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Showing posts from May, 2014

इस बार लोकसभा चुनाव की योजना में 18 महीने लगे

भारत में इस बार के लोकसभा चुनाव के सहज रूप से संपन्न होने और शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता के हस्तानांतरण की दुनिया भर में तारीफ हुई, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस चुनाव की शांतिपूर्ण ढंग से प्रभावी योजना बनाने का सिलसिला 18 महीने पहले ही आरंभ हो गया था। साल 2014 में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की लोकसभा की 543 सीटों के लिए हुए इस चुनाव में कुल 83.05 करोड़ मतदाता, 900,000 मतदान केंद्र, 8,000 उम्मीदवार थे। इसमें जिस बड़े पैमाने व्यक्तियों और मशीन का इस्तेमाल हुआ उसके बारे में दुनिया में कहीं और कल्पना भी नहीं की जा सकती। चुनाव आयोग के एक शीर्ष सूत्र ने कहा, निश्चित तौर पर यह परिचालनगत उपलब्धि है। इस बड़े अभ्यास की योजना 18 महीने से अधिक समय पहले ही शुरू हो गई थी और चुनाव आयोग के नेतत्व ने बिना किसी गड़बड़ी के प्रभावी, शांतिपूर्ण और उच्च गुणवत्ता वाला चुनाव कराने का पर ध्यान केंद्रित किया। 543 लोकसभा सीटों पर चुनाव संपन्न कराने के लिए पूरे देश में 669,000 चुनाव अधिकारियों की तैनाती की गई। सूत्र ने कहा, अपनी प्रभावशीलता को लेकर इस चुनाव की सराहना की जा रही है, इसे उसी नौकरशाही ने संपन्न कराया जिस...

भाजपा ने बदली उत्तर, पश्चिम भारत की राजनीति

  लोकसभा चुनाव में भाजपा के जबर्दस्त प्रदर्शन से देश के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्र में राजनीति परिदृश्य बदल गया है जहां कांग्रेस के साथ सपा, बसपा, नेकां, जदयू और राकांपा जैसे क्षेत्रीय दलों का प्रभाव समाप्त होता दिखा रहा है।     मायावती की बहुजन समाज पार्टी और फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस क्रमश: उत्तर प्रदेश और जम्मू कश्मीर में अपना खाता भी नहीं खोल सकी। उत्त्तर प्रदेश में भाजपा ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया और इस राज्य का भाजपा को केंद्र की सत्ता में लाने में अहम योगदान रहा।     उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर और गुजरात से लोकसभा के 288 सीटें आती हैं। भाजपा और उसके सहयोगियों ने इन राज्यों में 16वीं लोकसभा चुनाव में काफी संख्या में सीटें हासिल की।   इन राज्यों में क्षेत्रीय दलों को भाजपा के हाथों करारी पराजय का सामना करना पड़ा। पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने वाली आप को पंजाब में चार सीटों पर जीत मिली। पार्टी दिल्ली समेत अन्य प्रदेशों में खाता खोलने में विफल रही। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने...

क्या होगा दिल्ली चिधान सभा का, चुनाव या नई सरकार का गठन

लोकसभा चुनावों में भाजपा की बड़ी जीत से उत्साहित दिल्ली भाजपा प्रमुख हर्षवर्धन ने रविवार को कहा कि पार्टी शहर में निकट भविष्य में किसी भी समय विधानसभा चुनाव के लिए तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा चुनाव में पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने का भरोसा भी जताया।     हर्षवर्धन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भाजपा किसी भी तरह के जोड़ तोड़ से दिल्ली में सरकार बनाने की कोशिश नहीं करेगी और शहर में शासन के वास्ते स्पष्ट जनादेश के लिए चुनाव का इंतजार करेगी। हम ताजा विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हैं। मुझे लगता है जल्द से जल्द चुनाव होना चाहिए। मैं आश्वस्त हूं कि चुनाव होने पर दिल्ली की जनता हमें स्पष्ट जनादेश देगी।     भाजपा को शहर में सभी सातों सीटों पर एक लाख से लेकर 2.6 लाख के अंतर के बीच जीत मिली। शहर में लोकसभा चुनावों में भाजपा की वोट हिस्सेदारी भी बढकर 46.1 प्रतिशत हो गयी जबकि विधानसभा चुनाव में पार्टी को 33.07 प्रतिशत वोट मिले थे। वर्धन को चांदनी चौक सीट से 1.35 लाख वोट से जीत मिली। जल्द विधानसभा चुनाव का समर्थन करते हुए हर्षवर्धन ने कहा कि चुनाव अगले आठ महीने के भीतर हो...

मैं उन में से हूं जो लिखकर फाड़कर फेंक देते हैं।

मैं दो दिन पहले साहिबाबाद के मार्केट में किसी काम से घूम रहा था। उसी दौरान मेरे ट्रेनी ने मेरा ध्यान सड़क के किनारे एक घर के बाहर एक बोर्ड की तरफ आकर्षित किया। तो मैंने उससे पूछा क्या हुआ। तो उसने कहा कि आज इन से मिलते हैं। मैंने कहा ठीक है। तो दोस्तो ये महाशय थे भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा के साहिबाबाद अध्यक्ष रामजी झा। तो मेरे ट्रेनी ने उनके घर के बेल बजाई और उन्हें बुलाया। एक आदमी लगभग 50 से 55 साल उम्र का बाहर आया। मेरी उनसे औपचारिक बातचीत हुई। उसके बाद शुरु होता है दिलचस्प वार्तालाप। जिसमें उन्होंने मीडिया कर्मियों को निशाने पर लेने की कोशिश की। उन्होंने साहिबाबाद के स्थानीय अखबारों और उनमें काम करने वाले पत्रकारों पर आरोप लगाते हुए कहा  कि इन सभी लोगों को 2000-5000 के विज्ञापन चाहिए। इन्हें हमेशा विज्ञापन ही चाहिए होता है। अरे मैं तुम्हें इतने रुपयों का विज्ञापन क्यों दूं भाई। मैं क्या पागल हूं। मैं अखबार में विज्ञापन देने की बजाय इतने रुपयों के शहर में होर्डिंग और बेनर लगवा दूंगा। अखबार में विज्ञापन के मुकाबले ऐसे ज्यादा प्रचार होगा मेरा। और वो बड़े ही अजीब ढंग...