाकर मैंने मेयर साहब को अपना परिचय दिया और मिलने पर अपनी खुशी जाहिर की। और औपचारिकता की बातें होती रहीं। बातों ही बातों में उन्होंने अपना पत्रकारिता का अनुभव मुझ से शेयर किया। जब मैं चलने लगा तो उन्होंने कहा कि कोई काम था क्या आपको ? मैंने कहा नहीं और मुस्कराया। उसी वक्त एक किताब उनकी टेबल पर रखी थी जिस पर उनकी फुल साइज की फोटो छपी थी।
जिज्ञासावश मैंने उठा ली और पूछा तो उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने उन पर एक किताब छापी है। आप भी पढ़ सकते हैं और वो किताब उन्होंने मुझे दे दी। उसके बाद मैं उठा और अभिवादन के बाद चल दिया।
मैं पूरे रास्ते मेयर के बारे मैं सोचता रहा 2-4 आदमियों की उपस्थिति तो गली मोहल्ले के छुटमुइये नेता टाइप आदमी के यहां रहती है। लेकिन यहां ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। पूर्व मेयर दमयंती गोयल और मौजूदा मेयर में जमीन आसमान का फर्क देखने को मिला। आखिर क्यों ? कुछ सवाल मेरे मन में उठने लगे।
क्या गाजियाबाद मेयर तेलूराम काम्बोज सिर्फ एक नाम मात्र है ?
क्या गाजियाबाद मेयर तेलूराम काम्बोज जनता के बीच लोकप्रिय नेता नहीं हैं ?
क्या यह फर्क बीजेपी का सत्ता में न हाने की वजह से है?
क्या मेयर की सीट गाजियाबाद से बीजेपी ने अपने ही दम पर जीती, जिसमें तेलूराम काम्बोज जी का कुछ भी योगदान नहीं था। यदि ऐसा था तो बीजेपी ने ऐसा क्यों किया ?
या फिर क्या मेयर तेलूराम काम्बोज राजनीति के कच्चे खिलाड़ी हैं?
साहिबाबाद लौटते हुए रास्तें में बीजेपी के सदस्य और पूर्व पार्षद से मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा मौजूदा मेयर गाजियाबाद में बीजेपी की एक बड़ी भूल है। साहब हम तो आज तक उनसे मिलने नहीं गए। अब आप समझ लीजिए। मुझे बहुत निराशा हुई।
कुछ दिन पहले मुझे गाजियाबाद जाने का मौका मिला और मैं पहुंच गया गाजियाबाद के मेयर तेलूराम काम्बोज के आवास और कार्यालय पर। वक्त रहा होगा लगभग 11.30 का। मैंने जो देखा उसे देखकर दंग रह गया। तेलूराम काम्बोज अपने कार्यालय में एकदम अकेले बैठे हुए थे।
एक भी व्यक्ति उनके पास मौजूद नहीं था। मैंने उम्मीद की थी कि मेयर के यहां थोड़ी सी भीड़ देखने को मिल सकती है फरियादियों या मिलने वालों की। लेकिन मुझे निराशा हुई। मैं थोड़ी देर तक उनके ऑफिस के बाहर पार्क की रेलिंग के सहारे खड़ा रहा यह सोचते हुए शायद कोई मुझे गलत साबित कर दे। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। कुछ देर बाद उनकी सुरक्षा में लगा पुलिस का सिपाही अपनी स्पलेंडर पर आया।
लेकिन वो भी अंदर नहीं गया। आखिरकार मैंने अंदर जाने का फैसला किया। अंदर जाकर मैंने मेयर साहब को अपना परिचय दिया और मिलने पर अपनी खुशी जाहिर की। और औपचारिकता की बातें होती रहीं। बातों ही बातों में उन्होंने अपना पत्रकारिता का अनुभव मुझ से शेयर किया। जब मैं चलने लगा तो उन्होंने कहा कि कोई काम था क्या आपको ? मैंने कहा नहीं और मुस्कराया। उसी वक्त एक किताब उनकी टेबल पर रखी थी जिस पर उनकी फुल साइज की फोटो छपी थी।
जिज्ञासावश मैंने उठा ली और पूछा तो उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने उन पर एक किताब छापी है। आप भी पढ़ सकते हैं और वो किताब उन्होंने मुझे दे दी। उसके बाद मैं उठा और अभिवादन के बाद चल दिया।
मैं पूरे रास्ते मेयर के बारे मैं सोचता रहा 2-4 आदमियों की उपस्थिति तो गली मोहल्ले के छुटमुइये नेता टाइप आदमी के यहां रहती है। लेकिन यहां ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। पूर्व मेयर दमयंती गोयल और मौजूदा मेयर में जमीन आसमान का फर्क देखने को मिला। आखिर क्यों ? कुछ सवाल मेरे मन में उठने लगे।
क्या गाजियाबाद मेयर तेलूराम काम्बोज सिर्फ एक नाम मात्र है ?
क्या गाजियाबाद मेयर तेलूराम काम्बोज जनता के बीच लोकप्रिय नेता नहीं हैं ?
क्या यह फर्क बीजेपी का सत्ता में न हाने की वजह से है?
क्या मेयर की सीट गाजियाबाद से बीजेपी ने अपने ही दम पर जीती, जिसमें तेलूराम काम्बोज जी का कुछ भी योगदान नहीं था। यदि ऐसा था तो बीजेपी ने ऐसा क्यों किया ?
या फिर क्या मेयर तेलूराम काम्बोज राजनीति के कच्चे खिलाड़ी हैं?
साहिबाबाद लौटते हुए रास्तें में बीजेपी के सदस्य और पूर्व पार्षद से मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा मौजूदा मेयर गाजियाबाद में बीजेपी की एक बड़ी भूल है। साहब हम तो आज तक उनसे मिलने नहीं गए। अब आप समझ लीजिए। मुझे बहुत निराशा हुई।

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