अक्सर पहले लोग मुझसे पूछा करते थे कि दिल्ली कैसा शहर है। तो मैं बहुत ही खुले शब्दों में कहा करता था कि यह बहुत ही गंदा और भद्दा शहर है। लोग मेरी बात सुनकर हैरत में पढ़ जाया करते थे और मैं सोचा करता था ये सभी लोग ऐसे रिएक्ट क्यों करते हैं। लेकिन अब थोड़ा सा सकून है कि दिल्ली को लेकर। थैंक्स टू कॉमनवेल्थ गेम्स। जिसके कारण दिल्ली की कायापल्ट का काम चल रहा है। यह ठीक उस तरह है बेटी की शादी से पहले अपने घर की साज-सजावट और मेहमानों के स्वागत के लिए तैयारियां। लेकिन मैं यहां यह कहूंगा साफ-सफाई, सजावट, और सलीके को दिल्ली के लिए कल्चर बना दो। अरे भई दिल्ली को दिल्ली ही बने रहने दो। वर्ना सभी जानते हैं बारात के जाने के बाद कितनी गंदगी फैलती है।
साहिबाबाद रेलवे स्टेशन दिल्ली के नजदीक होने के कारण काफी व्यस्त रहता है। यहां 98 पैंसेजर ट्रेन और 16 एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टॉपेज़ हैं। जिनसे लगभग 50 हजार यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। यही रेलवे स्टेशन अनियमिताओं का शिकार है। पूरे परिसर में गंदगी और आवारा पशुओं का जमावड़ा आम बात है। बंदरों के आतंक से भी यह स्टेशन अछूता नहीं है। टिकट खिड़की परिसर में लगी हुई दोनों एटीवीएम मशीनें महीनों से खराब पड़ी हुई हैं। इस परिसर में तीन टिकट खिड़की हैं और एक पूछताछ कार्यालय है। जिसमें से अक्सर दो बंद ही रहती हैं। जिसके चलते यात्रियों को होने वाली असुविधाओं के बारे में जब स्टेशन मास्टर नरेश मलिक से बात की गई तो उन्होंने स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए अपना दामन बचाने की कोशिश की। साहिबाबाद रेलवे स्टेशन मास्टर नरेश मलिक ने बताया कि कर्मचारियों की कमी हैं। मैं उनसे कहां तक काम करवाउं। पेयजल की बाधित व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि यह इंजीनियरिंग विभाग का काम है। इसके बारे में आप इस विभाग से बात करें। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह विभाग आपके आदेश के अधीन नहीं हैं तो उन्होंने चुप्पी साध ली। रेलवे स्टेशन पर ...
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