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इतिहास के अंधेरे में सुरों की मल्लिकाएं

जब भी बीसवीं सदी की मशहूर गायिकाओं का जिक्र छिड़ेगा तो कई फनकाराएं गुमनाम ही रह जाएगी। ऐसी गायिकाओं की लिस्ट बहुत ही लंबी है जिनके बारे में शायद ही आप जानते हो। इन गायिकाओं के नाम अब गुजरे जमाने की बात हो चुकी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन की संख्या लगभग 500 से ज्यादा है। जी हां उस वक्त इन गायिकाएं के गाने ग्रामोफोन और चूड़ी के बाजे पर बजा करते थे। ऐसी ही भूली-बिसरी गायिकाओं पर रोशनी डालता अजय शर्मा का यह आलेख।



इतिहास के अंधेरे में दफन इन गायिकाओं में से एक बहुत ही चर्चित गायिका थी गौहर जान। जिनका 1902 में एचएमवी कंपनी ने गानों का रिकार्ड बनाया था। वह भारत की पहली गायिका थीं, जिनके गाने का एलपी रिकार्ड निकला था। इससे पहले 1899 में लंदन की ग्रामोफोन कंपनी ने उनका गाना रिकार्ड किया था। गौहर जान के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि वह महात्मा गांधी को आजादी की लड़ाई में चंदा दिया करती थीं। इन गायिकाओं में अधिकतर तवायफें और कोठेवालियां होती थीं। दुर्भाग्य से उनके गानों को संग्रहित नहीं किया गया। यह बहुत दुखद है कि हम जेद्दन बाई जैसी गायिकाओं को तो जानते हैं जो नर्गिस की मॉ थी। पर कमला, झरिया,अंगूरवाला,इन्दुबाला, काननबाला, गोदावरी, जादूमणि, मणिबाला,मुमताज,जोहराबाई, आगरेवाली, मुन्नीजान जैसी गायिकाओं को नहीं जानते। ब्रिटिश शोधार्थी माइकल किनियर्स ने 1902 से 1908 के बीच 332 गायिकाओं में से 74 ऐसी विशिष्ट गायिकाओं की सूची बनाई थी, जिनके रिकार्ड कहां हैं किसी को नहीं मालूम। ये गायिकाएं ध्रुपद, धमार, ख्याल, तराना, ठुमरी, दादरा आदि गाती थीं। भारत में एचएमवी कंपनी 1895 में खुली और दिल्ली में महाराजा लाल संस ने ग्रामोफोन की शुरूआत की। 1878 में सिलेंडर आकार के चूडी के बाजे थे जिनके सामने गाना गाकर रिकार्ड किया जाता था। श्रीमती केसर बाई केरकर और रसूलन बाई तो आजादी के बाद जिंदा रहीं तथा उन्हें संगीत नाटक अकादमी अवार्ड भी मिला। केसरबाई की आवाज तो नासा ने 1977 में अंतरिक्ष भी भेजी थी। इतिहास के अंधेरे में दफन इन गायिकाओं के बारे में तो अभिलेखागारों में दस्तावेज भी मौजूद नहीं हैं।

ऐसी ही गायिकाओं के लिए एक संस्था आगे आई है। जो लोगों का ध्यान इन गायिकाओं की ओर खींचने का प्रयास कर रही है। इसी के चलते इन भूली बिसरी गायिकाओं की एक प्रदर्शनी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में कुछ दिन पहले रखी गई थी। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इनके बारे में जान सके। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह की पत्नी गुरूशरण कौर ने किया। सेंटर फॉर मीडिया एंड अल्टर्नेटिव कम्युनिकेशन (सीएमएसी) और फोर्ड फाउंडेशन ने यह प्रदर्शनी आयोजित की थी। बीसवीं सदी के आरंभिक दशकों में 500 से भी अधिक गायिकाएं थीं। जिनके रिकार्ड निकाले पर आज उनका अता-पता नहीं है और संग्रहालयों तथा अभिलेखागारों में भी उनके रिकार्ड तथा दस्तावेज नहीं है। इस संस्था ने बडी मुश्किल से शोध और खोज कर इन गायिकाओं में से कुछ सिंगरों के रिकार्ड, फोटो आदि संग्रहित किए हैं।

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