सहस्राब्दि जनसंख्या का अस्सी फीसद हिस्सा संदेश लिख कर या आॅनलाइन संवाद करना ज्यादा पसंद करता है। यह खुलासा आॅफकॉम के एक अध्ययन में हुआ है। इसके अनुसार सोलह से चौबीस वर्ष की आयु के पंद्रह फीसद युवा अपने फोन का इस्तेमाल लोगों से बातचीत के लिए नहीं करना चाहते, बल्कि मौखिक बातचीत के स्थान पर वे संदेश भेजना अधिक पसंद करते हैं। आज की किशोर पीढ़ी एक ही कमरे में अपने आसपास बैठे लोगों से बात करने के बजाय संदेश ही भेजती है। दरअसल, हम एक शोर रहित और आवाज रहित विश्व का हिस्सा बन चुके हैं। सार्वजनिक स्थानों पर होते हुए भी एक निजी विश्व निर्मित हो जाता है, जैसे भीड़ में, ट्रेन में, सड़क पर कहीं भी चलते हुए या बैठ कर हम ईअरफोन के जरिए अपना प्रिय संगीत सुन सकते हैं। जबकि एक-दो दशक पहले तक ट्रेन या बस में यात्रा करते समय लोग एक-दूसरे से बातचीत करके परिचय बढ़ाने में रुचि रखते थे, राजनीतिक व गैर-राजनीतिक विषयों पर चर्चा करते थे, खाना-पीना साझा करते थे, लेकिन अब यात्रा के दौरान ऐसा कोई शोर नहीं सुनाई देता, कोई अनुभव नहीं होता। अधिकांश लोगों के कानों में ईअरफोन या हेडफोन नजर आता है, या फिर मोबाइल, लैपटॉप पर वी...