समलैंगिकता का मामला आदोलन का रुप लेता जा रहा है। यह भारतीय संस्कृति में बदलाव की हवा है या फिर उसके साहसिक और मुखर होने का मामला है। वैसे यह बहुत ही हिम्मतभरा कदम है ऐसे संबधों को खुलकर सामाजिक मंच पर अपनाना। मेरा मानना है समलैंगिकता बहस का मामला नहीं है। बल्कि यह व्यक्तिगत साहस का मामला है। ऐसे संबध पहले भी थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। इसमें नया कुछ भी नहीं है। अगर नया कुछ है तो वह ...
आज काफी दिनों के बाद लिखने का मौका मिल रहा है । पिछले दो महीनों से मैं बहुत फंसा हुआ हूं जिदंगी अलग अलग तरह के रंगों को दिखा रही है। अब मैने डिसाईड किया है। कि मैं डेली लिखा करूंगा।
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