तेज रफ्तार से बाइक चलाने और खानपान में गड़बड़ी जैसे विभिन्न कारणों से आजकल अस्पतालों में हड्डी टूटने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बाइक फिसलने से लेकर फर्श पर स्लिप होने जैसे सामान्य एक्सीडेंट के घायलों में लगभग 40 प्रतिशत व्यक्तियों की तीन से पांच हड्डियां तक टूट रही हैं। हाथ की कलाई, पैर और कूल्हे में फ्रेक्चर दुपहिया वाहनों से होने वाली दुर्घटना में सबसे ज्यादा देखने में आता है। इसमें हिप बोन यानि कि कूल्हे का फ्रेक्चर सबसे अधिक खतरनाक है। जोकि आर्थाेपीडिक चिकित्सकों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाला तथ्य यह भी है कि शहरों में रह रहे युवाओं की हड्डियां केल्शियम की कमी के कारण और ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं की हड्डी प्रोटीन की कमी के कारण कमजोर हो रही हैं। इसलिए ऐसे में आवयश्कता पड़ती है एक कुशल आर्थाेपीडिक डॉक्टर और जीवन में कुछ सावधानियों की। इसी स्वास्थय समस्या पर आज हम विस्तार से चर्चा कर रहें हैं। सड़क हादसों में घायल होने वाले सिर पर चोट न लगने के चलते बच जाएं, लेकिन शरीर के बाकी के हिस्से की चोट से नहीं बच सकते। जोकि काफी गंभ...