सिर्फ कूटनीति और सिर्फ कूटनीति यूपी के नगर निकाय चुनाव संपन्न हो चुके हैं लेकिन उसकी तपिश अभी तक बरकरार है। जीते और हारे उम्मीदवारों के कार्यकत्ता इस चुनाव की समीक्षा करने में लगे हुए हैं। जिसने जीत का स्वाद चखा है वह लम्बे हनीमून पर है। जो हार गया है वह कोसने और आरोप लगाने में व्यस्त है। नगर निगम और विकास प्राधिकरण के कर्मचारी अपने चिर परिचित अंदाज में चाटूकारिता में लग गए हैं। सभी नये जन प्रतिनिधियों का दरबार सज गया है। ये पार्षद अपनी गोटियां सेट करने में लग चुके है। इन के घर और दफ्तर का माहौल ऐसा है जैसे राम का राज्याभिषेक हुआ हो। वहीं हारे हुए पार्षदों का घर और आंगन सूना पड़ा हुआ है। ये लोग वोटरों को नासमझ और हार का ठीकरा अपनी टीम और विभीषणों पर फोड़ रहे हैं। इस पूरे निकाय चुनाव में सभी हथकंडों का जमकर उपयोग किया गया। शराब और नोट जमकर लूटाए गए। प्रतियोगी उम्मीदवारों ने फर्जी वोट बैंक और वोटर तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। खाली प्लाटों और बंद पड़े मकानों पर सैकड़ों वोट तैयार किए गए। एक दूसरे के वोटों को कम करने के लिए वोटरों के नाम तक...