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Showing posts from January, 2011

मार्डन वुमेन विद सिगरेट और ड्रिंक्स

कुछ सालों से समूचे विश्व को महिलाओं की बढ़ती शाक्ति ने प्रभावित किया है। महिलाएं तमाम नए-नए पेशों में अपनी उपस्थित दर्ज कर चुकी हैं और इससे उनमें आत्मविश्वास का भी काफी इजाफा हुआ। इस शाक्ति ने जहां उन्हें समाज में एक नया मुकाम दिलाया है वहीं इस वर्क प्रेशर के चलते उनमें सिगरेट और शराब की लत को भी बढ़ाया है। नशे की लत कभी तो वर्क प्रशेर को कम करने में सहायक हुई लेकिन ज्यादातर इस लत ने महिलाओं को नई पीढ़ी की माडर्न महिला का खिताब दिया। भारत में भी महिलाओं ने आईटी, बैकिंग, बीपीओ और मीडिया जैसे क्षेत्रों में अपनी एक पेंठ बना ली है। लेकिन इस न्यू जेनरेशन की वूमेन के तमगे को कायम रखने के लिए कुछ महिलाओं ने स्मोकिंग और ड्रिंक जैसी आदतों को निरविरोध अपना लिया है। अब डिस्को में थिरकते कदम, हाथ में छलकता जाम और होठों के बीच दबी सिगरेट सिर्फ अमीर महिला की नहीं बल्कि बेहद मार्डन समझी जाने वाली महिला की छवि को पेश करते हैं। स्मोकिंग करना और अल्होकल का सेवन करना आज माडर्न समझी जाने वाली महिलाओं के लिए फैशन स्टेटमेंट बन चुका है। पहले के समय में देखा जाता था कि वही महिलाएं नशे से दोस्ती करती थी जो...

बिग बॉस का तमाशा

मैंने अभी तक बिग बॉस का एक भी एपीसोड नहीं देखा है। और न ही राखी का इंसाफ देखने को मौका मिला। जब भी देखा चलते चलते देखा या फिर चैनल लगाते हुए नजर पड़ गई तो थोड़ा रुक कर देख लिया। जब भी देखा न्यूज चैनल पर देखा। जब मैंने इसको देखना और सुनना शुरु किया तो बड़ा अजीब सा लगा कि यह किस तरह का प्रोग्राम है। ये लोग किस तरह के समाज और संस्कृति को दिखा रहे हैं। इन दोनों प्रोग्राम को लेकर जो हंगामा मचा उसका कारण सिर्फ इतना है कि टीवी का चरित्र सती सवित्री जैसा माना जाता रहा है। लोग उससे वैसी ही उम्मीद करते हैं। लेकिन लगभग आठ साल पहले टीवी सीरियल क्योंकि सास भी कभी बहू थी में एक बलात्कार की घटना का फिल्मांकन किया गया था। जिसने टीवी चरित्र की सभी हदें पार कर दी थी। तब हंगामा क्यों नहीं मचा। अब भी कुछ सीरियल में ऐसे दृश्यों की भरमार है। जिन्हें परिवार के साथ नहीं देख सकते। जमाना बहुत तेजी से बदल रहा है। टीवी संस्कृति ने बेडरुम और ड्राइंगरुम में फर्क खत्म कर दिया है।