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Showing posts from April, 2010

राष्ट्रमंडल खेल और पर्यटक, तैयार है आगरा

अक्टूबर में शुरु होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ताजमहल और फतेहपुर सीकरी के निकट सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करेगी। जिसमें विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां शिरकत करेगी। गौरतलब है कि आगामी तीन अक्टूबर से दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल शुरू हो रहे हैं। पन्द्रह दिन तक चलने वाले इस आयोजन में एक लाख से ज्यादा पर्यटकों के आने की उम्मीद है। पर्यटकों के लिए दिल्ली के नजदीक होने के कारण राजस्थान का जयपुर और उत्तरप्रदेश में आगरा आकर्षण का मुख्य केन्द्र होगें। वैसे भी भारत आने वाले पर्यटक ताजमहल देखने जरूर आते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर ताजमहज के आसपास राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम की योजना बनाई है जिसमें फिल्म और कला के क्षेत्र की जानी मानी हस्तियों को आमंत्रित किया जाएगा। ताज महोत्सव की तर्ज पर होने वाले इस समारोह में जानी मानी हस्तियां पर्यटकों को आकर्षित करेंगी। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के महानिदेशक अवनीश अवस्थी ने गुरुवार को बताया कि आगरा में पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र ताजमहल...

फेंगशुई का क्रेज

फेंग शुई भारत में अब काफी चर्चित हो चुका है। धीरे धीरे लोगों में इसका क्रेज बढ़ता जा रहा है। लोगों की उत्सुकता का आलम यह है कि लोग इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा से जानना चाहते हैं। चीन का यह लोकप्रिय वास्तुशास्त्र भारत में भी अपनी जड़े जमा रहा है। आज लगभग हर दूसरा व्यक्ति आपको फेंग शुई का उपयोग करता हुआ मिल जाएगा। इसने बहुत ही जल्द लोगों का विश्वास जीतने में सफलता हासिल की है। जिसके चलते इसके जानकार और विशेषज्ञ भी उसी रफ्तार से बढ़ रहे हैं। इसी फेंग शुई पर कुछ जानकारी हम आपको दे रहें हैं। फेंग शुई एक तरह की सकारात्मक ऊर्जा है जो वातावरण में मौजूद ऊर्जा को सुख, समृद्धि और सौभाग्य के लिए उपयोग करती है। वातावरण में अच्छी ऊर्जाएं आपके चारों तरफ मौजूद होती है। यह फेंग शुई उन्हीं ऊर्जाओं को आपकी तरफ खींच कर लाती हैं। जिसका एहसास आप अपनी जिदंगी में हर पल महसूस करत हैं। यह एनर्जी सभी प्रकार के रुप रंग, आकार और आकृति के साथ आपकी तरफ आती है। सामान्यत फेंग शुई एनर्जी को भाग्यशाली माना जाता है। फेंगशुई का प्रयोग फेंग शुई में लगभग सभी प्रकार के नेचुरल तत्वों का प्रयोग किया जाता है। जि...

इतिहास के अंधेरे में सुरों की मल्लिकाएं

जब भी बीसवीं सदी की मशहूर गायिकाओं का जिक्र छिड़ेगा तो कई फनकाराएं गुमनाम ही रह जाएगी। ऐसी गायिकाओं की लिस्ट बहुत ही लंबी है जिनके बारे में शायद ही आप जानते हो। इन गायिकाओं के नाम अब गुजरे जमाने की बात हो चुकी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन की संख्या लगभग 500 से ज्यादा है। जी हां उस वक्त इन गायिकाएं के गाने ग्रामोफोन और चूड़ी के बाजे पर बजा करते थे। ऐसी ही भूली-बिसरी गायिकाओं पर रोशनी डालता अजय शर्मा का यह आलेख। इतिहास के अंधेरे में दफन इन गायिकाओं में से एक बहुत ही चर्चित गायिका थी गौहर जान। जिनका 1902 में एचएमवी कंपनी ने गानों का रिकार्ड बनाया था। वह भारत की पहली गायिका थीं, जिनके गाने का एलपी रिकार्ड निकला था। इससे पहले 1899 में लंदन की ग्रामोफोन कंपनी ने उनका गाना रिकार्ड किया था। गौहर जान के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि वह महात्मा गांधी को आजादी की लड़ाई में चंदा दिया करती थीं। इन गायिकाओं में अधिकतर तवायफें और कोठेवालियां होती थीं। दुर्भाग्य से उनके गानों को संग्रहित नहीं किया गया। यह बहुत दुखद है कि हम जेद्दन बाई जैसी गायिकाओं को तो जानते हैं जो नर्गिस की मॉ थी। पर कम...