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Showing posts from December, 2014

गंजापन: इलाज है ना घबराएं

अचानक से गंजापन आना और बालों का झड़ना बीमारी का कारण हो सकता है और ऐसे में आपको तुरंत डाक्टरी सलाह लेनी चाहिए। गंजेपन के इलाज पर अब तक काफी रिसर्च की जा चुकी है। फिर से बाल उगाने में सफलता अभी भी ना के बराबर ही मिली है। गिरते या झड़ते बालों को वापस भले ही नहीं लाया जा सकता लेकिन इन्हें रोका जरुर जा सकता है। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा और जिज्ञासा का विषय है कि गंजापन क्या और कैसे यह लोगों में होता है। इसी जुड़े कुछ तथ्यों पर हम चर्चा करेंगे। गंजापन क्या है  गंजापन की स्थिति में सिर के बाल बहुत कम रह जाते हैं। गंजापन कम या अधिक हो सकता है। गंजापन को एलोपेसिया भी कहते हैं। जब असामान्य रूप से बाल बहुत तेजी से झड़ने लगते हैं तो नये बाल उतनी तेजी से नहीं उग पाते या फिर पहले के मुकाबले बाल पतले या कमजोर उगते हैं। इस कारण बालों का कम होना या कम घना होना शुरू हो जाता है ऐसी स्थिति गंजेपन की ओर जाती है। गंजेपन के प्रकार 1.एंड्रोजेनिक एलोपेसिया- यह सबसे ज्यादा लोगों में होने वाला गंजापन है और महिलाओं से ज्यादा पुरुषों में होता है। इसीलिए इसे पुरुषों का गंजापन भी कहा जाता है। यह स्...

महिलाओं को सुरक्षा और अधिकार के लिए चेतना होगा

मित्रोंहम आज महिलाओं के अधिकार, उनके मान-सम्मान और सुरक्षा को लेकर देश के प्रमुख कानूनों के बारे में विस्तार से चर्चा करगें। हम वैसी घटनाओं और हरकतों को लेकर कानून के प्रावधानों की चर्चा कर रहे हैं, जिन्हें आमतौर पर महिलाएं चुपचाप सहन कर लेती हैं, जबकि इनसे निबटने के लिए कानून और सहायता उपलब्ध हैं। महिलाएं चाहें, तो उनकी मदद ले सकती हैं और शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक उत्पीड़न से खुद को बचा सकती हैं। छेड़छाड़, मेले-ठेले में पुरुषों द्वारा जानबूझ कर की जाने वाली धक्का-मुक्की, ईल टिप्पणी और इशारे महिलाओं को आतंकित करने वाली घटनाएं हैं। ऐसी घटनाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव है। उसी तरह ससुराल में घर के अंदर किये जाने वाले अमानवीय व्यवहार को रोकने की भी कानूनी व्यवस्था है। दहेज उत्पीड़न को लेकर तो कानून और अदालत बेहद संवेदनशील है। इन सब का लाभ लिया जाना चाहिए। विवाह का निबंधन भी जरूरी है. यह पुरुष और महिला दोनों के हित में हैं। आज हम इसी पर चर्चा कर रहे हैं। अनिवार्य विवाह निबंधन विवाह जीवन और समाज की एक सामान्य और जरूरी संस्कार है. सदियों से चली आ रही इस रस्म को पूरा करने...

फेसबुक पर थोड़ा संभलकर, हो सकती है जेल

सोशल नेटवर्किंग साइट, वाह्टसअप, वी चैट, लाइन, टेलीग्राम, हाइक जैसी एप्लीकेशन और ऑनलाइन शॉपिंग का क्रेज युवाओं के साथ-साथ सभी उम्र के लोगों में बहुत तेजी से बढ़ा है। जिसके चलते इनके बीच गलाकाट कंपीटशन भी चरम पर है। सभी कंपनियां युवाओं को अपनी ओर लुभाने के लिए नये-नये फीचर के साथ अपने को अपडेट कर रही हैं। गौरतलब है कि 1 जनवरी से फेसबुक भी अपने यूजर के लिए नई पॉलिसी और अपडेट के साथ आ रही है। लेकिन इसके साथ यूजर को इस तरह के एप्लीकेशन को इस्तेमाल करते वक्त कुछ सावधानियां रखनी चाहिए। थोड़ी सी लापरवाही साइबर संसार में आपकी फजीहत और कानूनी पेंच में फंसा सकती है। ऐसे में साइबर कानून की थोड़ी सी जानकारी आपको सेफ रहने में मदद कर सकती है। क्या है साइबर क्राइम  इंटरनेट के ज़रिए किए जाने वाले अपराधों को साइबर क्राइम कहते हैं। जैसे आपके बैंक खाते की जानकारी लेकर उससे पैसा चुराना, आपके क्रैडिट कार्ड से चीज़ें ख़रीदना, स्वयं को एक कम्पनी दिखाकर लोगों से निवेश कराना, सॉफ़्टवेयर की चोरी, दोषपूर्ण सॉफ़्टवेयर भेजकर कम्प्यूटर को दूषित करना या किसी कम्प्यूटर सिस्टम में ग़ैर क़ानूनी रूप से घुसना।...