अक्सर पहले लोग मुझसे पूछा करते थे कि दिल्ली कैसा शहर है। तो मैं बहुत ही खुले शब्दों में कहा करता था कि यह बहुत ही गंदा और भद्दा शहर है। लोग मेरी बात सुनकर हैरत में पढ़ जाया करते थे और मैं सोचा करता था ये सभी लोग ऐसे रिएक्ट क्यों करते हैं। लेकिन अब थोड़ा सा सकून है कि दिल्ली को लेकर। थैंक्स टू कॉमनवेल्थ गेम्स। जिसके कारण दिल्ली की कायापल्ट का काम चल रहा है। यह ठीक उस तरह है बेटी की शादी से पहले अपने घर की साज-सजावट और मेहमानों के स्वागत के लिए तैयारियां। लेकिन मैं यहां यह कहूंगा साफ-सफाई, सजावट, और सलीके को दिल्ली के लिए कल्चर बना दो। अरे भई दिल्ली को दिल्ली ही बने रहने दो। वर्ना सभी जानते हैं बारात के जाने के बाद कितनी गंदगी फैलती है।
आज काफी दिनों के बाद लिखने का मौका मिल रहा है । पिछले दो महीनों से मैं बहुत फंसा हुआ हूं जिदंगी अलग अलग तरह के रंगों को दिखा रही है। अब मैने डिसाईड किया है। कि मैं डेली लिखा करूंगा।
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