अजय शर्मा संपादक अणुव्रत एवं वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार स्वर्णिम भारत की परिकल्पना अपने आप में ही सुख की अनुभूति देती है। आजादी से पहले और बाद दोनों ही कालचक्रों में इसकी परिकल्पना की गई। कभी इसे पुरूषोत्तम भगवान राम के देश के रूप में देखा गया तो कभी राष्टपिता महात्मा गांधी के देश के रूप में इसे देखा गया। आजादी के बाद से अब तक हमने महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर हिन्दुस्तान का निर्माण और विकास करने का प्रयत्न किया है। स्वर्णिम भारत के निर्माण में महात्मा गांधी जैसे समाज सुधारक के अलावा और भी ऐसे समाज सुधारक, युग द्रष्टा हुए हैं जिन्होंने एक सभ्य, खुशहाल एवं विकासशील देश के निर्माण में अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। ये वो महापुरूष थे जिन्होंने इंसान को इंसान बनाने की कोशिशें की हैं। ऐसे महापुरूषों की श्रेणी में अणुव्रत आंदोलन के प्रवर्तक आचार्य श्री तुलसी और अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाप्रज्ञ हैं एवं वर्तमान में अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण हैं, जोकि पूरे देश में अपनी अहिंसा यात्रा पर हैं। पिछले 71 सालों से भारत को स्वर्णिम भारत बनाने की पुरजोर कोशिशें की जा रही...